'फ़ौजियों को उकसाने के लिए फेंकते हैं पत्थर'

  • 26 जुलाई 2016
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हाल ही में भारत प्रशासित कश्मीर में हुई हिंसा में नौजवान प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों पर अक्सर पत्थर फेंकते हुए देखे गए. लेकिन यहाँ के लिए यह कोई नई बात नहीं है.

हर बड़े प्रदर्शन में पत्थरबाज़ों और सुरक्षाकर्मियों के बीच जम कर मुक़ाबला होता है.

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कश्मीरी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच पत्थरबाज़ी श्रीनगर की जामा मस्जिद के बाहर हर जुमे की नमाज़ के बाद होती है.

लेकिन ये लोग कौन हैं, पत्थर कहाँ से लाते हैं और पत्थर क्यों चलाते हैं?

मैं पत्थर मारने वाले ऐसे दो कश्मीरी नौजवानों से मिला. पुलिस उनकी तलाश में है. इसलिए श्रीनगर के पुराने शहर यानी डाउनटाउन में एक ख़ुफ़िया जगह पर रात के अँधेरे में मुलाक़ात हुई.

दोनों नौजवानों ने वीडियो रिकॉर्डिंग के समय अपने चेहरों को लंबे रूमाल से ढंक लिया. दोनों देखने में भले थे. उनका व्यक्तित्व भी दमदार था. लेकिन नक़ाब के पीछे चेहरे पर घबराहट साफ़ नज़र आ रही थी क्योंकि उनके अनुसार, पुलिस उनकी तलाश कर रही है.

पहले मैं 28 साल के नौजवान से पूछा, "पत्थर क्यों चलाते हो?"

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उसने फ़ौरन कहा, "हम पत्थर चला कर चाहते हैं कि बाहर तक हमारी आवाज़ पहुंचे. सबको मालूम हो कि हम चाहते क्या हैं."

मैंने पूछा, "क्या चाहते हैं?"

उसने कहा, "आज़ादी."

प्रदर्शनों के दौरान ये पत्थर बरसों से चलाते आ रहे हैं. लेकिन यहाँ कुछ लोग कहते हैं कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों के ख़िलाफ़ पत्थर फेंकने से इन्हें कुछ हासिल नहीं होता है.

हमारे सामने बैठे दोनों नौजवानों में से दाढ़ी वाले 24 साल के नौजवान ने कहा, "ये तो सच है कि कुछ हासिल नहीं हो रहा है. लेकिन ये असल में ग़ुस्से का इज़हार है."

इस नौजवान ने कहा कि कुछ दिन पहले पुलिस वाले उनके घर आए और सबकी पिटाई की, "हम सब निकले और पत्थरबाज़ी शुरू कर दी."

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इस नौजवान ने आगे कहा, "हमारा यही एक हथियार है. हमारे पास बंदूक नहीं है."

उनका कहना था कि वो केवल पत्थर फेंकते हैं. लेकिन सिक्योरिटी वाले आंसू गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल करते हैं.

पत्थर का जवाब फायरिंग से देने के सवाल पर वो कहते हैं कि दोनों पक्ष का कोई मुक़ाबला ही नहीं है.

प्रदर्शन के दौरान पत्थर फेंकने वाले पाकिस्तानी झंडे लहराते देखे जा सकते हैं. वो पाकिस्तान के पक्ष में नारे भी लगाते हैं. इस पर दाढ़ी वाला नौजवान बोला, "ये हम सिक्योरिटी फ़ोर्सेस को उकसाने के लिए करते हैं."

भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक़, पत्थर फेंकने वाले पेशेवर होते हैं और बाहर से आते हैं. इन दोनों नौजवानों ने इसे ग़लत बताया.

उन्होंने कहा कि कहा कि पत्थर फेंकने वाले स्थानीय लोग होते हैं, हर घर में होते हैं और स्वेच्छा से पत्थर फेंकते हैं.

सुरक्षाकर्मी भी कहते हैं कि पत्थर वाले अक्सर ग़रीब और कम पढ़े-लिखे नौजवान होते हैं. लेकिन पत्थर फेंकने वाले इन दोनों नौजवानों ने कहा वो हर वर्ग से आते हैं. खुद ये दोनों पढ़े लिखे थे और अमीर परिवार से थे.

भविष्य की चिंता नहीं है? इस सवाल पर 28 साल नौजवान ने कहा, 'नहीं.'

उसने कुछ पल सोच कर कहा, "उन्हें (भारत को) केवल कश्मीर चाहिए यहाँ के लोग नहीं. हमें भी उनकी ज़रूरत नहीं."

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