महाश्वेता देवी का 90 साल की उम्र में निधन

  • 28 जुलाई 2016
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बांग्ला की जानी मानी साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का गुरुवार को कोलकाता में निधन हो गया है.

वो 90 साल की थीं.

महाश्वेता देवी लंबे समय से उम्र संबंधी समस्याओं से पीड़ित थीं. उन्हें लंबे समय से गुर्दे की और रक्त संक्रमण की समस्या थी.

पिछले दो महीने से वो कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं और 23 जुलाई को उन्हें हार्ट अटैक हुआ था.

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उनके निधन की ख़बर मिलते ही सबसे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ''भारत ने एक महान लेखिका खो दी है. बंगाल ने एक महान मां को खोया है. मैंने अपना एक मार्गदर्शक खो दिया है.''

बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट में लिखा, ''महाश्वेता देवी ने क़लम की ताक़त को बख़ूबी दिखाया है. न्याय, बराबरी और दया की यह आवाज़ हमें गहरे दुख में छोड़कर चली गई.''

फ़िल्मकार महेश भट्ट और मधुर भंडारकर ने भी महाश्वेता देवी के निधन पर दुख व्यक्त किया.

भट्ट ने ट्वीट में लिखा कि 'वह महिला जो कमज़ोरों के साथ चली और जिसने ताक़तवर लोगों के साथ बैठने से मना कर दिया.'

महाश्वेता देवी को ज्ञानपीठ, पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी और मैग्सेसे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.

तीन दशक से ज़्यादा समय तक वह आदिवासियों के बीच काम करती रहीं. उनके साहित्य का काफ़ी हिस्सा आदिवासियों के जीवन पर आधारित था.

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यूं तो महाश्वेता देवी बांग्ला में उपन्यास लिखा करती थीं लेकिन अंग्रेज़ी, हिंदी और अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद के ज़रिए उनके साहित्य की पहुंच काफ़ी व्यापक स्तर पर थी.

उनकी चर्चित किताबों में हज़ार चौरासी की मां, ब्रेस्ट स्टोरीज़, तीन कोरिर शाध शामिल हैं. उनकी कई किताबों पर फ़िल्में भी बनाई गई हैं.

'हज़ार चौरासी की मां' पर फ़िल्मकार गोविंद निहलानी ने फ़िल्म बनाई है.

इसके अलावा 'रुदाली', 'संघर्ष' और 'माटी माय' भी ऐसा सिनेमा है जो महाश्वेता के उपन्यासों पर आधारित है.

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