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बुधवार, 29 अप्रैल, 2009 को 10:57 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन

भारतीय चुनाव:आपके सवालों के जवाब-1

नई दिल्ली से विकास कुमार ने पूछा है कि क्या भारतीय मतदाता को नकारात्मक मतदान का अधिकार है. चुनाव आचार संहिता-1969 का सैक्शन 49-0 क्या है. यही सवाल दिल्ली से मयंक ने भी पूछा है.

दरसल यह चुनाव आचार संहिता-1969 नहीं, बल्कि 1961 का, सैक्शन 49-0 है, जिसमें मतदाता को वोट न देने और इस बात को दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है. इस नियम के अनुसार अगर कोई मतदाता, मतदान केन्द्र पर जाए और मतदाता रैजिस्टर में अपनी मतदाता संख्या के आगे हस्ताक्षर करे या अंगूठा लगाए और फिर यह निर्णय करे कि वह वोट नहीं देना चाहता, तो चुनाव अधिकारी, रजिस्टर में इस आशय की टिप्पणी दर्ज करेगा और मतदाता को उस टिप्पणी के आगे हस्ताक्षर करने या अंगूठा लगाने को कहेगा. मतदाता रजिस्टर में हस्ताक्षर करके मत न डालने के पीछे दो कारण हो सकते हैं. एक तो ये, कि ऐसा करने से धांधली या मतदान के दुरुपयोग की गुंजाइश नहीं रहती और दूसरा ये, कि वह नकारात्मक मतदान दर्ज कराकर यह कहना चाहता है कि वह किसी भी उम्मीदवार को इस योग्य नहीं समझता. लेकिन अब क्योंकि भारत में मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों द्वारा होता है तो उसमें नकारात्मक मतदान की व्यवस्था नहीं है.

मतदाता चाहे तो चुनाव अधिकारी से कह सकता है कि उसका नकारात्मक मतदान दर्ज किया जाए लेकिन ऐसा करने से गुप्त मतदान के अधिकार का उल्लंघन होता है. इसलिए चुनाव आयोग ने सन 2004 में प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह के सामने जिन सुधारों का प्रस्ताव भेजा था उसमें इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में नकारात्मक मतदान की सुविधा दिए जाने का भी प्रस्ताव था. उसमें सुझाव दिया गया था कि मशीन में उम्मीदवारों की सूची के अंत में एक कॉलम ऐसा हो जिसमें लिखा हो कि उपरोक्त किसी उम्मीदवार को वोट नहीं देना है.

कन्हरिया बाज़ार, पूर्णियां बिहार से दिलीप कुमार सेंचुरी और बिमला रानी सेंचुरी ने पूछा है कि भारत के प्रथम चुनाव आयुक्त कौन थे.

भारत के पहले चुनाव आयुक्त थे सुकुमार सेन जिन्होंने 21 मार्च सन 1950 में यह पद संभाला और 19 दिसम्बर 1958 तक इस पद पर रहे. अक्टूबर 1989 तक केवल एक ही चुनाव आयुक्त हुआ करते थे. फिर 16 अक्टूबर 1989 से लेकर 1 जनवरी 1990 के बीच यह तीन सदस्यीय निकाय बन गया. उसके बाद इसे फिर एक सदस्यीय निकाय बना दिया गया. फिर 1 अक्टूबर 1993 में इसे तीन सदस्यीय निकाय बना दिया गया. इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त हैं एन गोपालस्वामी और अन्य दो चुनाव आयुक्त हैं नवीन चावला और एस वाई क़ुरैशी.

चुनाव आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन 25 जनवरी 1950 में हुआ था. चुनाव आयोग एक स्वायत्त, अर्द्ध-न्यायिक, सांविधानिक निकाय है जिसके काम-काज में, कार्यपालिका का कोई हस्तक्षेप नहीं होता. चुनाव आयोग को, भारतीय संविधान के चार स्तम्भों में से एक माना जाता है. बाक़ी तीन स्तम्भ हैं, सर्वोच्च न्यायालय, संघ लोकसेवा आयोग या यूपीएससी और भारत के नियन्त्रक महालेखापरीक्षक या सीएजी. चुनाव आयोग के प्रमुख काम हैं, निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण करना, मतदाता सूची तैयार करना, राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिन्ह देना, उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच करना, उम्मीदवारों के चुनाव ख़र्च की जांच करना और स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव कराना.

अहमदाबाद से अभिलाष थदानी पूछते हैं कि जब 1951 में पहली बार आम चुनाव हुए थे तो लोकसभा की कितनी सीटें थी और देश की जनसंख्या क्या थी. और इस बार कितनी सीटें और आबादी कितनी है.

भारत की पहली लोकसभा का चुनाव 1951 में हुआ था जिसमें कुल 489 सीटें थीं और 17,32,12,343 मतदाता थे. उस समय भारत की आबादी थी 36,10,88,000. और इस बार लोकसभा की कुल 543 सीटों के लिए चुनाव होना है. इस समय कुल मतदाता हैं 71,41,03070 और आबादी है 1,14,79,95904.

सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश से उमाकांत गुप्ता जानना चाहते हैं कि केन्द्र शासित प्रदेशों से कितने सांसद चुनकर संसद में जाते हैं.

लोकसभा की कुल सीटों के लिए 530 सदस्य 28 राज्यों से और 13 सदस्य 7 केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाने हैं. एक एक सदस्य अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन दीव, लक्षद्वीप और पॉंडिचेरी से और 7 दिल्ली से.

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के ज़रिए रवींद्र मीना ने सवाल किया है कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी 1984 में हुए लोकसभा चुनाव जीते थे या हारे थे.

सन 1984 में हुए आम चुनाव में राजीव गांधी के नेतृत्व में काँग्रेस को 404 सीटें मिली थी जबकि भारतीय जनता पार्टी को केवल 2 सीटें मिली थीं. आंध्र प्रदेश की एक सीट नरसिम्हा राव को हराकर सी जे रैड्डी ने जीती थी और दूसरी गुजरात में ए के पटेल ने. जहाँ तक लालकृष्ण आडवाणी का सवाल है वो 1982 से लेकर 1988 तक राज्य सभा के सदस्य थे.

कर्णाटक से प्रवीन शिन्डे पूछते हैं कि चुनाव आयोग में रिटर्निंग ऑफ़िसर की क्या भूमिका होती है.

भारतीय संसद के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम - 1951 के खंड 21 के अधीन, चुनाव आयोग हर संसदीय या विधान सभा के, चुनाव क्षेत्र के लिए, रिटर्निंग ऑफ़िसर की नियुक्ति करता है जिसपर चुनाव कराने का दायित्व होता है. चुनाव आयोग सरकारी या स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी को इसके लिए मनोनीत कर सकता है. चुनाव आयोग एक या एक से अधिक सहायक मतदान अधिकारियों की नियुक्ति भी करता है जो चुनाव प्रक्रिया में मतदान अधिकारी की मदद कर सकें.

अमित शुक्ला ने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के ज़रिए सवाल किया है कि 15वीं लोकसभा के चुनाव में कुल कितनी पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं.

कुल पार्टियों की संख्या है 1055 जिसमें से 7 राष्ट्रीय स्तर की पार्टियाँ हैं, 48 राज्य स्तर की और 1000 पंजीकृत ग़ैर मान्यता प्राप्त पार्टियाँ हैं.

अनीता सिन्हा पूछती हैं कि अगर कोई चुनाव लड़ना चाहता है तो उसमें क्या क्या योग्यताएँ होना ज़रूरी है. यही सवाल पुणे महाराष्ट्र से अजय सिंह ने भी पूछा है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84 (a) के अनुसार केवल वही व्यक्ति लोकसभा का चुनाव लड़ सकता है जो भारतीय नागरिक हो और कम से कम 25 साल का हो. इसके अलावा उसका नाम मतदाता सूची में होना चाहिए. वह किसी भी चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है केवल असम, लक्षद्वीप और सिक्किम को छोड़कर.

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