स्मृति को 'सज़ा' की बात क्यों सही नहीं लगती?

  • 6 जुलाई 2016
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में अनेक लोगों को हैरानी इस बात पर हुई कि सुर्खियों में रहने वाली स्मृति ईरानी को एचआरडी मंत्रालय से हटा दिया गया.

चर्चा हो रही है कि उन्हें इस हाईप्रोफ़ाइल मंत्रालय से हटा कर उबाऊ कपड़ा मंत्रालय सौंपा जाना उनकी 'डिमोशन' है. ये भी कहा जा रहा है कि विवादों में घिरे रहने के कारण उन्हें सज़ा दी गई है.

मैं मानता हूँ कि सज़ा से ज़्यादा ये एक मित्र की हैसियत से, प्रधानमंत्री की तरफ से, उन्हें 'फायरिंग लाइन' से हटाने की एक कोशिश है.

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भारतीय जनता पार्टी में सब जानते हैं कि स्मृति ईरानी प्रधानमंत्री की क़रीबी हैं. राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि अगर किसी की पहुंच प्रधानमंत्री तक न हो, और उसे अपनी बात उन तक पहुंचानी हो, तो स्मृति ईरानी के दरवाज़े पर दस्तक देनी चाहिए.

लोकसभा के चुनाव प्रचार के दौरान मैं नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू करना चाहता था इसमें कामयाबी नहीं मिल रही थी. मुझे लोगों ने सुझाव दिया कि मैं स्मृति ईरानी से इस बारे में बात करूँ.

मैं उनके घर गया और उनसे अपनी बात कही. उन्होंने मेरी मदद करने का वादा किया. बात नहीं बन सकी, लेकिन ये एहसास हो गया कि नरेंद्र मोदी के वो बहुत करीब हैं.

स्मृति ईरानी विवादों में ज़रूर रही हैं लेकिन पार्टी में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है.

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बीजेपी के एक नेता ने मुझे बताया कि स्मृति ईरानी के घर पर रोज़ पार्टी कार्यकर्ताओं की जितनी भीड़ जमा होती है उतनी किसी और मंत्री के घर पर नहीं होती. इससे पार्टी के भीतर उनकी अहमियत का अंदाज़ा होता है.

इस बात में दम ज़रूर है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह उनके विवादों से खुश नहीं थे. समझा जाता है कि नई शिक्षा नीति तैयार करने और उसे लागू करने में देरी से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी उनसे बहुत खुश नहीं था.

लेकिन पार्टी के भीतर उनके आलोचक भी मानते हैं कि वो एक निडर महिला हैं जो अपनी बात कहने से हिचकिचाती नहीं हैं. उन्होंने 2014 चुनाव में गांधी परिवार को ज़बरदस्त चुनौती दी थी.

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पार्टी में उनके समर्थक कहते हैं कि कपड़ा मंत्रालय में बैठ कर वो टाइम पास नहीं करेंगी, बल्कि अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनाव का ताना-बाना बुनने में व्यस्त रहेंगी.

कुछ तो यहां तक कह रहे हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार की हैसयत से पेश करने की तैयारी चल रही है.

हालांकि ये दूर की बात लगती है क्योंकि पार्टी ने इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है. वो एक मज़बूत उम्मीदवार हो सकती हैं. लेकिन पार्टी में इस पद के लिए बहुत सारे मज़बूत उम्मीदवार हैं.

हाँ, ये ज़रूर संभव है कि पार्टी बोलने की क्षमता को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के चुनाव के प्रचार में भरपूर इस्तेमाल करे. कॉंग्रेस पार्टी प्रियंका गांधी को प्रचार के लिए मैदान में उतारने वाली है. प्रियंका का काट ईरानी हो सकती हैं.

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