ब्रिटेन में डॉक्टर, अफ़ग़ानिस्तान में इलाज

  • गेड क्लार्क/रूमियाना जहांगीर
  • बीबीसी न्यज़
डॉक्टर एरियन वहीद, उनकी पत्नी डवीना
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अफ़ग़ान शरणार्थी शिविर में डॉक्टर एरियन वहीद और उनकी पत्नी डवीना

पंद्रह साल के वहीद एरियन 1990 के दशक में जब अफ़ग़ानिस्तान से ब्रिटेन पंहुचे, उन्हें कहा गया कि वे शायद टैक्सी ड्राइवर बन जाएं.

लेकिन कुछ साल के बाद ही उन्होंने कैंब्रिज़ विश्वविद्यालय में डिग्री की पढ़ाई शुरू कर दी.

उन्होंने अब तो एक स्कीम भी शुरू कर दी है, जिसके तहत ब्रिटेन के डॉक्टर काबुल में रोगियों का इलाज स्काइप के ज़रिए करते हैं.

चेस्टर के अपने घर में बैठे डॉक्टर एरियन याद करते हैं कि उनके पिता ने अफ़ग़ानिस्तान की हिंसा से दूर लंदन में रहने वाले एक रिश्तेदार के पास उन्हें भेज दिया था.

उनसे कहा गया था, "आप थोड़ी सी अंग्रेज़ी सीखेंगे, फिर ड्राइवर बनेंगे और उसके बाद दुकानदार. बस, आप यही कुछ कर सकते हैं."

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वहीद एरियन के बचपन की तस्वीर

डॉक्टर बनने का उनका सपना बचपन के अनुभवों पर आधारित था. सोवियत समर्थित कम्युनिस्ट सरकार और मुजाहिदीन के नाम से जाने जाने वाले मुसलमान विद्रोहियों के बीच झड़पें होती रहती थीं.

डॉक्टर एरियन ने बीबीसी से कहा, "रॉकेट कहीं भी गिर सकता था. हम छोटे घरों, गलियारों और दूसरे कमरों में दौड़ते रहते थे ताकि रॉकेट से बच जाएं."

वे उन दिनों को याद करते हुए आगे कहते हैं, "रूसी सैनिक मुजाहिदीनों को खोजते हुए आते थे और मेरे पिता की तरह वैसे लोगों को जो सेना की नौकरी छोड़ आए थे और छिपे हुए थे, पकड़ लेते थे. वे उन्हें मार डालते थे."

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कैंब्रिज़ विश्वविद्यालयम में वहीद एरियन

एरियन के पिता ने सोचा कि ख़ैबर दर्रे से भाग कर पाकिस्तान जाना एक मात्र विकल्प है.

वे याद करते हैं, "जिस रास्ते से मुजाहिदीन आते थे, हमने उसी रास्ते को चुना. इसलिए यह एक ख़तरनाक रास्ता था."

वे लड़ाकू विमानों से बचने के लिए सिर्फ़ रात को सफ़र करते थे. फिर भी, सात दिन की यात्रा में उन पर तीन बार गोलाबारी की गई.

वे किसी तरह एक शरणार्थी शिविर तक पंहुच गए, जहां दस लोगों के उनके परिवार को एक कमरा मिल गया.

ख़ैर, साल 1989 में सोवियत सेना अफ़ग़ानिस्तान से लौट गई, उनका परिवार भी अपने घर लौट गया.

हिंसा से दूर बेहतर भविष्य के लिए उनके पिता ने उन्हें रिश्तेदारों के पास भेज दिया.

एरियन ने अंग्रेज़ी सीखी और कई छोटे मोटे काम किए. बाद में अपने अपने छोटे भाई को भी वे लंदन ले गए.

पर 'ए' लेवल में पांच विषयों में 'ए' हासिल करने के बाद उनका दाख़िला कैंब्रिज़ विश्वविद्यालय के मेडिसिन में हो गया.

वे कहते हैं, "मेरी महात्वाकांक्ष डॉक्टर बनने की हमेशा से थी. मेरी इच्छा पहले अपने परिवार और उसके बाद अफ़ग़ानिस्तान और लड़ाई के इलाक़ों में काम करने की थी, क्योंकि यहां के लोगों को अधिक मदद नहीं मिलती थी."

वे यह भी कहते हैं कि लोग अपने वतन के लोगों की मदद तो करना चाहते हैं, पर अफ़ग़ानिस्तान लौटने में ख़तरा है.

डॉक्टर एरियन रेडियोलॉजिस्ट हैं और लिवरपूल में पंजीकृत हैं. उन्होंने 'टेलीहील' नामक एक स्कीम शुरू की है.

इसके तहत ब्रिटेन के कुछ डॉक्टर स्वेच्छा से काबुल में ट्रॉमा, हादसा और मेडिकल इमर्जेंसी के दूसरे मामलों में रोगियों का इलाज स्काइप के ज़रिए करते हैं.

एरियन की सहकर्मी डॉक्टर सुनीता चावला कहती हैं, "हमें पता है कि जो सुविधाएं यहां हैं, वे अफ़ग़ानिस्तान के अस्पतालों में नहीं हैं. लिहाज़ा, हम जब सलाह देते हैं तो मरीज़ों की ज़रूरतों के साथ साथ काबुल में मौजूद सहूलियतों का भी ख़्याल रखते हैं."

तक़रीबन 50 डॉक्टरों ने सलाह देने की पेशकश की है. उन्होंने ऐसी ही एक स्कीम सीरिया में भी शुरू कर दी है.

टेलीहील की कामयाबी के बाद डॉक्टर एरियन रॉयल कॉलेज ऑफ़ इमर्जेंसी मेडिसिन, विश्व स्वास्थ्य संघ और मेडिसिन सांस फ्रांतियर जैसी स्वयंसेवी संगठनों में भाषण देने लगे हैं.

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डवीना और डॉक्टर वहीद एरियन

उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने पिछले साल सम्मानित किया.

एरियन की पत्नी डवीना ने अपने मॉडलिंग कैरियर को फ़िलहाल रोक दिया है. वे स्कीम की मदद करने के लिए अफ़ग़ानिस्तान जाती रहती हैं. ये लोग शरणार्थी परिवारों को कपड़े वगरैह भी देते हैं.

डॉक्टर एरियन इथियोपिया, इराक़ और सीरिया में भी ऐसे ही स्कीम शुरू करना चाहती हैं.

वे कहते हैं, "यदि मैं यह सब न करूं तो मुझ पर खर्च किए गए समय और पैसे की बर्बादी होगी."

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