'स्वतंत्रता के लिए भारत से मदद नहीं मांगेंगे'

  • 22 सितंबर 2016
हरबयार मरी
Image caption हरबयार मरी कहते हैं कि पहले अपनों के लिए आवाज उठानी चाहिए, जो कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं.

बलूच लिबरेशन आर्मी के अध्यक्ष हरबयार मरी का कहना है कि बलूचों के अनावश्यक रूप से भारत में शरण लेने का फ़ायदा जिहादी समूह उठा सकते हैं.

उनका कहना था, ''जिन बलूचों का जीवन ख़तरे में है, उन्हें जिस देश में शरण मिलती है, उन्हें वहां शरण ले लेनी चाहिए. लेकिन अगर बलूच अनावश्यक रूप से भारत में शरण लेंगे तो इसका आंदोलन पर ग़लत प्रभाव पड़ेगा.''

मरी ख़ुद भी लंदन में राजनीतिक शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, ''हमें पहले अपनों के लिए आवाज़ उठानी चाहिए जो कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं.''

इस निर्वासित राष्ट्रवादी नेता का साफ़ कहना था कहा कि आज की तारीख़ में उनका न तो भारत में शरण लेने का कोई इरादा है और न उन्होंने इस बारे में कोई फ़ैसला किया है.

मरी का यह भी कहना था कि वो स्वतंत्रता के लिए भारत से कभी मदद नहीं मांगेंगे.

उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रिटेन में शरण मिली हुई है, तो वह भारत क्यों जाएं?

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उनका कहना था कि अगर कभी ब्रिटेन में हालात मुश्किल हुए तो वो अपने सहयोगियों की सलाह से ही आगे का फ़ैसला करेंगे.

कुछ बलूच राष्ट्रवादी मानते हैं कि जिनेवा स्थित बलूच रिपब्लिकन पार्टी के निर्वासित नेता ब्रहमदाग़ बुगटी के भारत में राजनीतिक शरण मांगने के फ़ैसले का बलूचों के स्वतंत्रता आंदोलन पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

इससे पाकिस्तान के इन आरोपों को बल मिल सकता है कि बलूचिस्तान में स्वतंत्रता का कोई आंदोलन नहीं बल्कि भारत बलूचिस्तान में हस्तक्षेप कर रहा है?

इस सवाल के जवाब में मरी ने कहा, ''ब्रहमदाग़ बुगटी की अपनी सोच है. वो इस सवाल का जवाब ख़ुद देंगे. लेकिन मैं समझता हूँ कि बलूच नेताओं को आम बलूचों के बारे में पहले सोचना चाहिए जिनके जीवन को पाकिस्तान में ख़तरा है. और उन लोगों के बारे में भी जिनकी शरण मांगने के आवेदन यूरोप में ख़ारिज हो चुके हैं.''

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Image caption स्वतंत्रता दिवस पर लाल क़िले से दिए भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया.

बलूचिस्तान प्रांत में बलूच नेता ब्रहमदाग़ बुगटी, हरबयार मरी और करीमा बलोच के ख़िलाफ़ ग़द्दारी का मुक़दमा दर्ज किया गया है. ये सभी नेता विदेश में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं.

इस कार्रवाई का सीधा संबंध भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बलूचिस्तान पर दिए बयान पर इन नेताओं की प्रतिक्रिया से है.

ब्रहमदाग़ बुगटी हथियारबंद अलगाववादी संगठन बलोच रिपब्लिकन आर्मी, हरबयान मरी बलोच लिबरेशन आर्मी और करीमा बलोच, बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन के अध्यक्ष हैं.

ब्रहमदाग़ स्विट्ज़रलैंड, हरबयान मरी ब्रिटेन और करीमा बलोच ने कनाडा में राजनीतिक शरण ली हुई है.

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