भारत से असहज हो रहा है चीन?

  • 23 अगस्त 2016
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चीनी विदेश मंत्री वांग यी कुछ दिन पहले भारत आए थे. उनके दौरे का मुख्य मकसद दक्षिण चीन सागर के मसले पर जी-20 बैठक में भारत को दूसरे देशों का साथ देने से रोकना था.

सितंबर की शुरुआत में जी-20 की बैठक होने वाली है.

हाल में दोनों देशों के बीच हुई तकरार को देखते हुए लगता नहीं है कि भारत किसी भी तरह से चीन का पक्ष लेगा.

हाल ही में भारत ने चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के तीन पत्रकारों का वीज़ा बढ़ाने से मना कर दिया था.

इन पत्रकारों के नकली नाम से तिब्बती शरणार्थियों से मिलने की रिपोर्ट आने के बाद भारत ने यह कदम उठाया था.

शिन्हुआ के साथ तकरार का भारत का पहला मौका था. ऐसे देशों में जहां चीनी दूतावास नहीं है, शिन्हुआ की अहमियत चीनियों के लिए चीन के सरकारी आवास की तरह है.

हो सकता है कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) के लिए भारत की सदस्यता के दावे को चीन का समर्थन नहीं मिलना भारत की कार्रवाई की वजह नहीं रही हो, लेकिन भारत को निश्चित रूप से इससे यह सबक तो मिला ही होगा कि उसका बुरा चाहने वालों से कैसे निपटना है, ख़ासकर अगर बात चीन की हो तो.

दुनिया के पैमाने पर भारत अगर अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है तो एनएसजी में मिले झटके के बाद भारत को अपनी छवि अब और मज़बूत बनाने की जरूरत है.

इसके लक्षण दिखने भी लगे हैं.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ भारत ने हाल ही में लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर टी-72 टैंकों को तैनात किया है. साल 1962 में चीन के साथ लड़ाई के कई दशकों बाद भारत ने ऐसा किया है और इस कदम पर चीन ने ध्यान भी दिया है.

हालांकि चीन ने अपने आधिकारिक बयान में सीमा समझौता क़ानून के अनुरूप शांति बनाए रखने की ज़रूरत पर बल दिया है.

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लेकिन चीन के मीडिया ने इसे आड़े हाथ लिया है. चीन के एक प्रमुख मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में लिखा है कि भारत-चीन सीमा पर '100 भारतीय टैंकों' की तैनाती ने भविष्य के संभावित चीनी निवेशकों का ध्यान खींचा है. वे हो सकता है कि "निवेश करने के फ़ैसले से पहले राजनीतिक अस्थिरता की संभावनाओं का मूल्यांकन करें."

साल 2016 के मालाबार नौसैनिक ड्रिल में जापान की स्थाई सदस्य के तौर पर मौजूदगी भी चीन के लिए कई तरह से मायने रखती है.

1.जापान को इस ड्रिल में शामिल करने के फ़ैसले से भारत लंबे समय से बचता रहा है. भारत को डर था कि कहीं इससे चीन नाराज़ ना हो जाए.

2.ये ड्रिल चीन के पास के समुद्री क्षेत्र में आयोजित हुआ जिसे चीन के पीछे का हिस्सा माना जाता है.

3.भारत की नौसेना टुकड़ी की ड्रिल फिलिपींस और वियतनाम में इसलिए रोकनी पड़ी क्योंकि ड्रिल की जगह चीन के करीब हो सकती थी.

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चीन को टक्कर देने वाली फ़ौज को अपने प्रभाव में लेने की कवायद के तहत भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़ों ने हाल ही में मलेशिया के पोर्ट केलांग का दौरा किया और वहां पहली बार रॉयल मलेशियन नेवी के साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत पर 'टेबल टॉप' अभ्यास किया.

चीन इससे असहज दिखा था और उसने दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के जहाजों की मौजूदगी पर आपत्ति दर्ज की थी.

दक्षिण चीन सागर में एक दावेदार मलेशिया भी है जिसे भारत ब्रह्मोस मिसाइल देता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की दो उपलब्धियों ने दुनिया के पैमाने पर उसकी स्थिति को बदल दिया है और चीन जैसी महाशक्ति के इसके प्रति नजरिए को भी.

1. मिसाइल टेक्नॉलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) के 35वें सदस्य के तौर पर भारत अक्टूबर में होने वाली अगली बैठक में हिस्सा लेने वाला है. इस बैठक में मिसाइल और अंतरिक्ष के क्षेत्र में होने वाले विकास को लेकर फ़ैसले लिए जाएंगे. सबसे दिलचस्प बात यह है कि चीन इसका सदस्य नहीं है.

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2. चाबहार बंदरगाह ने भारत के रास्ते मध्य पूर्व, मध्य एशिया और अफ़ग़ानिस्तान के लिए खोल दिए हैं. एक चीनी लेख ने भारत की इस उपलब्धि का उल्लेख करते हुए लिखा है कि चाबहार भारत की एक व्यापक योजना है जो उत्तर-पूर्व, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और ट्रांस कॉकेशस में भारत की भूगोलीय राजनीति को नया आयाम देगी.

हालांकि भारत हमेशा से चीन की निगरानी सूची में रहा है. फिर भी चीन, भारत को दूसरे स्तर के निगरानी स्तर में रखता आया है.

चीनी नीति ने हमेशा से भारत को दुनिया के पैमाने पर एक ऐसे देश के रूप में देखा है जो कोई भी कड़ा कदम उठाने में अक्षम है.

चीन धीरे-धीरे भारत की बदलती नीतियों को नोटिस कर रहा है. यह उसकी प्रतिक्रियाओं में भी स्पष्ट तौर पर झलक रहा है.

चीन ने पहली बार कश्मीर में व्याप्त अशांति पर स्पष्ट तौर पर टिप्पणी की है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू कांग ने कश्मीर के हालात पर 'चिंता' ज़ाहिर की है जो कि चीन के लिहाज से एक दुर्लभ बात है क्योंकि वो हमेशा से कश्मीर के मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचता आया है.

चीन दक्षिण एशियाई मामलों में अपनी गतिविधियां बढ़ा सकता है ख़ासतौर पर जिन मामलों में भारत को कठिनाई का सामना करना पड़े.

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