केरल में 'बीफ़ फ्राई' के दीवाने लोग

  • 20 जुलाई 2016
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ज्यादातर लोग भारत को बीफ़ से जोड़कर नहीं देखते. अध्यात्म हां, शायद शाकाहार भी, लेकिन बीफ़ तो कतई नहीं.

शायद वे कभी केरल नहीं गए हैं. केरल यानी दक्षिण भारत का वो राज्य जिसे बीफ़ बेहद पसंद है, ख़ासतौर पर भुना हुआ बीफ़.

केरल में बीफ़ फ्राई बेहद लोकप्रिय है. मुझे बताया गया कि सबसे स्वादिष्ट बीफ़ सड़क किनारे छोटी दुकानों में मिलती है.

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वैसे जब तक इनकी ललचा देने वाली खुशबू आपके नाक तक नहीं पहुंचती तब तक तो आप बड़ी आसानी से इन्हें नज़रअंदाज़ कर सकते हैं.

लेकिन जैसे ही इस पकवान से निकलने वाली नारियल, करी पत्ते, दालचीनी, लौंग, धनिया पाउडर और भुनी मिर्च की लाजवाब खुशबू आप तक पहुंचेगी, आप खुद को रोक नहीं पाएंगें.

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मैं एक ऐसे ही एक दुकान पर पहुंची जिसे पापुट्टि होटल के नाम से जाना जाता है.

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पापुट्टि में मेन्यू जैसी चीज़ों को तवज्जो नहीं दी जाती. यदि आपने यहां आने की ज़हमत उठाई है तो ये मान लिया जाता है कि आपको बीफ़ फ्राई ही चाहिए.

मेरे मेज़बान हरिलाल और रंजीत पीए भी केवल यही खाना चाहते हैं.

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लेकिन मेरी मेहमाननवाज़ी के लिए बीफ़ फ्राई, बीफ़ करी, बीफ़ रोस्ट और केरल ब्रेड यानी मालाबार परांठा और राइस नूडल्स यानी 'इडियाप्पम' परोसे गए.

हरि कहते हैं, "जब भी मैं अपने मुंह में बीफ़ फ्राई डालता हूं जीभ यही कहती है कि मैं असली स्वर्ग में हूं."

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इतने उम्दा पकवान को बनाने के लिए आख़िर कौन-कौन सी सामग्री चाहिए. तो जवाब है नारियल, केरल के ख़ास मसाले और बहुत सारा धैर्य.

बीफ़ फ्राई या 'थंगा कोठू इराची' में मांस को आधे दिन तक धीमी आंच पर नारियल के साथ फ्राई किया जाता है.

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शेफ़ निम्मी पॉल ने बताया, "बाहर से आने वाले बीफ़ करी के ज्यादा शौकीन होते हैं. इस बीफ़ करी को टमाटर और नारियल के दूध में बनाया जाता है. इससे भारतीय खाने को जोड़कर देखा जाता है. लेकिन बीफ़ फ्राई स्थानीय लोगों में सर्वाधिक लोकप्रिय है. महक से भरे बीफ़ फ़्राई को रोज़ खाया जा सकता है. आप इसे रविवार को दोपहर के खास भोजन में भी खा सकते हैं."

निम्मी पॉल केरल में पर्यटकों को कुकिंग क्लास में इसे बनाना सिख़ाती हैं.

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उनकी बीफ़ फ्राई रेसिपी में कई तरह के मसालों का प्रयोग होता है जिसमें धनिया पाउडर, मिर्च पाउडर, काली मिर्च, दालचीनी और लौंग शामिल हैं.

मसालों के इस मिश्रण को बीफ़ के टुकड़ों पर नारियल के टुकड़ों के साथ लगाया जाता है.

इसके बाद इन सबको भारी तली वाले पैन में धीमी आंच पर पकाया जाता है.

बीफ़ को जितना अधिक भुना जाता है, उसका रंग उतना ही गाढ़ा होता है और उससे उतनी ही अधिक खुशबू आती है.

होटल में खाने आए रंजीत कहते हैं, "मुझे ये बेहद पसंद है. यह बहुत नरम होता है और मुंह में डालते ही पिघल जाता है. वैसे बीफ़ को मटन और चिकन के मुकाबले पेट के लिए हल्का माना जाता है."

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और यह सस्ता भी है. पापुट्टि होटल में मिलने वाले सभी बीफ़ के पकवानों की कीमत महज़ दो सौ रुपये के करीब है.

बीफ़ के प्रति ऐसा प्यार हिन्दू बहुल भारत में थोड़ा अजीब सा लगता है क्योंकि यहां गाय की पूजा की जाती है.

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उत्तरी, मध्य और पश्चिमी भारत के ज्यादातर हिस्सो में गौ मांस या बीफ़ खाने पर पूरी तरह से या आंशिक तौर पर प्रतिबंध है.

हालांकि केरल में बीफ़ ख़ाने पर प्रतिबंध नहीं है. 55 फीसदी हिन्दू आबादी वाला केरल उन चंद राज्यों में से है जहां इस पर प्रतिबंध नहीं है.

ब्रंटन बोटयार्ड्स प्रमुख, शेफ़ मनोज नायर बताते हैं कि यहां बीफ़ "सेक्यूलर मीट" माना जाता है.

उनका कहना है, "केरल के लिए बीफ़ बहुत महत्वपूर्ण है. एक ही मेज़ पर जाति और वर्ग की विभिन्नताओं के बावजूद एक हिन्दू, मुसलमान और ईसाई साथ बैठकर बीफ़ फ्राई और पराठे खाते हुए रिश्ते को मज़बूत करते हैं."

बीफ़ इतनी गहराई से केरल की पहचान बन चुकी है कि इसमें राजनीति भी शामिल हो गई है.

जैसे की हाल ही में युवाओं के एक ग्रुप ने "बीफ़ जनता पार्टी" नाम से एक फेसबुक पेज शुरू किया जो केंद्र सरकार के गौ हत्या या बीफ़ खाने पर पाबंदी के विरोध में था.

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इस ग्रुप के एक सदस्य ने नाम न बताने के शर्त पर बीबीसी को कहा, "अब से पहले कभी भी इस तरह बीफ़ पर प्रतिबंध नहीं लगा था. जिस तरह से गो रक्षक गिरोह और भीड़ हत्याएं हुईं हैं, वे फासीवाद का सबसे डरावना रूप दिख़ाती हैं."

औसत केरलवासी मसालेदार बीफ़ और नारियल ताड़ी के गिलास के साथ राजनीतिक विचार विमर्श करते हैं.

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मेरे साथी हरि अपनी बात बड़ी ही भावनात्मक अंदाज़ में कुछ यूं जाहिर करते हैं.

"अगर कभी भी केरल में बीफ़ या ताड़ी पर प्रतिबंध लगाया गया तो मैं तो यहां से चला जाऊंगा."

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