यूपी में राहुल गांधी करेंगे खाट पंचायत

  • 6 सितंबर 2016
राहुल गांधी के कार्यक्रम स्थल पर चल रही तैयारियां. इमेज कॉपीरइट CONGRESS PARTY

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज से उत्तर प्रदेश के अपने चुनावी अभियान पर निकल रहे हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्वी ज़िले देवरिया से शुरू होकर उनकी यह ‘किसान यात्रा’ दिल्ली तक चलेगी.

इस दौरान वो मुख्य रूप से किसानों के साथ चर्चा करेंगे. ख़ास बात यह है कि ये चर्चा वो खाट यानी चारपाई पर बैठकर करेंगे और किसानों को कर्ज़ माफ़ी का आश्वासन पत्र भी देंगे.

नौ अक्तूबर तक चलने वाली देवरिया से दिल्ली तक की इस यात्रा में राहुल गांधी क़रीब पचीस हज़ार किसानों से सीधे मुलाक़ात करेंगे.

राहुल गांधी इस यात्रा के दौरान न सिर्फ़ किसानों के साथ चर्चा करेंगे बल्कि उनकी दुखती रग पर भी हाथ रखेंगे और उस पर मरहम लगाने का आश्वासन देंगे. इसके लिए पार्टी ने पूरी तैयारी कर रखी है.

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यात्रा में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक टोली भी चल रही है जिनके पास पीले रंग का एक बैग होगा जिसमें किसान मांग पत्र, एक मोबाइल स्टिकर और एक दीवार पर लगाने वाला स्टिकर रहेगा.

कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जा कर किसानों से मिलेंगे, उन्हें यूपीए सरकार में हुए कर्ज माफ़ी के फ़ैसले के बारे में बताएँगे और किसानों को बिजली बिल आधा करने का वादा करेंगे.

यात्रा देवरिया से शुरू होकर दिल्ली तक चलेगी, लेकिन इसे किसान यात्रा बनाने के पीछे पार्टी का ख़ास मक़सद है. अखिलेश सिंह कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता हैं और उसी इलाक़े के हैं जहां से यात्रा शुरू हो रही है.

अखिलेश सिंह कहते हैं कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से गांवों और किसानों की उपेक्षा हुई है, उससे किसान बदहाल और असहाय महसूस कर रहा है. जबकि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

वो कहते हैं कि राहुल गांधी अक़्सर किसानों की समस्याएं उठाते रहते हैं और उनके हितों के लिए काम करते हैं, इसलिए इस यात्रा को किसान यात्रा के रूप में चलाया जा रहा है.

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बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में अभी तक राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों के आधार पर ही मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में लगे हैं, ऐसे में कांग्रेस के रणनीतिकारों ने शायद इसीलिए राहुल गांधी के चुनावी अभियान की शुरुआत किसान यात्रा से की है. जगह भी पूर्वी उत्तर प्रदेश को चुना गया है, जहां बहुसंख्यक आबादी किसानों की है.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं किसानों को लुभाने का कांग्रेस का ये नया तरीक़ा पार्टी को कितना चुनावी फ़ायदा पहुंचाएगा, इस पर तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसका उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में और आगे भी कुछ न कुछ लाभ तो ज़रूर होगा.

योगेश मिश्र कहते हैं कि किसान सभी जातीय और धार्मिक वर्गों से हैं और सभी की समस्याएं एक जैसी हैं. यही नहीं, 2009 में यूपीए सरकार को किसानों की कर्ज़ माफ़ी और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ मिल भी चुका है, ऐसे में चुनावी फ़ायदा न हो, ये सोचना तो बेमानी होगा.

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जानकार ये भी कहते हैं कि चुनावी फ़ायदा अपनी जगह है, लेकिन इस अभियान के ज़रिए पार्टी क़रीब दो करोड़ किसानों से सीधा संपर्क करने में कामयाब होगी. लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि संपर्क में आने वाले कितने किसान पार्टी के इन वादों से प्रभावित होते हैं.

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