आरक्षणः अब निषाद समाज का आंदोलन

गोरखपुर, निषाद, आगजनी इमेज कॉपीरइट Kumar Harsh

राजस्थान के गूजरों के बाद आज उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के निषादों ने भी आरक्षण की मांग को लेकर रेल की पटरियों पर कब्ज़ा जमा लिया.

गोरखपुर से लगभग 30 किमी दूर संत कबीर से जुड़े हुए मगहर के पास रविवार सुबह राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद् के हजारों कार्यकर्ताओं ने लगभग 6 घंटे तक रेलवे ट्रैक पर कब्ज़ा जमाए रखा.

पुलिन ने हिंसक झड़प के बाद आंदोलनकारियों को वहां से हटा दिया मगर आसपास के इलाकों में तनाव जारी है.

'50 से ज़्यादा ट्रेनें बाधित'

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गोरखपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमिताभ यश ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "संत कबीर नगर में दो दिवसीय सम्मेलन था. वहां कुछ स्थानीय नेताओं ने इन लोगों को भड़का दिया और उन्होंने जाकर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया."

आईजी अमिताभ यश ने बताया, "आंदोलनकारियों के रेलवे ट्रैक जाम करने के बाद आरपीएफ़ और स्थानीय पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए. मजिस्ट्रेट ने इन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन यह नहीं माने. इनका कहना था कि हम 15 दिन तक ट्रैक जाम रखेंगे और अपनी मांगें मनवाकर ही उठेंगे."

आंदोलनकारियों के नेता डॉक्टर संजय निषाद का कहना है कि सरकार ने संविधान में व्यवस्था न होने के बावजूद गूजरों को तो आरक्षण दे दिया गया लेकिन एक साल से भी ज्यादा समय से शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे निषाद समुदाय की उपेक्षा की जा रही है.

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गोरखपुर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार रेलवे ट्रैक आठ घंटे तक बाधित रहा. इससे 50 से ज़्यादा ट्रेनों के 1.5 लाख यात्री परेशान हुए.

पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और हवाई फायरिंग कर उन्हें रेलवे ट्रैक से खदेड़ा तो आंदोलनकारियों के एक जत्थे ने गोरखपुर लखनऊ राजमार्ग पर जाम लगा दिया.

पुलिस ने बलप्रयोग और हवाई फायरिंग के बाद ट्रैक और सड़क पर से जाम ख़त्म करने में सफलता हासिल कर ली.

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पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि एक व्यक्ति की मौत की सूचना है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

पत्थरबाजी और संघर्ष में आंदोलनकारियों के साथ कई वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी घायल हुए. एक दर्जन से ज़्यादा गाड़ियों में आग लगा दी गई.

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