कभी डिप्टी मेयर की सैलरी पांच हज़ार रुपये थी

  • शिवानी कोहोक
  • बीबीसी संवाददाता, लंदन
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लंदन के डिप्टी मेयर राजेश अग्रवाल से मुलाक़ात

लंदन के बिज़नेस संबंधी मामलों के डिप्टी मेयर के तौर पर हाल ही में भारतीय मूल के बिज़नेसमैन राजेश अग्रवाल को नियुक्त किया गया है.

39 वर्षीय राजेश अग्रवाल की विदेशी मुद्रा एक्सचेंज कंपनी का सालाना बिजनेस नौ करोड़ पाउंड से अधिक है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसों के ट्रांसफर की सेवा 'ज़ेंडपे' की शुरुआत करने वाले राजेश अग्रवाल को 'संडे टाइम्स' ने अपने सबसे धनी लोगों की सूची में रखा था.

उनकी कामयाबी के इस सफर के बारे में बीबीसी संवाददाता शिवानी कोहोक ने हाल ही में उनसे बातचीत की.

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राजेश अग्रवाल भारत में इंदौर के रहने वाले हैं.

राजेश की परवरिश इंदौर के एक साधारण परिवार में हुई है. उनकी मां एक स्कूल टीचर थी, पिताजी सरकारी नौकरी करते थे.

राजेश याद करते है, "एक छोटे से कमरे में हम पांच लोग रहते थे."

स्कूल में भी वह पढ़ाई मे साधारण रहे और कहते हैं, "गणित पर पकड़ उतनी मज़बूत नहीं थी लेकिन वाद-विवाद प्रतियोगिता, बिना किसी तैयारी के भाषण प्रतियोगिता, चित्रकला में काफी आगे रहा. गणित में बाद में सुधार हुआ. 22 साल की उम्र में पढ़ाई पूरी कर चंडीगढ़ में एक वेब डिज़ाइनिंग कंपनी में मेरी पहली नौकरी लगी."

'संडे टाइम्स' की सबसे धनी लोगों की सूची शामिल राजेश की पहली तनख़्वाह पांच हज़ार रुपये थी.

इसके बाद मुंबई में एक विदेशी एक्सचेंज कंपनी में काम करते वक्त 2001 में लंदन आने का अवसर मिला.

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लंदन के मेयर सादिक़ ख़ान के साथ राजेश अग्रवाल.

पश्चिमी देशों में आकर अपनी संस्कृति में फर्क पाने से धक्का लगता है. लेकिन राजेश कहते हैं, "मुझे 30 सितंबर 2001 की वो सुबह याद है जब लंदन में मेरा विमान उतरा था और उस वक्त मुझे बहुत अच्छा लगा था. लंदन की एक खासियत है कि वो सभी का स्वागत करता है. मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि मै अजनबी शहर में हूं. भाषा से फर्क पड़ता है, इतिहास से फर्क पड़ता है. यहां की कई जगहें हमने बॉलीवुड की फिल्मों में हज़ारों बार देखी हुई है."

ब्रिटेन की सोसाइटी पर आरोप लगता है कि यहां अब भी नस्लवाद है लेकिन राजेश ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "बड़ा शहर है. बड़े शहर में लोगों के अलग-अलग अनुभव होते हैं लेकिन मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगा. लदंन की चालीस फ़ीसदी आबादी ब्रिटेन के बाहर पैदा हुई है और यहां 230 भाषाएं बोली जाती है. ये तो शहर ही अप्रवासियों का है."

पैसे ट्रांस्फर का बिज़नेस शुरू करने का विचार राजेश को अपने अनुभव से आया.

वो कहते हैं, "मैं ख़ुद भारत पैसे भेजता था और पाया कि बैंक अच्छा एक्सचेंज रेट नहीं देते. फीस भी अधिक लेते हैं. मुझे ये अच्छा अवसर लगा इस सेवा को ऑनलाइन ले जाने का. एक छोटे से लैपटॉप से शुरू किया और बिज़नेस धीरे-धीरे बढ़ता ही गया."

बिज़नेस शुरू करने के लिए राजेश ने एक बैंक से कार लोन लिया क्योंकि कोई भी बैंक उन्हें बिज़नेस के लिए लोन देने के लिए तैयार नहीं था. 2005 में ये कंपनी एक लैपटॉप और एक कमरे के दफ्तर से शुरू हुई.

आज उनकी मुद्रा एक्सचेंज कंपनी का सालाना बिज़नेस नौ करोड़ पाउंड से अधिक का है.

भारतीय नागरिकों को ब्रिटेन में बराबरी के मौके मिलना कठिन माना जाता रहा है, लेकिन राजेश इस बात से सहमत नहीं.

वो कहते हैं कि आपकी शिक्षा, आपके लहज़े का जीवन में बहुत कम महत्व है. ख़ुद पर विश्वास और दृढ़ता से सफलता प्राप्त हो सकती है.

भारत मे युवाओं के लिए मौजूद अवसर को लेकर भी वो काफी आशावादी है. वो कहते हैं, "भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. काफी नई इंडस्ट्रीज़ जैसे टेलीकॉम और इंटरनेट में बहुत बढ़ोत्तरी हुई है.

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राजेश अग्रवाल कहते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है.

उनकी डिप्टी मेयर के तौर पर नियुक्ति से भारत को भी फ़ायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है.

लेकिन वो कहते हैं, "भारत और ब्रिटेन के व्यापारिक संबंध तो पहले से ही काफी मज़बूत रहे हैं."

भारत ब्रिटेन में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है और लंदन में दूसरे नंबर का निवेशक है.

ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार कंपनी, सबसे बड़ी चाय और स्टील की कंपनी के मालिक भी भारतीय ही हैं.

वो कहते हैं, "और अब भारत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. मैं अपनी तरफ से जितना हो सकेगा करूंगा."

राजेश ने भारतीय राजनीति से जुड़े किसी भी सवाल का उत्तर देने से इंकार कर दिया.

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भारत ब्रिटेन में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है और लंदन में दूसरे नंबर का निवेशक है.

यहां तक कि देश के प्रधान मंत्री के बारे में भी कोई टिप्पणी नहीं की. वह ख़ुद को राजनेता भी नहीं मानते.

उन्होंने कहा, "मैं राजनीति को समाज सेवा करने का माध्यम मानता हूं और सामाजिक बदलाव लाने का ज़रिया. गांधीजी जब यहां पढ़ते थे तो सामाजिक बदलाव के लिए वेजिटेरियन सोसायटी से जुड़े. साउथ अफ्रीका में वहां के समाजिक मुद्दों से जुड़े. तो जहां कहीं भी हम रहे अपने इर्द-गिर्द के माहौल को बेहतर बनाने की कोशिश करें."

राजेश के माता-पिता अभी भी इंदौर में रहते हैं और वो साल में तीन बार भारत आते हैं.

वो कहते हैं, "मैं भारत से काफी जुड़ा हुआ हूं और मेरे बच्चे लंदन में रह कर भी हिंदी में बात करते हैं. पंद्रह साल पहले भारत फोन करना काफी मंहगा था लेकिन आजकल तो मेरे माता पिता बच्चों के साथ व्हाट्सऐप और फेसटाइम पर लगातार बातचीत करते रहते हैं. और बीबीसी हिंदी से मैं लगातार भारत की ख़बरों के बारे में जानकारी रखता हूं. "

उनके सबसे पसंदीदा भारतीय कलाकार अमिताभ बच्चन हैं. लेकिन किसी एक पसंदीदा अभिनेत्री का नाम लेने से उन्होंने इंकार कर दिया.

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