पहले लोकपाल पर होगी कार्रवाई

  • 13 जुलाई 2016
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कर्नाटक में राज्यपाल ने पूर्व लोकायुक्त के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में क़ानूनी कार्रवाई की इजाज़त दे दी है.

राज्य के पूर्व लोकायुक्त जस्टिस वाई भास्कर राव के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में क़ानूनी कार्रवाई की इजाज़त विशेष जांच दल की मांग पर दी गई है.

कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस पर अपने बेटे के उगाही रैकेट की अनदेखी करने का आरोप है. ये रैकेट कथित तौर पर उनके घर से ही चलाया जा रहा था.

राव देश के पहले लोकायुक्त होंगे जिनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई होगी.

राज्य के एक अन्य पूर्व लोकायुक्त और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संतोष हेगड़े ने कहा कि एसआईटी ने इस मामले में अच्छा काम किया है.

उन्होंने कहा, "जैसी की कहावत है, देर आए, दुरुस्त आए. इसमें कोई गलती नहीं है. अगर सीधे सीधे इजाज़त दे जाती तो सवाल उठते. मुझे लगता है कि एसआईटी ने अपना काम अच्छी तरह किया है."

1984 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में ग़ैर-कांग्रेसी सरकार के भ्रष्टाचार को रोकने के इरादे से लोकायुक्त की संस्था का गठन किया था.

जस्टिस हेगेड़ के कार्यकाल में ही पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदयुरप्पा और मंत्री जनार्दन रेड्डी को लोकायुक्त की जांच के आधार पर जेल भेजा गया था.

पू्र्व क़ानून मंत्री और भाजपा नेता सुरेश कुमार ने कहा, "मुझे ख़ुशी है कि हमारी मांग पूरी हो गई है. उनके घर में वसूली का रेकैट चल रहा था और वो इस बात को जानते थे. निश्चित तौर पर इतने बड़े पद पर मौजूद व्यक्ति को लेकर फ़ैसले को एक फ़ैसला माना जाएगा."

बीजेपी नेता को नहीं लगता कि इस संस्था की गरिमा को बहाल नहीं किया जा सकता है. वो कहते हैं, "अगर जस्टिस विक्रमजीत सेन (सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज) जैसे व्यक्ति को लोकायुक्त बनाया जाए तो लोगों का भरोसा बहाल हो सकता है."

वहीं जस्टिस हेगड़े कहते हैं, "राज्य सरकार की तरफ़ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि वो ख़ाली पड़े पद को भरना चाहती है. सरकार पहले ही इसकी शक्ति को घटा चुकी है और उसने एक भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो बना दिया है, वो भी सिर्फ इसलिए कि 14 अन्य राज्यों ने ऐसा ब्यूरो बनाया है."

वो बताते हैं, "लोकायुक्त पुलिस ने बढ़िया काम किया है, 750 अफसरों के खिलाफ मुकदमे हुए. इनमें कॉन्स्टेबल और राजस्व इंस्पेक्टर के अलावा आईएसएस, आईपीएस अफसरों के अलावा मंत्री भी शामिल हैं."

हेगड़े कहते हैं, "सरकार जनहित पर ध्यान नहीं देती है और लोकायुक्त जैसी संस्था से अधिकार लिए जा रहे हैं."

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