'उमर ख़ालिद, वो सब वापस करो जो भारत ने दिया'

  • 10 जुलाई 2016
उमर ख़ालिद

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र उमर ख़ालिद एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं.

उन्होंने फ़ेसबक पर चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद उनकी तारीफ़ करते हुए एक पोस्ट लिखा था. इसके बाद उमर की कड़ी आलोचना हो रही है.

उमर ख़ालिद इसी साल फ़रवरी में तब चर्चा में आए थे जब उन पर और जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप लगे थे.

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में बुरहान वानी की मौत हो गई थी जिसके बाद वहां बड़े पैमाने पर हिंसा और विरोध प्रदर्शन में अब तक 16 लोगों की मौत हो गई है.

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उमर ख़ालिद ने बुरहान वानी के जनाजे की फ़ोटो पोस्ट करते हुए उनती तुलना अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे गुवारा से की और लिखा, "मेरे गिरने के बाद अगर कोई दूसरा मेरी बंदूक उठाकर शूटिंग जारी रखता है तो मुझे कोई परवाह नहीं है. चे गुवारा के ये शब्द बुरहान वानी के शब्द भी हो सकते थे. बुरहान मौत से नहीं डरते थे. वो पराधीनता से डरते थे. वो पराधीनता से नफ़रत करते थे. वो आज़ाद जिए और आज़ाद मरे. हिंदुस्तान, तुम ऐसे लोगों को कैसे हरा पाओगे जिन्होंने अपने डर पर जीत पा ली हो. बुरहान, तुमको श्रद्धांजलि. मैं कश्मीर के लोगों के साथ हूं."

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हालांकि कई लोगों की आलोचना के बाद उन्होंने अपने इस विवादित पोस्ट को फ़ेसबुक से हटा दिया लेकिन तब तक उमर ख़ालिद के विरोध में कई लोग कमेंट कर चुके थे. हालांकि कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया.

रणधीर झा नाम के फ़ेसबुक यूज़र लिखते हैं, "ये बड़ी बेवकूफ़ाना बात है. एके 56 हवा में लहराने वाला बुरहान भला कैसे डर को जीत पाया होगा. वो एक डरा हुआ शख़्स था और डर का एक माहौल बना रहा था और पाकिस्तान को तो कश्मीर तोहफ़े में मिलने से रहा. सिर्फ़ श्रीनगर में रहने वाले कुछ फ़ेशनेबल, धनी लोग आज़ादी के लिए व्याकुल हुए जा रहे हैं."

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इंद्रजीत सिह लिखते हैं, "जैसे अन्याय को तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता उसी तरह से अत्याचार से निपटने के नाम पर आतंकवाद को सही नहीं ठहाराया जा सकता. समझे उमर ख़ालिद."

मोहम्मद फ़रहान लिखते हैं, "मैं बुरहान वानी जैसे शख़्स के एनकाउंटर के लिए भारतीय फ़ौज को बधाई देता हूं. इस तरह के लोग कश्मीर ही नहीं बाक़ी के भारत के लिए भी ख़तरा हैं. वानी जैसे शख़्स के जनाज़े में इतने ज़्यादा लोगों का जाना बड़ी चिंता की बात है. ये लोग आतंकियों को भारत में घुसने की दावत दे रहे हैं. कश्मीर के अलगाववादी नेता भी यही कर रहे हैं. भारतीय सेना को ऐसे लोगों से और सख्ती से पेश आना चाहिए."

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फ़राहन सैयद ने लिखा, "उमर ख़ालिद जैसे बुरहान वानी समर्थक भारत सरकार से मांग करते हैं कि उन्हें पाकिस्तानी आतंकियों से सुरक्षा दी जाए. रोज़गार चाहते हैं, खाना चाहते हैं. भारत से हर किस्म की फ़ंडिंग चाहते हैं और फिर भारत के ही साथ रहना नहीं चाहते. हमसे अलग होना चाहते हो तो हो जाए. लेकिन वो सब कुछ वापस करो जो हमने तुम्हें पिछले 60 सालों में दिया."

कई लोगों ने उमर ख़ालिद की बात से सहमति भी जताई है.

उबैद ज़रगर ने लिखा, "पूरा कश्मीर तुम्हें प्यार करता है उमर."

देबजी भट्टाचार्य ने लिखा, "मेरा नाम उमर ख़ालिद है और मैं आतंकवादी नहीं हूं."

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वानी पर किए अपने पोस्ट को हटाने के बाद उमर ख़ालिद ने लिखा, "ट्रोलर आर्मी. मैं अपनी हार स्वीकार करता हूं. हां मैं ग़लत था. मुझे आप लोगों के साथ वानी की मौत पर जश्न मनाना चाहिए था. उसे आतंकी और गद्दार कहकर बुलाना चाहिए था. कल से मैं भी आप लोगों की हां में हां मिलाउंगा. हर तरह की हत्याओं, बलात्कार, अत्याचार, आफ्सपा जैसी चीजों का समर्थन करूंगा और देशभक्त कहलाउंगा. मैं सत्ताधारी ताकतों का समर्थक बनूंगा जो कमज़ोर लोगों को दबाने में लुत्फ़ लेते हैं. लेकिन आप सभी देशभक्तों से एक सवाल- क्या इससे कश्मीर की हक़ीक़त बदल जाएगी?"

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