ईयू और ब्रिक्सिट: क्या है कहानी

  • 22 जून 2016
ब्रिटेन यूरोपीय संघ से निकल जाए या साथ रहे, इसपर यूरोप भर में और ख़ासकर ब्रिटेन में चर्चा गर्म है. बहस और विवादों के बीच जनमत संग्रह भी होने वाला है. आइए जानते हैं ब्रेक्सिट (ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से एक्ज़िट) का पूरा मामला क्या है.जनमत संग्रह क्यों कराया जा रहा है?

2015 आम चुनावों में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने वादा किया था कि अगर वो चुनाव जीतते हैं तो जनमत संग्रह कराएंगे.

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उनकी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद और यूके इंडिपेंडेंस पार्टी लगातार दबाव बना रही थी कि जब से ब्रिटेन ने 1975 में ईयू में रहने के पक्ष में वोट किया, ब्रिटेन की ईयू में कभी चली ही नहीं.

उन लोगों ने तर्क रखा कि तब से लेकर अब तक यूरोपीय संघ काफ़ी बदल गया है और ब्रिटेन के लोगों की ज़िन्दगियों पर उनका ज़्यादा नियंत्रण हो गया है.

कैमरन ने कहा, "अब समय आ गया है कि ब्रिटेन के लोगों की बात सुनी जाएं. समय आ गया ब्रिटेन की राजनीति में यूरोपीय सवाल पर निर्णय लिया जाए."

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यूरोपीय संघ क्या है?

यूरोपीय संघ, जिसे अक्सर ईयू कहा जाता है, 28 यूरोपीय देशों की आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी है.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ का निर्माण हुआ.

इसके पीछे सोच ये थी कि जो देश एक साथ व्यापार करेंगे वो एक दूसरे के खिलाफ़ युद्ध करने से बचेंगे.

तब से लेकर अब तक ये एक बाज़ार के तौर पर विकसित हुआ. इसके तहत इन देशों में सामान और लोगों की बेरोक टोक आवाजाही होने लगी मानों सभी सदस्य देश एक पूरा देश हों.

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इसकी अपनी मुद्रा है, यूरो, जो 19 सदस्य देश इस्तेमाल करते हैं. इसकी अपनी संसद भी है.

ये संघ अब कई क्षेत्रों में अपने नियम बनाते हैं, जिसमें पर्यावरण, परिवहन, उपभोक्ता अधिकार और मोबाइल फोन की कीमतें तक तय करते हैं.

जनमत संग्रह के सवाल क्या है?

"क्या ब्रिटेन को यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहना चाहिए या यूरोपीय संघ छोड़ देना चाहिए"

ब्रेक्सिट का क्या मतलब है?

ब्रेक्सिट शब्द का मतलब है कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ छोड़ेगा. इसमें ब्रिटेन और छोड़ेगा शब्द को मिलाकर एक शब्द बनाया गया है, ब्रिक्सिट.

बिल्कुल उसी तरह जैसे पहले ग्रीस के यूरोपीय संघ छोड़ने की बात उठी तो ग्रिक्सिट शब्द बना.

जो चाहते हैं ब्रिटेन, यूरोपीय संघ छोड़े?

ये लोग सोचते हैं कि यूरोपीय संघ ब्रिटेन को पीछे खींच रहा है. उनके मुताबिक ईयू व्यापार के लिए बहुत सारी शर्तें थोपता है और कई बिलियन पाउंड सालाना मेंबरशिप शुल्क वसूलता है लेकिन बदले में ज्यादा फायदा नहीं होता.

वो चाहते हैं कि ब्रिटेन पूरी तरह से दोबारा अपनी सीमाओं पर नियंत्रण पा लें और उनके देश में काम या रहने के लिए आने वाले लोगों की संख्या घटा दें.

ईयू सदस्यता का एक प्रमुख सिद्धांत है "मुक्त आवाजाही", जिसका मतलब है कि किसी दूसरे ईयू देश में जाने या रहने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नहीं पड़ती.

वो "सबसे करीबी संघ" के विचार का विरोध करते हैं. उन्हें लगता है कि ये "यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ यूरोप" बनाने की तरफ कदम है.

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कौन चाहता है ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहे?

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन चाहते हैं कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहे. उनके कैबिनेट के 16 सदस्य भी रहने के पक्ष में हैं.

कंजर्वेटिव पार्टी ने इस प्रचार में निष्पक्ष रहने की शपथ ली. लेबर पार्टी, एसएनपी, प्लाएड कमरी और लिबरल डेमोक्रेट्स सभी ईयू में रहने के पक्ष में हैं.

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अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी चाहते हैं कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ में ही रहे. ईयू देश जैसे फ्रांस और जर्मनी भी ऐसा ही चाहते हैं

पोल के मुताबिक ब्रिटेन की जनता की राय भी इस मुद्दे पर बराबर बंटी दिखती है.

ब्रिटेन को कितना समय लगेगा ईयू छोड़ने में?

ये सवाल कई लोगों ने पूछा था. छोड़ने के पक्ष में वोट आने के बाद कम से कम दो साल लगेंगे ईयू से बाहर निकलने में.

इस दौरान ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के संधियों और कानून का पालन करते रहना पड़ेगा.

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लेकिन किसी भी तरह के निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी हिस्सेदारी नहीं होगी क्योंकि उसने 27 देशों के संघ के साथ एक पहले ही 'विदड्रावल समझौता' किया है.

व्यवहार में ईयू से निकलने में उसे दो सालों से भी अधिक वक्त लग सकता है जो समझौते पर निर्भर करता है.

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