पेंशन की आस में घूम रहे दो लाख 'मुर्दे'

  • 14 जुलाई 2016
धरने पर बैठे लोग इमेज कॉपीरइट Abha Sharma

देऊ देवी, जेठा सिंह, मानी देवी और कालूराम... इन सबकी कहानी एक ही है.

ये जीवित थे लेकिन इनका नाम सामाजिक सुरक्षा पेंशन सूची में 'मृत' लोगों में शामिल कर दिया गया था और पूरा मामला तब सामने आया जब 'सूचना एवं रोज़गार अभियान' ने मामले पर सवाल खड़े किए.

हाल में ही जब मज़दूर किसान संगठन ने भीम पंचायत समिति में सर्वे किया तो पाया कि विभाग की सूची में 11 मृत बताये गए लोगों में से 9 अभी जिंदा हैं.

वहीं कुशलपुरा पंचायत में भी 21 लोग ऐसे मिले हैं, जिनका पेंशन उन्हें मरा हुआ बताकर रोक दिया गया है.

भीम पंचायत के रैंडम सर्वे के बाद अभियान ने राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बड़ी लापरवाही की आशंका जताई है.

सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने बीबीसी को बताया कि क़रीब 2 लाख लोगों को 'अन्य' की श्रेणी में रखे जाने से वो पेंशन से वंचित हो गए हैं.

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उनका कहना है कि जीवित लोगों को मृत घोषित करना गंभीर बात है और सूची का सत्यापन किया जाना चाहिए.

अभियान के मुताबिक़ राज्य में 2015 के अंत तक बुज़ुर्ग, विधवा और विकलांग पेंशन पाने वाले 68 लाख लोग थे, जिनमें से दस लाख लोगों की पेंशन रुकी हुई है.

इनमें से 3 लाख लोगों की पेंशन यह कहते हुए बंद की गई है कि उनकी मौत हो चुकी है.

उधर सामाजिक सुरक्षा, न्याय एवं अधिकारिता निदेशक रवि जैन ने का कहना है, "संभव है किन्हीं तकनीकी या किसी और वजह से पेंशन सूची से कुछ लोगों का नाम हट गया हो तो, उसकी जाँच करवा रहे हैं. सत्यापन का काम गाँव या पंचायत स्तर का होता है विभाग का नहीं."

उन्होंने सभी ज़िला कलेक्टरों को इस बारे में लिखा है ताकि सच्चाई सामने आ सके.

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अभियान की मांग के बाद भीम पंचायत के अब तक मृत समझे गए 8 लोगों की पेंशन शुरू कर दी गई है.

इनमें से एक कालूराम ने बताया कि उन्हें मृत लोगों की श्रेणी में डाल दिया गया था, पर अब उन्हें विकलांग पेंशन फिर से मिलने की उम्मीद है.

अभियान की मांग है कि ग़लत सत्यापन की वजह से बंद की गई सभी पेंशन फिर से शुरू की जाए और लापरवाह कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए.

निखिल डे का कहना है कि 'मृत' या 'अन्य' की श्रेणी में ग़लत तरीके से डाले गए लोगों को मुआवज़ा भी मिलना चाहिए.

ऐसे मामले फिर से ना हो दोहराए जाएँ, इसके लिए 'सूचना एवं रोज़गार अभियान' राज्य में जवाबदेही क़ानून की भी मांग उठा रहा है.

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