दलितों पर हमले न करो, गोली मारनी है, मुझे मारो: मोदी

  • 7 अगस्त 2016
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलितों पर हुए हमलों के मुद्दे पर कहा है कि यदि कोई हमला करना चाहता है तो उन पर करे, दलितों पर नहीं.

पीटीआई के मुताबिक हैदराबाद में अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने कहा, "यदि हमला करना है तो मुझ पर करो, दलितों पर नहीं, यदि गोली मारनी है तो मुझे मारें."

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम दलितों और समाज के अन्य वर्गों को सुरक्षा दें." उन्होंने ये भी कहा कि दलितों के मुद्दों का राजनीतिकरण बंद होना चाहिए.

इससे पहले लगातार दूसरे दिन 'गौरक्षकों' पर निशाना साधते हुए उन्होंने मेडक में कहा था कि लोग फ़र्ज़ी गौरक्षकों से सावधान रहे हैं.

इससे पहले शनिवार को दिल्ली में उन्होंने कहा कि 80 फीसदी गौरक्षक गोरखधंधों में लिप्त हैं.

मोदी ने राज्य सरकारों से ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा था.

उन्होंने कहा था, "वो हमारी गायों की परवाह नहीं करते हैं. मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि वो फर्ज़ी गोरक्षकों की लिस्ट तैयार करें और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करें."

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पिछले महीने गुजरात के उना में चमड़ा उतारने का काम करने वाले दलितों की पिटाई से गौरक्षकों की गतिविधियों पर सवाल उठ रहे हैं.

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इस मुद्दे पर राजनीतिक पारा चढ़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने भी प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व से कथित गोरक्षकों को कड़ा संदेश देने की मांग की थी.

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उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डा. यशवंत सिंह ने बीबीसी से कहा, " जब भी दलितों पर अत्याचार होता है तो दलित समुदाय का कोई न कोई व्यक्ति उनकी बात रखता है. हम लोगों ने उनकी बात उठाई है. मैं नहीं मानता कि हमारी वजह से प्रधानमंत्री ऐसा कहा है लेकिन उनकी बात सही है. "

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उधर, कांग्रेस ने शनिवार को ही प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाए थे.

कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का कहना था कि आने वाले चुनावों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी भारतीय जनता पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई की कोशिश में हैं.

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चतुर्वेदी ने बीबीसी से बातचीत में कहा था, "उन्हीं की पार्टी और संघ से जुड़े संगठन इसका नेतृत्व करते आ रहे हैं. ये कहना कि इसमें असामाजिक तत्व जुड़ गए हैं, एक तरह से ये उनको बचाने जैसा दिखता है. अगर प्रधानमंत्री वास्तव में ईमानदार हैं तो प्रधानमंत्री बताएं कि उन्होंने और सरकार ने क्या कार्रवाई की है. उन राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां ऐसे लोगों पर भविष्य में कठोर कार्रवाई होगी इस बात का विश्वास दिलाएं."

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रामकृपाल सिंह की राय है कि मोदी ने जो कहा उसे लेकर हैरान होने की कोई वजह नहीं है.

रामकृपाल सिंह ने बीबीसी से कहा, "मुझे उम्मीद थी कि जब भी मोदी इस पर मुंह खोलेंगे तो यही कहेंगे. ये ठीक है कि वो आरएसएस से जुड़े रहे हैं. हिंदूवादी हैं. लेकिन जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, अहमदाबाद में विवादित धर्मस्थलों पर उन्होंने सबसे पहले कार्रवाई की थी."

वो याद दिलाते हैं कि मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र से विवादित मुद्दों को हटाने पर ज़ोर दिया था. इस वजह से घोषणा पत्र जारी होने में देरी हुई थी. हालांकि, वो कहते हैं कि ऐसे मुद्दों पर मोदी का देर से बोलना खलता है.

उनका कहना है कि मोदी इन विषयों पर तब बोलते हैं जब बार-बार कुरेदा जाता है. उनके अनुसार, 'एक मुखिया होने के नाते ऐसे ज्वलंत सवालों पर उन्हें बोलना चाहिए, बिना इंतज़ार किए.'

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