'स्वास्थ्य मंत्री निरोध क्यों नहीं रख लेते नाम'

  • 17 जुलाई 2016
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विश्व जनसंख्या पखवाड़े के तहत बांटे जाने वाले ‘आशा’ कंडोम को उत्तराखंड सरकार ने वापस ले लिया है.

दो दिन पहले घर-घर बांटने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में आशा महिला कार्यकर्ताओं को ओरआरएस घोल, बच्चों के लिए आयरन की गोलियों के साथ कंडोम दिए गए तो वे भड़क गईं क्योंकि इन पर 'आशा’ कंडोम लिखा हुआ था.

भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र या सीटू से जुड़ी आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दूबे कहती हैं कि इससे पहले भी परिवार नियोजन के उद्देश्य से कंडोम बांटे गए हैं लेकिन विरोध नहीं हुआ, पर इस बार विरोध होना लाज़िमी था.

महिला आशा कार्यकर्ता इसके विरोध में सड़क पर उतर गईं और उन्हें भाजपा का समर्थन भी मिला.

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राज्य सरकार ने इस विरोध का संज्ञान लिया और ‘आशा’ कंडोम के वितरण पर रोक लगा दी.

मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार अग्रवाल कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने इन कंडोम को महिला आशा कार्यकर्ताओं और महिलाओं का अपमान बताकर इनके वितरण पर रोक लगाने का आदेश दिया.

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर यह सारा स्टॉक वापस लेने और नए नाम से परिवार नियोजन सामग्री भेजे जाने का भी आग्रह किया है.

अग्रवाल यह भी कहते हैं कि इस पूरे विवाद में राज्य सरकार का कोई दोष नहीं रहा बल्कि यह केंद्र सरकार को देखना चाहिए कि ऐसी ग़लती कैसे हुई.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि अगर किसी तरह की सामग्री से महिलाओं की संवेदनाएं आहत होती हैं तो उसे तुरंत वापस लिया जाना सही है.

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उधर ‘आशा’ कंडोम वापस लिए जाने के आदेश के बाद यह पूछे जाने पर कि वैसे जनसंख्या नियंत्रण के लिए अगर आशा कार्यकर्ता इन्हें वितरित कर देतीं तो क्या बुरा होता, शिवा दूबे भड़क जाती हैं.

वह कहती हैं, “अगर वह इसका नाम 'स्वास्थ्य मंत्री निरोध' रख लेते तो उनकी पत्नी, बेटी को कैसा लगता.“

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