कौन होगा पाकिस्तान का नया सेना प्रमुख?

  • अब्दुल्ला फ़ारूक़ी
  • बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
राहील शरीफ़

पाकिस्तानी सेना के मौजूदा प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ 28 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. उनके उत्तराधिकार के लिए कुछ नामों की चर्चा है जो इस समय पाकिस्तानी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पदों पर हैं.

वरिष्ठता की सूची के मुताबिक़ पहला नाम लेफ्टिनेंट जनरल ज़ुबैर महमूद हयात का है जो फ़िलहाल सैन्य मुख्यालय में चीफ ऑफ़ जनरल स्टाफ़ के पद पर हैं.

यह सेना में बहुत भरोसे का पद माना जाता है लेकिन इससे पहले वो सामरिक योजनाओं वाले डिवीज़न महानिदेशक भी रह चुके हैं. इस पद की मुख्य ज़िम्मेदारी देश के परमाणु हथियारों की सुरक्षा करना है.

इसके बाद दूसरा नाम लेफ्टिनेंट जनरल अशफ़ाक़ नदीम अहमद का है जो मुल्तान के कोर कमांडर हैं और इससे पहले चीफ़ ऑफ़ जनरल स्टाफ़ रह चुके हैं. उन्होंने स्वात और उत्तरी वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की है.

लेफ्टिनेंट जनरल अशफ़ाक नदीम अहमद के बारे में कहा जाता है कि सेना प्रमुख बनने की सारी क्षमता उनके पास है.

लेफ्टिनेंट जनरल जावेद इक़बाल रम्दे फिलहाल बहावलपुर के कोर कमांडर हैं, लेकिन इससे पहले स्वात ऑपरेशन के दौरान जीओसी रह चुके हैं.

वो दो बार विदेशों में भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभा चुके हैं, जिसमें वाशिंगटन में बतौर सैन्य अटैची और अमरीका में तैनाती शामिल है.

यही वजह है कि अमरीका में कुछ सिनेटर ऐसे भी हैं जिनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल जावेद इक़बाल रम्दे ने काम किया है. इसलिए कुछ विश्लेषकों का कहना है कि सेना प्रमुख बनने में उनके पक्ष और उनके ख़िलाफ़ भी यह बात जा सकती है.

अंत में लेफ्टिनेंट जनरल क़मर जावेद बाजवा हैं जो आजकल जी मुख्यालय में इंस्पेक्टर जनरल ट्रेनिंग एंड इवैलुएशन हैं. इससे पहले 2014 में धरने के दौरान वो रावलपिंडी के कोर कमांडर रह चुके हैं.

लेफ्टिनेंट जनरल क़मर जावेद बाजवा ने हाल ही में उस प्रशिक्षण अभ्यास की ख़ुद निगरानी की है जो नियंत्रण रेखा पर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की वजह से की जा रही हैं. इन अभ्यासों का निरीक्षण मौजूदा सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ़ ने ख़ुद किया था.

यह भी ज़रूरी नहीं पाकिस्तानी सेना का नया प्रमुख उन्हीं में से कोई हो. नए सेना प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया भी बहुत स्पष्ट नहीं है. इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय रक्षा मंत्रालय के माध्यम से सैन्य मुख्यालय से सबसे वरिष्ठ जनरलों के नामों की सूची माँगती है, जो सेना प्रमुख बनने के लायक हों.

इसके बाद सैन्य और नागरिक ख़ुफिया एजेंसियों से इन नामों की साख के बारे में रिपोर्ट तलब की जाती है. यह प्रधानमंत्री पर निर्भर करता है कि वह रिटायर होने वाले सेना प्रमुख से उनके उत्तराधिकारी के बारे में राय मांगें.

यह भी ज़रूरी नहीं है कि सुझाए गए नामों में से किसी एक को नया सेनाध्यक्ष बनाया जाए. प्रधानमंत्री इस मामले में अपने मंत्रियों और सलाहकारों से भी मशवरा कर सकते हैं और अंत में इसका ऐलान ख़ुद प्रधानमंत्री को ही करना होता है.

नए सेना प्रमुख को किन समस्याओं का सामना होगा?

सत्ताधारी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के सांसद लेफ्टिनेंट जनरल (रियाटर) मलिक अब्दुल कयूम कहते हैं "मुझे लगता वरिष्ठता के मामले में शुरू के दो नामों में से पहले को आर्मी चीफ़ और दूसरे को संयुक्त चीफ ऑफ़ स्टाफ कमेटी का अध्यक्ष बना देना चाहिए, लेकिन यह प्रधानमंत्री का अधिकार है कि वो किसे कौन सा दें."

मलिक अब्दुल क़यूम की राय में नए सेना प्रमुख के सामने चुनौती होगी कि जो दुश्मन दरारें डाल रहे हैं उन दुश्मनों का सफ़ाया करना और फिर इन दरारों को ख़त्म करना.

उनके मुताबिक़ "नए चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ को भारत की गीदड़ भभकी से निपटना होगा."

सैन्य मामलों की विश्लेषक और लेखिका आयशा सिद्दीक़ा कहती हैं कि सेना के अंदर मौजूद कट्टर लोग समझते हैं कि कोई ताक़तवर सेना प्रमुख आना चाहिए.

आयशा सिद्दीक़ा कहती हैं, "ऐसे लोग लेफ्टिनेंट जनरल अशफ़ाक़ नदीम का समर्थन करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की चली तो लेफ्टिनेंट जनरल रम्दे और लेफ्टिनेंट जनरल बाजवा में से कोई एक सेना प्रमुख बन सकते हैं".

आयशा सिद्दीक़ा का कहना है कि नए सेनाध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनरल राहील शरीफ़ की छवि होगी, जो सेना और जनता के बीच एक मसीहा के रूप में जाने जाते हैं.

ग़ौरतलब है कि नए सेना प्रमुख की नियुक्ति का अधिकार तो प्रधानमंत्री के पास है, लेकिन सेना को पाकिस्तान में प्रभावशाली संस्था माना जाता है. उसकी राय को नज़रअंदाज़ करना एक प्रजातांत्रिक सरकार के लिए आसान नहीं है.

इसलिए इस बार भी अतीत की तरह सभी निगाहें नए सेना प्रमुख की नियुक्ति पर लगी हैं.

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