'नोट के बदले वोट कांड' वाले कुलस्ते बने मंत्री

  • 6 जुलाई 2016
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मंगलवार को मोदी मंत्रिमंडल में जगह बनाने में कामयाब रहे मध्य प्रदेश के फग्गन सिंह कुलस्ते राज्य में बीजेपी का आदिवासी चेहरा हैं. उन्हें आठ साल पुराने 'नोट के बदले वोट कांड' के लिए भी जाना जाता है.

इसकी वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. मध्य प्रदेश भाजपा में उनकी पहचान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोधी के रूप में है. लेकिन हाल के दिनों में उनकी इस टिप्पणी ने खासी सुर्खियां बटोरी थीं- "मोदी जी तो सीएम से पीएम हो गए और हम वहीं घिसे जा रहे हैं."

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी टीम में चौथी बार कुलस्ते को जब अनुसूचित जनजाति मोर्चा का जिम्मा सौंपा तो वह फट पड़े थे.

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उनका कहना था- "15 साल से मोर्चे में काम कर रहा हूं. क्या पार्टी में कोई और नहीं है, जो आदिवासी मोर्चे में काम कर सके. और बीजेपी का संविधान भी चौथी बार एक ही इंसान को वही पद देने की इज़ाज़त नहीं देता है."

18 मई 1959 को जन्मे फग्गन आदिवासी सीट मंडला की नुमांइदगी करते हैं. लोकसभा में उनका यह पांचवा टर्म है. एक बार पार्टी ने उनको राज्यसभा में भी भेजा था.

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में राज्य मंत्री रहे कुलस्ते बागी तेवरों के कारण मध्य प्रदेश भाजपा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं. पिछले तीन संगठन चुनाव में उन्होंने हर बार अपनी दावेदारी जताई है. पिछली मर्तबा उनका साफ कहना था कि या तो उन्हें केंद्र में जगह मिले या मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी जाए.

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फग्गन सिंह कुलस्ते खुद तो मंडला से पांच बार के सांसद हैं, उनके भाई रामप्यारे कुलस्ते विधायक हैं. लेकिन पिछले साल पंचायत चुनाव में उनके पिता शोभन सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा. वह ग्राम पंचायत बरबटी में आठ वोटों से पंच का चुनाव हार गए.

जुलाई 2008 में जब अमरीका से परमाणु समझौते के विरोध में यूपीए-1 सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव आया था तब पूरे देश में नोट के बदले वोट कांड की चर्चा हुई थी.

बीजेपी के जिन सांसदों ने लोकसभा में नोटों के बंडल लहराते हुए तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार पर सांसदों को खरीदने का आरोप लगाया था, उनमें फग्गन सिंह कुलस्ते भी शामिल थे.

वह नोटों के बंडल लहराते टीवी पर देखे गए थे. उन्हें इस कारण जेल भी जाना पड़ा था.

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