लगातार दूसरे पुलिस अधिकारी की आत्महत्या

  • 8 जुलाई 2016
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कर्नाटक में तीन दिन में दूसरे पुलिस अधिकारी की आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है.

इस पुलिस अधिकारी का नाम एमके गणपति था और उन्होंने मडिकैरी के एक होटल में खुदकुशी कर ली थी.

आत्महत्या करने से पहले एक कन्नड़ टेलीविज़न को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने पूर्व गृह मंत्री और मौजूदा बंगलुरु मामलों के मंत्री केजी जॉर्ज , दो अधिकारियों, एडीजीपी रैंक के अधिकारी और आईजीपी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

अपने साक्षात्कार में पुलिस उपाधीक्षक गणपति ने कहा था कि गृहमंत्री जॉर्ज ने उनका उत्पीड़न किया क्योंकि उन्होंने साल 2008 में मंगलौर में एक चर्च पर हुए हमले का मामला फिर से जांच के लिए नहीं खोला था.

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इस मामले में उन्होंने एएम प्रसाद एडीजीपी(खुफ़िया) और प्रणब मोहंती आईजीपी(लोकायुक्त) पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

हालांकि केजी जॉर्ज ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि वे एम के गणपति को नहीं जानते हैं.

हालांकि गणपति के खिलाफ़ ही कई जांचें चल रही थी जिसके कारण उनकी पदोन्नति पांच साल के लिए रुक गई थी और उन्होंने जॉर्ज से इस संबंध में मदद मांगी थी.

इससे तीन दिन पहले इसी पद पर रहे एक अधिकारी कल्लप्पा हंदिबाग ने फांसी लगा ली थी. इस अधिकारी पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपहरण के एक मामले में आरोपी से ही फिरौती ली थी.

इन अधिकारियों के खुदकुशी करने के मामले ऐसे समय में आ रहे हैं जब मैसूर की उप कमीश्नर सी शिखा ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी मरीगौड़ा पर आरोप लगाया था. उन्होंने उनके फैसले पर सवाल उठाए थे और उन्हें डराया था. इस मामले में इस करीबी के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज है.

पिछले महीने कर्नाटक में उप पुलिस उपाधीक्षक अनुपमा शनॉय ने इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि शराब माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका उत्पीड़न किया.

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पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का कहना है, ''ये आत्महत्याएं बताती है कि सरकार कैसे काम कर रही है.''

पूर्व क़ानून मंत्री और बीजेपी के प्रवक्ता सुरेश कुमार का कहना था, ''ये घटनाएं कर्नाटक में प्रशासन की स्थिति को बताती है. सत्ताधारी पार्टी लोगों के हितों का ध्यान में रखने की बजाए केवल अपने हित देख रही है.''

एक पूर्व पुलिस अधिकारी गोपाल हुसुर ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, ये घटनाएं बताती है सरकार के हाथ से कैसे चीज़े निकल रही है और सत्ताधारी पार्टी को सरकारी तंत्र में इस कमी से तुरंत निपटना चाहिए.

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