आसान निशाना बन रही हैं ख़ास हस्तियाँ?

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IST 2029: बीबीसी इंडिया बोल का यह अंक यहीं समाप्त हुआ. नमस्कार.

IST 2028: उनका तर्क है कि अगर कोई खड़ा नहीं होता तो उसे कोसना नहीं चाहिए क्योंकि उनकी सुरक्षा का कोई वादा नहीं है.

IST 2027: महेश भट्ट का तर्क है कि जब लोग ऐसे मौक़े पर खड़े होकर बोलते हैं तो बहुत हिम्मत का काम करते हैं.

IST 2026: संदीप कहते हैं कि कलाकार लोकप्रियता हासिल करने के लिए बयानबाज़ी करते हैं.

IST 2025: महेश भट्ट कहते हैं कि फ़िल्म कलाकार भी तो देश का नागरिक है तो वो राजनीति की बात क्यों न करे.

IST 2024: सौरभ कुमार मिश्रा कहते हैं कि शाहरुख़ ख़ान को राजनीति में भाग नहीं लेना चाहिए.

IST 2022: महेश भट्ट कहते हैं कि फ़िल्म निर्माता अपनी फ़िल्म के पहले हफ़्ते में कमज़ोर होता है इसलिए वो माफ़ी माँग लेता है.

IST 2022: रुपा झा कहती हैं कि तस्मीमा नसरीन की किताब से लेकर डेनमार्क के कार्टून तक बहुत से मुद्दे हैं.

IST 2020: मोहम्मद शरीफ़, पाली, राजस्थान से कहते हैं कि शाहरुख़ की खेल भावना को नहीं समझा गया.

IST 2018: ऐश्वर्या कपूर श्रोताओं को अवगत करवा रहे हैं कि बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के पाठक क्या कह रहे हैं.

IST 2017: महेश भट्ट करते हैं कि लोकतंत्र की ख़ासियत यही है लोग अलग-अलग राय रखें लेकिन किसी को नुक़सान न पहुँचाएँ.

IST 2016: सोहन लाल अहीर, राजस्थान से कहते हैं कि नेताओं को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश से बचना चाहिए.

IST 2015: बहस जारी है, आप भी अपनी राय रखें.

IST 2014: भोपाल के एक श्रोता रोहित सिंह कहते हैं कि कुछ नेता अपनी लोकप्रियता बरकरार रहने के लिए ऐसा करते हैं.

IST 2012: आकांक्षा, जमुई. बिहार से कहती हैं कि शिवसेना जैसी पार्टियाँ सस्ती लोकप्रियता के लिए सेलिब्रिटी को निशाना बनाती हैं.

IST 2011: बॉलीवुड में तरह-तरह के लोग हैं इसलिए उनकी सोच अलग-अलग होती है. कुछ लोग बचकर रहना चाहते हैं.

IST 2010: महेश भट्ट कहते हैं कि बॉलीवुड में कुछ लोगों ने हमेशा अपनी आवाज़ उठाई है.

IST 2008: मोहम्मद मोहसिन, महबूब नगर से कहते हैं कि वे महेश भट्ट से सहमत हैं. वे नारायण दत्त तिवारी प्रकरण का उदाहरण दे रहे हैं.

IST 2007: महेश भट्ट कहते हैं कि सेलिब्रिटी अक्सर वह बात कह नहीं पाता जो वह महसूस करता है.

IST 2006: महेश भट्ट कह रहे हैं कि यह सेलिब्रिटी जर्नलिज़्म का ज़माना है. इसलिए सेलिब्रिटी निशाना बनते हैं.

IST 2005: कार्यक्रम में अब शामिल हैं फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट.

IST 2004: परविंद कुमार, इलाहाबाद से कहते हैं कि अपनी बात ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए हस्तियों का सहारा लिया जाता है.

IST 2002: कोशिश है कि इस कार्यक्रम में कुछ ख़ास मेहमान शामिल हों.

IST 2000: बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है. नमस्कार.

IST 1957: रूपा झा स्टूडियो में आ चुकी हैं. कार्यक्रम बस कुछ ही देर में.

IST 1952: क्या भारत में असहमति और विरोध जताने के लिए ख़ास हस्तियां आसान निशाना बन रही हैं? अपनी राय दीजिए.

IST 1929: कार्यक्रम में लाइव हिस्सा लें लाइव टेक्स्ट के ज़रिए या कॉल करें टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर.

IST 1926: इस बार का विषय है - क्या ख़ास हस्तियाँ बन रही हैं आसान निशाना?

IST 1920: बीबीसी इंडिया बोल की ओर से आप सभी का स्वागत. अब से कुछ देर में यानी 40 मिनट बाद हम होंगे आपसे रूबरू...लाइव.

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