डॉक्टरों ने लड़के की नाक उगाकर लगाई

  • 5 जुलाई 2016
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मध्य प्रदेश के इंदौर में डाक्टरों ने एक 12 साल के लड़के के माथे पर प्लास्टिक सर्जरी के ज़रिए नाक उगा कर, उसे उसके स्थान पर प्रत्यारोपित करने में कामयाबी हासिल की है. मुमकिन है कि यह देश का अपने तरह का पहला मामला हो.

12 साल का अरुण पटेल उज्जैन जिले के किसान परिवार से है. बचपन में निमोनिया होने पर इलाज कराने पर उसकी नाक गल कर निकल गई. इसके बाद 12 साल तक उसे किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया, क्योंकि लोगों ने बोल दिया था कि ख़ास उम्र से पहले कुछ भी होने की गुंजाइश कम है.

डाक्टरों की टीम के हेड डॉक्टर अश्विनी दास ने बताया, "इसके लिए चार चरणों में अलग-अलग ऑपरेशन किए गए और उसके बाद नाक को प्रत्यारोपित किया गया है. ये कोशिश की गई कि कम से कम पैसों में ऑपरेशन किया जा सके और उसमें हम कामयाब भी हुए."

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अरुण के चेहरे पर सामान्य राइनोप्लास्टी मुमकिन नहीं थी क्योंकि नाक के स्थान पर कुछ भी नहीं थी. इसलिए उस पर विशेष प्लास्टिक सर्जरी की गई, जिसे प्री-फैब्रिकेटेड फोरहेड फ्लैप राइनोप्लास्टी कहते है.

पहले चरण में लड़के के माथे पर जगह बनाकर सिलिकॉन का टिश्यू एक्सपैंडर लगाया गया. उसके बाद उसमें एक द्रव्य डाला गया ताकि टिश्यू फैल सकें. इसने बनने में तीन महीने का समय लिया.

दूसरे चरण में सीने के हिस्से से कार्टिलेज लेकर उसके चेहरे के हिसाब से कृत्रिम नाक तैयार की गई.

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इसे माथे पर लगा कर तीन महीने तक रखा गया, ताकि उसमें ख़ून के प्रवाह को शुरू किया जा सके और सारे टिशू एक तरह का काम कर सकें.

उसके बाद तीसरे हिस्से में माथे पर उगाई गई नाक को निकाल कर असल स्थान पर लगाया गया. उसे इस तरह जोड़ा गया कि ख़ून का बहाव पूरी नाक में हो सके.

चौथे और अंतिम चरण में उस स्थान को सही किया गया जहां कृत्रिम नाक लगाई गई थी.

डॉक्टर अश्विनी दास का कहना है कि इस तरह का मामला पिछले साल चीन में आया था जिससे उन्हें ये करने की प्रेरणा मिली. इस पूरे आप्रेशन में लगभग पौने दो लाख रुपये का ख़र्च आया है.

डॉक्टर अश्विनी दास ने बताया कि नाक को बच्चे के ही टिश्यू से बनाया गया है इसलिए पूरी उम्मीद है कि नाक भी बच्चे के दूसरे अंगों की तरह सामान्य होगी. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि 16-17 साल की उम्र में परफेक्ट राइनोप्लास्टी की जरुरत पड़ सकती है ताकि नाक को बिलकुल सही शेप दिया जा सके.

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