'मैं भारत में शादी करूं या पाकिस्तान में!'

अकबर शेरखान और हेबा सलीम
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फ़ेसबुक लाइव के दौरान अकबर शेरख़ान और हेबा सलीम

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जब तनाव बढ़ता है तो उसका असर उन लाखों संबंधों पर भी होता है जो या तो बन चुके हैं या बनने की राह में हैं - पुरानी रिश्तेदारी, जोड़े जिनकी शादी हो चुकी है और उनपर जिनकी शादियां होनेवाली हैं.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या दोनों मुल्कों को बिल्कुल अलग कर पाना मुमकिन है? या इन रिश्तों पर क्या असर होता है इस तरह के तनाव का जो दोनों मुल्कों के बीच आज बनते दिख रहे हैं.

बीबीसी उर्दू की आलिया नाज़की ने मुलाक़ात की एक ऐसे जोड़े से जिनकी जल्द ही शादी होनेवाली है और ज़ाहिर है जैसे हालात पैदा हो रहे हैं उससे ये जोड़ा परेशान है, ख़ासतौर पर होनेवाली दुल्हन. और उनके कई सवाल हैं - एक ये भी कि वो शादी भारत में करें या पाकिस्तान में.

हिंदुस्तान के शहर भोपाल के अकबर शेरख़ान और पाकिस्तान के कराची की हेबा सलीम तालीम के दौरान मिले, मुलाक़ात मोहब्बत में बदली और अब दोनों की शादी होनेवाली है.

अकबर पेशे से वकील हैं और हेबा मेडिसिन की पढ़ाई कर रही हैं.

दोनों ही मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के नेताओं को, सेना के जनरलों को बड़ा नज़रिया रखते हुए फ़ैसले लेने चाहिए और ये समझना चाहिए कि बातचीत से ही किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है.

हेबा कहती है कि दोनों परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे.

अकबर जब पढ़ाई के सिलसिले में पाकिस्तान के गए तो दोनों की मुलाक़ात हुई. बाद में वो भारत लौट आए. दो साल पहले हेबा एक शादी में शरीक होने भोपाल आईं तो दोनों में नज़दीकी बढ़ी.

अब जबकि दोनों देशों के रिश्तों के बीच खाई लगातार चौड़ी हो रही है, इन्हें कितना फर्क पड़ता है? अकबर के मुताबिक़ 'बहुत फर्क पड़ता है.'

वो कहते हैं, "रिश्ते बनने में सालों लगते हैं. जब आप एक नए ख़ानदान में रिश्ता करना चाह रहे हैं तो उस वक्त भारत पाकिस्तान के बीच जंग जैसी बातें बहुत गहरे तक असर डालती हैं. बहुत सी चीज़ें राजनीति से प्रेरित होती हैं लेकिन इससे आम लोगों की ज़िंदगी पर असर डालती है."

अकबर सोचते हैं कि नेताओं और जनरलों को समझना होगा कि दोनों देशों में ऐसे लोग भी रहते हैं.

वहीं हेबा का सवाल है कि जब भारत-पाकिस्तान पूरी दुनिया से रिश्ते रख सकते हैं तो आपसी संबंध क्यों बेहतर नहीं कर सकते?

वो कहती हैं, "मेरी शादी होने वाली है. मैं कहां शादी करूं, भारत में, या पाकिस्तान में? अगर मैं भारत में करूं, तो क्या मेरा परिवार आ सकेगा? आज ये कहा गया है कि सीमा को सील किया जाएगा दिसंबर में, तो मैं कहां जाऊंगी?"

हेबा कहती हैं कि भारत और पाकिस्तान में जब बहुत एक सा है तो फिर 'हम एक-दूसरे से क्यों लड़ रहे हैं'?

वो ऐसे बहुत से लोगों को जानती हैं जिनके रिश्तेदार दोनों तरफ हैं और उन्हें ऐसे हालात के बीच बड़ी दिक्क़त होती है.

उनका कहना है कि भारत और पाकिस्तान को पश्चिमी देशों की तरफ़ देखना चाहिए, और, ये समझना चाहिए कि बातचीत से हर समस्या का समाधान मुमकिन है.

हेबा कहती हैं, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पास अंतहीन चीज़ें हैं करने के लिए. इतनी समस्याएं हैं. हम क्यों भारत से लड़ने पर तुले हैं? आप पश्चिमी दुनिया में देखो कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत से होता है. हमारे दोनों मुल्क अभी तक ये नहीं समझ पा रहे हैं."

क्या उनके बीच सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर बातचीत होती है?

अकबर के मुताबिक़, "मुद्दे की बात ये है कि जब कोई चरमपंथी हमले होते हैं. मासूमों की जान जाती है तो आपको एक इंसान के तौर पर उसकी निंदा करनी होती है. फिर ये अनुमान लगाया जाता है कि किसने करवाया? चरमपंथी संगठन थे, क्या वो पाकिस्तान से जुड़े थे? अब हम जैसे जो लोग हैं वो मीडिया पर ही निर्भर करते हैं. जबकि हमारा फोकस होना चाहिए समाधान पर."

भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में क्रिकेट को लेकर दीवानगी दिखती है. ये दीवानगी अकबर और हेबा पर भी हावी है. दोनों अपनी-अपनी टीमों का समर्थन भी करते हैं लेकिन कभी इसे लेकर लड़ते नहीं.

अकबर कहते हैं, "आप चाहते हो कि पाकिस्तान जीते. हम चाहते हैं कि भारत जीते. ऐसे ही तो मोहब्बत बढ़ती है."

हेबा भी मानती हैं कि खेल को जंग नहीं बनना चाहिए और उनके मुताबिक़ दोनों देशों के रिश्तों को लेकर भी ऐसी राय तमाम लोग रखते हैं. इधर भी और उधर भी.

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