'सभी धर्म बेकार और अंधविश्वासी हैं'

  • 13 जुलाई 2016
मार्कण्डेय काटजू

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने अपने फ़ेसबुक पन्ने पर लिखा है कि धर्मनिरपेक्षता को दोतरफ़ा होना चाहिए, एकतरफ़ा नहीं.

उन्होंने लिखा है कि कई मुसलमानों के साथ यह समस्या है कि जब मैं कट्टर हिंदूओं की आलोचना करता हूं तो वे मेरे समर्थन में तालिया बजाते हैं. लेकिन जब मैं मुस्लिम रूढ़िवादियों की आलोचना करता हूं तो वे मुझसे नाराज़ हो जाते हैं.

जस्टिस काटजू ने लिखा है, "जब मैं कहता हूं कि बीफ़ खाने में कोई ग़लती नहीं है और दलितों को नीचा समझ कर उनके साथ बुरा व्यवहार करना ग़लत है तो वे मेरा समर्थन करते हैं. लेकिन जब मैं कहता हूं कि बुर्क़ा पहनने और मौखिक रूप से तलाक देने की प्रथा दकियानूसी है तो वे मुझे पर चिल्लाते हैं."

इमेज कॉपीरइट Other

जस्टिस काटजू के इस पोस्ट को 3,600 से अधिक बार शेयर किया जा चुका है और लोग उनके इस बयान पर पर उन्हें कई तरह की राय भी दे रहे हैं.

हदैया चिश्ती ने लिखा है, "आपको हर चीज़ स्टूपिड लगती है क्योंकि आपका कोई धर्म है ही नहीं. क्या आप अस्तित्ववाद के सवाल से जूझ रहे हैं?"

आदिल भट ने लिखा है, "आप नास्तिक होने की कोशिश कर रहे हैं... लेकिन आप असल में एक कट्टर हिंदू हैं."

अयाज़ अहमद ने लिखा है, "यदि आप अपनी निजी नज़रिए से धर्म संबंधी मामलों पर राय दे रहे हैं तो आप ये याद रखें धर्म आपके तर्क से नहीं बना है."

इमेज कॉपीरइट Other

इस पोस्ट के जवाब में जस्टिस काटजू ने लिखा है, "सभी धर्म बेकार और अंधविश्वासी हैं"

कई लोगों ने उन्हें इस पोस्ट पर उनका समर्थन किया है.

शमा फरोज़न ने लिखा है, "मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करती हूं."

तुषार कुमार, लोही थिलेनकेरी लिखते हैं, "सही कहा."

इमेज कॉपीरइट Other
Image caption जस्टिस काटजू पोस्ट पर कमेंट

सोनू संदीप ने लिखा है, "समय की बर्बादी है धर्म, ये लोगों को आध्यात्म से जोड़ने से ज़्यादा कई लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार है. इसको तोड़ना ज़रूरी है. मैं आपके साथ हूं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार