तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश को कहा 'नकलची'

  • 6 जुलाई 2016
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तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के बीच कॉपीराइट को लेकर विवाद छिड़ गया है.

तेलंगाना सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार पर अपनी वेबसाइट पर डाली गई व्यावसायिक मामलों की अर्ज़ी के प्रारूप की नकल करने का आरोप लगाया है.

तेलंगाना सरकार का आरोप है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने अर्ज़ी की नकल की है और इसकी ग़लतियां भी जस की तस उतार ली हैं.

तेलंगाना के उद्योग सचिव अरविंद कुमार ने बीबीसी को बताया, "यह कोई आरोप नहीं है. आरोप तो तब होता अगर हमें कोई संदेह होता. यहां कोई संदेह नहीं है, प्रथम दृष्टया हमने साइबर पुलिस में कॉपीराइट उल्लंघन का मामला दर्ज कराया है."

यह मामला 'इज़ ऑफ़ बिज़नेस' के लिए राज्यों की रैंकिंग से संबंधित ऑनलाइन जानकारी केंद्र सरकार को देने से संबंधित है.

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आंध्र प्रदेश सरकार के प्रवक्ता पारकला प्रभाकर ने कहा, '' ये पूरी तरह मानहानि का मामला है. तेलंगाना में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हम या कोई भी अन्य राज्य नकल करे. या तो तेलंगाना के मंत्री को किसी ने ग़लत सलाह दी है या वो जान बूझकर आंध्र प्रदेश सरकार को बदनाम करना चाहते हैं.’’

तेलंगाना का कहना है कि रैंकिंग के लिए जानकारी देने की आख़िरी तारीख़ 30 जून थी. लेकिन तब तक आंध्र प्रदेश सरकार ने अर्ज़ी का ये प्रारूप नहीं जमा किया था. फिर केंद्र सरकार ने आख़िरी तारीख़ सात दिन के लिए बढ़ा दी. और दो जुलाई को आंध्र प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर वही जानकारी ग़लतियों के साथ मौजूद थी, जो तेलंगाना की वेबसाइट पर थी.

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आंध्र प्रदेश सरकार इस आरोप को सिरे से नकार दिया है कि उन्होंने कोई जानकारी 30 जून के बाद अपलोड की है. आंध्र प्रदेश का कहना है कि हाईकोर्ट के नोटिफिकेशन के मुताबिक राज्य सरकार को व्यावसायिक मामलों को ऑनलाइन दर्ज करने और फ़ीस जमा करने के लिए सुविधा देने के लिए कहा गया है. चुंकि दोनों राज्यों के लिए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एक ही है, ये आंकड़ा भी एक ही है.

प्रभाकर ने कहा, ''जिसे वो ग़लती कह रहे हैं वो ग़लती नहीं थी. हमने दो विकल्प दिए हैं. एक अर्ज़ी भरने के लिए है और एक दर्ज करने के लिए. ये दोनों विकल्प वेबसाइट पर काम कर रहे हैं. रैंकिग में हम गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर हैं जबकि तेलंगाना पिछले साल 13वें नंबर पर था.''

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अरविंद कुमार ने एक दूसरी कहानी बताते हैं. वे कहते हैं, "क्या आप जीवन भर नंबर दो पर बने रहेंगे. अब हमें उनके नंबर दो होने पर भी शक है. तब प्रणाली इतनी पारदर्शी नहीं थी. अब ऐसा नहीं है. उनकी ये दलील बचकानी है कि वो नंबर दो हैं इसलिए ऐसा नहीं कर सकते. "

पिछले कुछ हफ़्तों में तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार पर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का बंटवारा कर, नए तेलंगाना हाईकोर्ट के गठन में देरी करने के भी आरोप लगाए हैं.

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