इराक़ में अमरीकी युद्ध की शब्दावली

  • 18 मार्च 2013

यह शोध इराक़ में पिछले दस सालों के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, बराक ओबामा एवं अन्य उच्च स्तरीय अधिकारियों की तरफ से किए गए संवाद में बार-बार दोहराए गए ज्यादातर प्रमुख शब्दों की पड़ताल करता है.

शोध में केवल अमरीका सरकार के आधिकारिक वक्तव्यों का विश्लेषण किया गया है ताकि पूरे दशक के लिए एक सुसंगत शब्द समूहों का एक स्रोत बनाया जा सके.

केवल अमरीकी नजरिया ही क्यों?

वास्तव में हम इराक़ में चल रही लड़ाई के दौरान प्रचलन में आई वैकल्पिक शब्दावलियों के साथ नतीजों की तुलना करना चाहते थे.

लेकिन हम पूरे दशक के विश्लेषण में संतुलन बनाए रखने के लिए अमरीकी सरकार की तुलना में एक सुसंगत और सांस्थानिक स्रोत की पहचान नहीं कर सके.

इसलिए एक सार्थक तस्वीर पेश करने के क्रम में हमने अरब मीडिया के जानकार डॉक्टर जाहेरा हर्ब से बात की.

डॉक्टर जाहेरा सिटी यूनिवर्सिटी लंदन में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की वरिष्ठ प्राध्यापक हैं.

शोध में प्रमुख शब्दावलियों का किन संदर्भों में इस्तेमाल किया गया है, यह समझने के लिए महत्वपूर्ण वक्तव्यों, साल दर साल हुई अहम घटनाओं का ब्यौरा भी दिया गया है.

भाषणों को चुनने का तरीका

हमने जनवरी 2003 से फरवरी 2013 के बीच जारी हुए 148 दस्तावेजों को खंगाला.

इन दस्तावेजों के लिए स्रोत के तौर पर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल से जुड़े व्हाइट हाउस के आर्काइव्स से लेकर बराक ओबामा प्रशासन की व्हाइट हाउस की मौजूदा वेबसाइट का इस्तेमाल किया गया है.

इराक़ पर जारी किए बयान या भाषण के पूरे हिस्सों का यथासंभव इस्तेमाल किया गया है.

इन दस्तावेजों में उनके आकार और प्रकृति को लेकर कई तरह की विविधताएं हैं.

मसलन इन दस्तावेजों में राष्ट्र के नाम संबोधन, कुछ संयुक्त राष्ट्र संघ में दिए गए भाषण या रेडियो पर प्रसारित होने वाले राष्ट्रपति के साप्ताहिक भाषण शामिल किए गए हैं.

यहां तक कि इराक में तैनात अमरीकी सैनिकों को अमरीकी राष्ट्रपति का संदेश भी लिया गया है.

हमारा इरादा था कि हर छह महीने की अवधि के लिए दस अलग-अलग भाषणों को चुना जाए. हालांकि संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता बड़ी संख्या में थी.

साल 2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के पदभार संभालने के बाद इराक में अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी का दौर खत्म होना शुरू हुआ और इराक़ पर बहुत ही कम बयान जारी किए गए.

इसलिए इस अवधि के दौरान हमने साक्षात्कारों और संवाददाता सम्मेलनों का इस्तेमाल किया. व्यापक मुद्दों से जुड़े इराक़ पर दिए गए बयानों के कुछ अंश भी लिए गए हैं.

दिसंबर 2011 में इराक़ से अमरीकी सैनिकों की वापसी का काम पूरा हो जाने का बाद वॉशिंगटन के एजेंडे में इराक़ ने अपनी वरीयता खो दी.

इसके बाद के वक्त में इराक़ से जुड़े दस्तावेज कम ही उपलब्ध थे. इसलिए साल 2012 और साल 2013 के पहले दो महीनों के आंकड़ें बेहद सीमित संख्या में उपलब्ध हैं.

वक्तव्यों का विश्लेषण?

दस्तावेजों को छह महीने की अवधि के समूहों में रखा गया और फिर एक सॉफ्टवेयर के जरिए इन शब्दों का विश्लेषण किया गया.

समूह विश्लेषण के लिए काम में आने वाले इस सॉफ्टवेयर को बीबीसी मॉनिटरिंग ने मुहैया कराया था.

बीबीसी के मध्य पूर्व मीडिया विश्लेषकों की मदद से नतीजों की व्याख्या की गई और 86 प्रमुख शब्दों की एक सूची भी तैयार की गई.

इनमें से कुछ एक जैसे मतलब वाले शब्द समूहों का प्रतिनिधित्व करते थे.

उदाहरण के लिए ‘महाविनाश के हथियार’ एक ऐसा प्रमुख शब्द समूह था जो ‘रासायनिक हथियार’, ‘नाभिकीय हथियार’, और ‘जैविक हथियार’ जैसे शब्दों को एक साथ बताता था.

ठीक इसी तरह ‘सम्मान के सीथ जीना’ शब्द समूह में ‘सिर उठाकर जीना’ और ‘ससम्मान जीना‘ का भाव भी शामिल है.

इसके बाद हमने इन सभी 86 शब्दों का कितनी बार इस्तेमाल हुआ, इसकी गणना की. साथ ही ये भी देखा गया कि किसी ख़ास वर्ष में विश्लेषण किए गए शब्दों में इनका कितना प्रतिशत था, इस आधार पर निष्कर्ष निकाला गया और फिर उन्हें एक क्रम दिया गया.

नतीजतन हमारे पास सभी शब्दों का हर साल के लिए एक तुलनात्मक ब्यौरा था. इसके बाद हमने प्रत्येक वर्ष के लिए प्रमुख 15 शब्दों को खास तवज्जो दी.

इस प्रक्रिया में प्राप्त हुए 51 शब्दों में हमने सबसे ज्यादा सार्थक शब्द चुने और इनकी संख्या को कम करके 41 पर लाया. साल 2012 और 2013 के लिए दस्तावेजों के नमूने बहुत ही कम थे. इसलिए उनके समूह विश्लेषण में कठिनाई पेश आई.

सावधानी से अध्ययन के बाद हमने इस अवधि के लिए दो ऐसी संकल्पनाएं चुनी जो बार-बार दोहराई गई थी. हमारी प्रस्तुति में शामिल किए गए शब्द 41 से बढ़कर 43 हो गए.

आप प्रमुख शब्दों की पड़ताल और उन्हें कितनी बार इस्तेमाल किया गया, इसे प्रतिशत के रूप में आप इस स्प्रे़डशीट से जान सकते हैं.