पांच राज्यों में बाढ़ से अब तक 30 की मौत

  • 22 अगस्त 2016
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उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति गंभीर है. समाचार एजेंसियों के अनुसार 30 लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 26 हज़ार को बचाया गया है.

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल और झारखंड में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. राजस्थान और उत्तराखंड में भी कई जगहें बाढ़ से प्रभावित हुई है.

गंगा, यमुना और दूसरी बड़ी नदियां बलिया, वाराणसी, मिर्जापुर समेत कई ज़िलों में कहर बरपा रही हैं.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक हज़ारों लोग घर छोड़कर दूसरी जगह पनाह लेने के लिए मजबूर हुए हैं.

राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ़) के अनुसार बिहार, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में 26,400 से अधिक लोगों को बचाया गया है. प्रभावित राज्यों में एनडीआरएफ़ की 56 टीमें काम कर रही हैं.

सबसे ज़्यादा 17 लोगों की मौत मध्यप्रदेश में हुई है, जबकि यूपी और बिहार में पानी में डूबने, या बिजली गिरने या मकान गिरने से 13 लोगों की मौत हो गई है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिक प्रभावित पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फ़ोन पर बात की और उन्हें केंद्र की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया.

मध्य प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से सतना और रीवा सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

भोपाल से स्थानीय पत्रकार शुरैह नियाज़ी ने बताया कि बुंदेलखंड और विंध्याचल क्षेत्र के बाद अब बारिश ने पश्चिमी मध्य प्रदेश का रुख कर लिया है. बीते 24 घंटो में बाढ़ की वजह से 7 लोगों की मौत हो गई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों को ज़रूरी निर्देश दिए हैं.

हालात मंदसौर, नीमच और टीमकगढ़ में भी बहुत खराब हैं. वहीं गुना, राजगढ़, शिवपुरी और उज्जैन ज़िलों में भी लगातार बरसात हो रही है. क्षेत्र की चंबल, शिवना और शिप्रा नदियां सभी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

मंदसौर कलेक्टर स्वंतत्र सिंह के अनुसार, "निचले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को हिदायत दी गई है कि वो ऊपरी इलाके में आ जाएं. आपदा प्रबंधन दल पूरी तरह से तैनात हैं और लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं."

पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में गंगा का जलस्तर तेज़ी से बढ़ने की वजह से भूमिकटाव की समस्या काफ़ी गंभीर हो गई है. ज़िले में गंगा नदी का जलस्तर अब भी ख़तरे के निशान से ऊपर है.

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ज़िले के मानिकचक इलाक़े में चार सौ गांव पानी में समा चुके हैं. इससे बेघर हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.

अतिरिक्त ज़िलाधिकारी कंचन चौधरी ने बताया, ''गंगा का पानी नए इलाक़ों में घुसने की वजह से विस्तृत इलाक़ा पानी में डूब गया है. इससे 20 हज़ार से ज़्यादा लोग प्रभावित हैं.''

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की ओर से राज्य सरकार को सूचित किए बिना 50 हज़ार क्यूसेक पानी छोड़ने पर नाराज़गी जताई है.

मुख्यमंत्री का कहना है कि झारखंड में थोड़ी-सी बारिश होते ही डीवीसी बंगाल में पानी छोड़ देता है. बार-बार मना करने के बावजूद वह अपनी हरकत से बाज़ नहीं आ रहा है. सरकार ने निगम से पूर्व सूचना के बिना पानी नहीं छोड़ने को कहा है.

बिहार के कई इलाक़ों में भी बाढ़ जैसे हालात हैं. गंगा, सोन, गंडक समेत कई नदियां उफ़ान पर हैं. राजधानी पटना के निचले इलाक़ों में पानी घुस आया है. इसके कारण कई ज़िलों में लोग बेघर हो गए हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को इस संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक की थी.

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मुख्यमंत्री ने पटना, भोजपुर, सारन, वैशाली, बेगूसराय और खगड़िया के इलाक़ों का हवाई सर्वे भी किया.

फ़िलहाल 82 राहत शिविरों में क़रीब 15,000 लोगों ने शरण ले रखी है. हालात को देखते हुए पटना में एनडीआरएफ़ की पांच टीम चेन्नई से मंगाने का फ़ैसला किया गया है.

इस बीच, एक अच्छी ख़बर ये है कि गंगा के जल स्तर में जल्द ही गिरावट आने की उम्मीद है क्योंकि पश्चिम बंगाल ने फरक्का बैराज के 104 गेट खोल दिए गए हैं ताकि पानी तेज़ी से आगे निकल जाए.

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उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. इलाहाबाद, मिर्ज़ापुर, वाराणसी, महोबा, बांदा के इलाक़े प्रभावित हैं. कई जगहों पर गंगा नदी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है. दूसरी नदियां भी उफ़ान पर हैं.

कई गांवों में लोग गाड़ी के ट्यूब को सहारा बनाकर अपने घरों का सामान बाढ़ के पानी से बाहर निकाल रहे हैं. पानी बढ़कर सड़कों तक आ गया है, जिससे 60 गांव से अधिक के संपर्क का मार्ग ख़त्म हो गया है.

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