अक्षरदीप जलाएंगे अक्षरदूत

भारतीय महिलाएँ
Image caption बिहार महिला साक्षरता के मामले में सबसे पीछे है.

बिहार सरकार राज्य की 40 लाख निरक्षर महिलाओं को छह महीने में साक्षर बनाने की एक विशेष योजना रविवार से शुरू करने जा रही है.

अक्षर आँचल नाम की इस योजना पर 55 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. महिला साक्षरता के मामले में बिहार देश भर में सबसे पीछे चल रहा है.

इसी के मद्देनज़र नई योजना शुरु की जा रही है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस मिशन के अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार अपने संसाधनों के बूते यहाँ साक्षरता दर बढ़ा कर शैक्षणिक पिछड़ेपन के इस अंधेरे से बिहार को बाहर निकालेगी.

उनका कहना है कि इस राज्य में सिर्फ 33 प्रतिशत महिला साक्षरता होना एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

'अक्षर आँचल' कार्यक्रम के सिलसिले में हर जिले के 50 प्रशिक्षित मुख्य साधन-सेवी (की रिसोर्स पर्सन) नौ अगस्त से आठ सितंबर तक अपने -अपने जिले में 'अक्षरदूतों' को प्रशिक्षण देंगे.

अक्षरदूत

Image caption अभियान में स्कूली छात्राओं को भी शामिल किया जाएगा.

इन 'अक्षरदूतों' की तादाद दो लाख होगी जो गाँव-गाँव में घूम कर निरक्षर महिलाओं को अक्षर बोध कराने की मुख्य भूमिका निभाएंगे.

हर 'अक्षरदूत' को प्रोत्साहन राशि के रूप में एक हज़ार रुपए दिए जाएंगे. इनके अलावा संबंधित क्षेत्र के स्कूल शिक्षकों और नौवीं और दसवीं क्लास की छात्राओं को भी इस मुहिम से जोड़ा जाएगा.

हर साक्षरता केंद्र पर रेडियो और पठन सामग्रियों के ज़रिए कहानी -कविता शैली में पढाया जाएगा.

इस प्रकार छह महीने में 40 लाख निरक्षर महिलाओं को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

राज्य के मानव संसाधन विभाग में तैयार की गई इस योजना को ठीक से लागू कराने में मुख्यमंत्री स्वयं ख़ास दिलचस्पी ले रहे हैं.

लेकिन पूर्व घोषित ढेर सारी योजनाओं की बदहाली देख रहे बिहारवासियों को इस 'अक्षर आँचल' योजना की भी सफलता संदिग्ध लगती है.

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