एमपी में भारी बारिश से12 की मौत, सेना तलब

  • 10 जुलाई 2016
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मध्य प्रदेश में तीन दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों बाढ़ की स्थिति है और हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं. अब तक पानी में बहने से 12 लोगों की मौत हो गई है.

सतना ज़िले में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए सेना को बुलाया गया है. राज्य के सभी 51 ज़िलों में राहत आपदा केंद्र खोले गए हैं.

राजधानी भोपाल समेत लगभग आधे मध्यप्रदेश पर बाढ़ का ख़तरा मंडरा रहा है.

भोपाल में शनिवार रात से लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और ख़राब कर दिया है. वहां चार लोगों की मौत हो गई है.

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कई रिहाइशी इलाक़ों में पानी भर गया है. कई जगहों पर पांच- पांच फुट पानी बह रहा है.

उधर, मौसम विभाग ने कई जगहों पर अगले 24 घंटो में भारी बारिश की चेतावनी दी है.

सतना में बाढ़ के हालात सबसे ज़्यादा ख़राब है. राहत कार्य के लिए सेना को बुलाया गया है.

भारी बारिश की वजह से नर्मदा, पार्वती, चंबल और केन जैसी नदियां उफान पर है.

बुंदेलखंड क्षेत्र के पांच जिलों- सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, और दमोह में हालात ऐसे ही हैं, जैसे बीते तीन दिनों में यहां बादल फट गए हों.

यहां तीन दिनों में औसतन 300 मिलीमीटर से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है. ये वो इलाके हैं जो पिछले हफ्ते तक सूखे का सामना कर रहे थे और अब हालात ये है कि लोग बारिश से बेहाल हैं.

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए एक विशेष बैठक बुलाई.

बैठक के बाद पत्रकारों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया, "सरकार भोपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाने के पैकेट उपलब्ध करा रही है. सतना में बाढ़ में फंसे 4000 लोगों को निकाला गया है."

उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ के हालात से निपटने के लिये पूरी तरह से तैयार है और 51 जिलों में राहत आपदा केंद्र खोले गए है.

सागर जिले के कलेक्टर विकास नरवाल ने बताया, "सभी एसडीएम, तहसीलदारों और सीईओ जनपद को निर्देश दिए गए हैं कि सभी नदी, नालों और रोड पर जो रपटे बने हैं उन पर साइन बोर्ड लगाये ताकि लोग उन्हें पार करने की कोशिश न करें. निचले इलाकों पर भी नज़र रखी जा रही है और प्रभावितों को मदद पहुंचाई जा रही है."

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