मौत के बाद पति के शुक्राणु मांगे

  • 11 जुलाई 2016
इमेज कॉपीरइट Thinkstock

क्या एक औरत का अपने पति की मौत के बाद उनके शुक्राणुओं पर अधिकार होता है?

भारत के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एम्स के डॉक्टर्स के सामने यही सवाल था जब एक औरत ने पोस्ट-मार्टम के व़क्त अपने पति के शुक्राणु निकाले जाने का आग्रह किया.

एम्स में फ़ोरेंसिक मेडिसिन के प्रमुख, डॉ. सुधीर गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि वो महिला पति की मौत के बाद भी उनके बच्चे की मां बनना चाहती थी.

पर वो ये बात नहीं मान पाए. उन्होंने बताया, “हमें मना करना पड़ा, क्योंकि बच्चे के क़ानूनी अधिकार, पिता की मर्ज़ी और मां की ज़िम्मेदारी से जुड़े कई मसले हैं जिनके बार में गाइडलाइन्स होनी ज़रूरी है, मां अगर बाद में बच्चे को रखना ना चाहे तो बहुत दिक्कतें पैदा हो सकती हैं.”

मृत्यु के बाद भी मर्द के अंडकोष में शुक्राणु कुछ समय तक जीवित रहते हैं, पर उनके निकाले जाने के बारे में भारत में फ़िलहाल कोई नीति-निर्देश नहीं हैं.

आईवीएफ़ और सरोगेसी जैसी तकनीक के लिए साल 2010 में बनाई गईं ‘असिसिटिड रीप्रोडक्टिव टेकनॉलॉजीज़ गाइडलाइन्स’ में ‘स्पर्म डोनेशन’ का प्रावधान है.

इसके मुताबिक अगर एक मर्द अपने होशोहवास में अपने शुक्राणु दान करता है तो उनका इस्तेमाल उसकी मौत के बाद भी किया जा सकता है.

इमेज कॉपीरइट SPL

डॉ. सुधीर गुप्ता के मुताबिक ये अकेला मामला नहीं था और उनके पास पहले भी ऐसे आवेदन आए हैं.

उनके मुताबिक, “जब अचानक दुर्घटना में पति की मौत हो जाए और नव-विवाहित दंपत्ति की कोई संतान ना हो तो पोस्ट मार्टम के व़क्त ऐसी दरख़्वास्त की गई हैं.”

' जर्नल ऑफ़ रिप्रोडक्टिव साइंसिस' में इस सवाल पर हाल ही में किए शोध में पाया गया कि भारत समेत दक्षिण एशिया में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में इस पर कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं जबकि पाकिस्तान में इस पर पाबंदी है.

क़ानून की नज़र में ‘असिसिटिड रीप्रोडक्टिव टेकनॉलॉजी’ की मदद से पैदा हुए बच्चे को दंपत्ति का वारिस माना जाता है और उसका उनकी जायदाद पर हक़ है.

लेकिन मृत्यु के बाद अगर शुक्राणु निकालकर बच्चा पैदा किया जाए तो उसे वारिस माना जाएगा या नहीं, इसपर कोई दिशा-निर्देश नहीं है.

डॉ. सुधीर गुप्ता के मुताबिक कोई गाइडलाइन्स बनाने से पहले क़ानूनी दर्जे के अलावा, ऐसे पैदा किए बच्चे को समाज में वैध दर्जा मिलने के मुद्दे के बारे में भी सोचना ज़रूरी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार