'पाकिस्तानी सिनेमाघरों को भारतीय फिल्मों की ज़रूरत'

  • 12 अक्तूबर 2016
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पाकिस्तान के मशहूर अभिनेता और निर्माता हुमायूं सईद ने बॉलीवुड की फ़िल्मों पर पाबंदी का विरोध करते हुए कहा है कि पाकिस्तान को संयम दिखाना चाहिए और उसे भारत के नक्शेकदम पर नहीं चलना चाहिए.

हुमायूं सईद का कहना है कि भारत ने पाकिस्तानी अदाकारों को काम करने से रोक कर ग़लत किया है और हम इसे ग़लत समझते हैं इसलिए हमें ख़ुद ही ऐसा नहीं करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हम सभी बचपन से गैर क़ानूनी तरीके से भारतीय फ़िल्में देख रहे हैं और अगर वो क़ानूनी तौर पर पाकिस्तान के सिनेमाघरों में दिखाई जा रही हैं तो क्या ग़लत है?

हुमायूं सईद ने कहा कि भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन की इजाज़त के बाद ही पाकिस्तान में सिनेमाघर बनने शुरू हुए और फिर फ़िल्में बननी शुरू हुईं.

उनका कहना है कि 'इस समय पाकिस्तानी सिनेमाघरों को भारतीय फ़िल्मों की ज़रूरत है और पाकिस्तानी फ़िल्म उद्योग अभी इस क़ाबिल नहीं है कि वह अकेले पाकिस्तानी सिनेमाघरों को चला सके.'

सईद कहते हैं, "सिनेमाघरों को हर सप्ताह एक फ़िल्म चाहिए होती है और पाकिस्तानी फिल्म उद्योग साल भर में कुछ ही फिल्में बनाता है".

सईद का कहना है कि उन्होंने पाबंदी का कभी समर्थन नहीं किया सिर्फ़ इतना कहा है कि स्थानीय फ़िल्म उद्योग को कुछ सहयोग की ज़रूरत है, इसलिए केवल बकरीद के मौक़े पर विदेशी फिल्मों को रोककर, स्थानीय फ़िल्में लगाई जाएं तो बेहतर होगा. मगर पूरे साल भारतीय फ़िल्मों पर पाबंदी नहीं लगनी चाहिए.

गौरतलब है कि पाकिस्तान में लाहौर हाई कोर्ट ने देश के सिनेमाघरों में भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने पर पाकिस्तान सरकार से जवाब तलब किया है.

सोमवार को हाई कोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई पर भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन के बारे में विस्तार से अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया था.

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