तिरुपति मंदिर के पास 7 टन सोना, 30 टन चांदी

  • 4 जुलाई 2016

चाहे त्योहारों के दौरान ख़रीददारी हो, शादी में उपहार के रूप में तोहफ़ा देना हो या फिर धार्मिक उत्सवों में दान करना हो – भारतीय लोगों को सोना बेहद पसंद है.

माना जाता है भारत में लोगों के घरों, कारोबार और मंदिरों के ख़जाने में क़रीब 20,000 टन सोना जमा है.

लेकिन इस क़ीमती धातु की वजह से देश का आयात बिल भी बढ़ता है.

इसकी वजह ये है कि सरकार सोने की ज़रूरत पूरी करने के लिए उसका आयात करती है.

लेकिन देश में लोगों के घरों और मंदिरों में पड़ा सोना अर्थव्यव्स्था में इस्तेमाल नहीं हो पाता.

इसीलिए सरकार अब इस जमा सोने को अर्थव्यवस्था में वापस लाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है.

सरकार की योजना निजी तौर पर जमा सोने को निकालकर अर्थव्यवस्था में लाने की है और इसमें धनवान हिंदू मंदिर अहम भूमिका निभा सकते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ भारत में एक खरब डॉलर मूल्य का सोना लोगों के निजी लॉकरों में जमा है.

तिरुमला तिरुपति मंदिर देश का सबसे अमीर मंदिर है जिसके पास सात टन सोना है और श्रद्धालु हर दिन और भी सोना ला रहे हैं.

कल्पना कीजिए कि भारत के सभी मंदिरों में कितने टन सोना होगा?

श्रद्धालु मंदिर के दान पात्र में अरबों डॉलर की नकदी और ज़ेवरात डालते हैं जिसमें सोना प्रमुखता से होता है.

तिरुपति ऐसा पहला मंदिर है जिसने सरकार की योजना में भागीदारी की है. सरकार को दिए सोने पर मंदिर को ब्याज़ की प्राप्ति होती है.

मंदिर के न्यास तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने पंजाब नेशनल बैंक में क़रीब 1.3 टन सोना जमा किया है.

स्टेट बैंक में निवेशित एक टन सोने को भी ट्रस्ट इसी मकसद से शिफ़्ट करने जा रहा है.

मंदिर न्यास ने क़रीब डेढ़ टन सोना इंडियन ओवरसीज़ बैंक में भी रखा है.

मंदिर के अधिकारियों के मुताबिक गोल्ड डिपॉज़िट स्कीम (जीडीएस) के तहत साढ़े चार टन सोना जमा है जिससे ब्याज के रूप में मंदिर को हर साल अस्सी किलो सोने की कमाई होती है.

मुंबई के श्रीसिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने भी कहा है कि वो क़रीब 45 किलो सोना इस योजना के तहत जमा करेगा. कई अन्य मंदिर भी इस योजना का लाभ उठाने की सोच रहे हैं.

क्या है स्वर्ण विमुद्रीकरण योजना (जीएमएस)?

जीएमएस के तहत रिज़र्व बैंक किसी को भी सोना या ज़ेवर बैंक में जमाकर ब्याज़ कमाने की अनुमति देता है.

इस योजना के तहत व्यक्ति, न्यास और म्युचुअल फ़ंड बैंकों में सोना जमा कर सकते हैं. इस योजना का लाभ उठान के लिए न्यूतनत 30 ग्राम सोना जमा करना होता है.

सोना जमा करने की कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं की गई है.

बैंकों में जमा सोने का ब्याज़ सोने के रूप में भी वसूल किया जा सकता है.

जीएमएस के तहत सोना जमा कैसे होता है?

न्यूनतम 30 ग्राम सोना जमा करने का प्रावधान कर छोटे निवेशकों को भी प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है.

कोई भी व्यक्ति पैन कार्ड, आधार कार्ड के साथ सोने की टूटी चूड़ियां और हार लेकर निर्धारित बैंक में जमा करा सकता है.

इसके बाद बैंक निवेशक को एक चिट्ठी देता है जिसे लेकर सोने की शुद्धता के लिए जांच केंद्र में जाना होता है.

शुद्धता की जांच और सोना जमा करने के कई केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों में निवेशक के सामने ही सोने की शुद्धता की जांच की जाती है और फिर एक सर्टिफ़िकेट जारी कर दिया जाता है.

इसी सर्टिफ़िकेट के आधार पर बैंक जीएमएस अकाउंट खोलता है.

बैंक सोने का ब्याज़ कैसे निर्धारित करता है?

जमा सोने को बैंक लघु अवधि डिपॉज़िट स्कीम के तहत एमएमटीसी (मेटल एंड मिनरल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया) को सोने के सिक्के ढालने के लिए बेच सकता है या उधार दे सकता है.

बैंक जमा सोने को सुनारों को भी, निवेशक को दिए जानेवाले ब्याज़ दर से थोड़े ऊंचे दर पर, उधार दे सकता है.

बैंक में ज़ेवर, सिक्के या बार के रूप में सोना जमा किया जा सकता है. इस सोने पर वज़न के आधार पर ब्याज़ दिया जाता है और समय के साथ सोने के भाव में बढ़ोतरी का लाभ भी निवेशक को मिलता है.

ब्याज़ की दर संबंधित बैंक ही निर्धारित करता है.

निवेश की अवधि क्या है?

बैंक एक से तीन साल की लघु अवधि के लिए, पांच से सात साल की मध्यावधि के लिए और 12 से 15 साल की दीर्घावधि के लिए सोना स्वीकार कर सकते हैं.

लघु अवधि के लिए बैंक सोना अपने खाते में जमा कर सकते हैं, लेकिन मध्यावधि और दीर्घावधि के लिए बैंक सरकार की ओर से सोने का निवेश स्वीकार कर सकते हैं.

सोना वापस कैसे होता है?

सोने के निवेशक को लौटाए जानेवाले मूलधन और ब्याज़ की क़ीमत सोने में ही लगाई जाती है.

मिसाल के तौर पर अगर कोई व्यक्ति सौ ग्राम सोना जमा करता है और उसे एक प्रतिशत की दर से ब्याज़ मिलता है तो अवधि पूरी होने पर 101 ग्राम सोना उसके खाते में आ जाएगा.

सोने से होनेवाली आय कैपिटल गेन्स टैक्स, संपत्ति कर और आय कर से मुक्त होती है. जमा सोने के मूल्य में होनेवाली बढ़ोतरी और मिलने वाले ब्याज़ पर भी कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता है.

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