जीएसटी: आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार?

  • 3 अगस्त 2016
संसद इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को राज्यसभा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पेश किया.

जीएसटी बिल को लोकसभा पहले ही पास कर चुकी है. राज्यसभा में भी इसके पास होने की संभावना है. इसके पास होने के बाद जो क़ानून अस्तित्व में आएगा, वह देश की टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह बदल कर रख देगा.

जीएसटी विधेयक को क़ानून बनाने के लिए एक दशक से बात हो रही है लेकिन राजनीतिक रस्साकशी के कारण ये क़ानून नहीं बन पाया है.

इस नई कर व्यवस्था से केंद्र और राज्य सरकारों के वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाने वाले सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह एक समान कर वजूद में आ जाएगा.

पढ़ें- आपके जीवन से जुड़ी जीएसटी बिल की 7 बातें

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंकेगा.

तो क्या कारण हैं कि कुछ पार्टियों और राज्य इसे लागू करने के ख़िलाफ़ हैं?

वस्तु एवं सेवा कर के ड्राफ़्ट बिल से लेकर संसद में बहस कराए जाने तक भारत को दस साल लगे.

पढ़ें- जीएसटी से क्या सस्ता, क्या महंगा?

इमेज कॉपीरइट AFP

सरकार और उससे सहमत आर्थशास्त्री इसे आज़ादी के बाद का भारत का सबसे बड़ा कर सुधार मान रहे हैं.

उम्मीद की जा रही है कि जीएसटी देश के टेढ़ी कर व्यवस्था को पटरी पर लाएगा और लाल फीताशाही को कम करेगा.

ये टेक्स, सामान के शहर में प्रवेश पर लगने वाले कर, एक्साइज़ ड्यूटी, सर्विस टैक्स और अन्य राज्य स्तरीय करों की जगह ले लेगा.

सरकार कहना है कि इससे उसे तीन अहम फायदे होंगे और पहला ये है कि इससे मेक इन इंडिया प्रोग्राम को प्रोत्साहन मिलेगा.

अनुमान है कि उच्च कर दरों और लाल फीताशाही के कारण देरी के कारण वर्तमान में बिज़नेस को 5-10 प्रतिशत का नुकसान होता है.

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

भारत के एक राज्य में बनने वाला सामान जब देश के किसी दूसरे हिस्से में पहुंचता है तो उस पर कई बार टैक्स लग जाता है.

इस असुविधाजनक कड़ी को जीएसटी लाने से सुधारा जा सकेगा. इसका मतलब ये हुआ कि उद्योगों को निवेश में प्रोत्साहन मिलेगा.

दूसरा, जीएसटी के तहत देश में उत्पादन और खपत की कड़ी में अंतिम छोर पर कर लगाया जाएगा.

हालांकि शराब, क्रूड ऑयल, हाई स्पीड डीज़ल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन को जीएसटी से बाहर रखा गया है. इस पर फ़ैसला जीएसटी काउंसिल को करना है.

तंबाकू को जीएसटी के दायरे में लाया गया है, केंद्र सरकार इस पर उत्पाद शुल्क लगा सकती है.

अभी भारत के अधिक विकसित इलाकों में, जहां उद्योग हैं, सामान के बनने के तुरंत बाद ही टैक्स लगा दिया जाता है.

लेकिन अगर जीएसटी पास हो जाता है तो टैक्स वो राज्य सरकारें वसूलेंगी जहां उत्पाद की खपत होती है.

इसलिए, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे कम विकसित राज्यों को अधिक संसाधन मिलेंगे क्योंकि वहां उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या है.

हालांकि अधिकांश विशेषज्ञ इस व्यवस्था को भारत के विभिन्न राज्यों के बीच राजस्व के ज़्यादा बराबरी वाली वितरण व्यवस्था के रूप में देखते हैं.

तीसरा, यह टैक्स वसूली में मदद करेगा और देश में कर चोरी को कम करेगा.

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

यह पूरा तंत्र इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जा रहा है इसलिए हर भुगतान का एक डिज़िटल निशान होगा, जिसे तलाशना आसान होगा.

ये अपने आप में सबसे बड़ा प्रयास है जिसके मार्फत टैक्स संबंधित 75 लाख मामलों को ऑनलाइन लाया जा सकेगा.

लेकिन एक चीज़ जिसकी ओर अधिकांश लोग इशारा कर रहे हैं वो है, कि की उद्योगों को जीएसटी के दायरे से अलग रखा गया है, जो राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है.

राज्य सरकारों के राजस्व के लिए अहम माने जाने वाले ईंधन, रीयल इस्टेट और आबकारी विभाग इससे अलग हैं.

इसके बावजूद वर्ल्ड बैंक इसे गेम चेंजिंग आर्थिक सुधार मानता है, जोकि राष्ट्रीय आर्थिक उत्पाद में कम से कम दो प्रतिशत का इजाफ़ा करता है.

एक अनुभवी बिज़नेसमैन का कहना है- 'यह भारत का 'रिवर्स ब्रेक्ज़िट' (यानी यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के उलट) कार्रवाई है. इसे मुख्यतः देश के वर्तमान संघीय कर व्यवस्था की बजाय एक संयुक्त आर्थिक इकाई के रूप में काम करने के तौर पर देखा जा रहा है.'

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार