क्या अमरीकी हिंदुओं के वोट ट्रंप को मिलेंगे?

  • ब्रजेश उपाध्याय
  • बीबीसी संवाददाता अमरीका के न्यू जर्सी से

पिछले हफ़्ते देर शाम जब डोनल्ड ट्रंप न्यू जर्सी की एक रैली में पहुंचे तो वहां भीड़ का चेहरा उनकी दूसरी चुनावी रैलियों से बिल्कुल अलग था.

कहां तो रिपब्लिकन उम्मीदवार की रैलियों में ज़्यादातर गोरे अमरीकी दिखते हैं लेकिन वहां ज़्यादातर चेहरे भारतीय मूल के थे. कई ऐसे थे जो अमरीकी नागरिक भी नहीं थे और कुछ तो बस सैर-सपाटे के लिए भारत से अमरीका आए हुए थे. गोरे चेहरे उंगलियों पर गिने जा सकते थे.

ज़ाहिर था ट्रंप की आम रैलियों में जिन जुमलों पर तालियां बजती हैं उनसे कहीं ज़्यादा तालियां वहां तब बजीं जब ट्रंप ने कहा: "मैं हिंदू का बहुत बड़ा फ़ैन हूं और भारत का भी बहुत-बहुत बड़ा फ़ैन हूं."

उन्होंने भारत को अपना सबसे अच्छा दोस्त करार दिया और कहा, "इससे ज़्यादा अहम हमारे लिए कोई और रिश्ता नहीं होगा."

वहां जमा लोगों में से कईयों को ये भी नहीं पता था कि वहां ट्रंप आने वाले हैं. ज़्यादातर तो प्रभुदेवा और मलाइका ख़ान के जलवे देखने जुटे थे, कुछ को बताया गया था कि भारत के मशहूर गरबा कलाकार अतुल पुरोहित वहां आ रहे हैं. कुछ बुज़ुर्गों को तो ये भी बताया गया था कि वहां रामायण के सुंदर-कांड का पाठ होगा और इसलिए नवरात्रों के मौसम में वो वहां पहुंचे थे.

इस हफ़्ते में एक के बाद एक महिलाएं ट्रंप के ख़िलाफ़ कभी ज़बरदस्ती चूमने का, दबोचने का, अशलील हरकतें करने का आरोप सामने ला रही थीं. हालाँकि ट्रंप ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए ख़ारिज किया था.

जब ट्रंप उस आग पर काबू करने में जुटे हुए थे, उस हफ़्ते वो इस तरह की रैली में आकर क्या हासिल कर पाए?

कार्यक्रम के आयोजक और रिपब्लिकन हिंदू कोलिशन (गठबंधन) की नींव रखनेवाले भारतीय मूल के अमरीकी उद्दोगपति शलभ कुमार का कहना था कि उस शाम एक बहुत बड़ी तब्दीली आ गई.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने दावा किया, "इस इलाके के 70 प्रतिशत हिंदू डेमोक्रैट्स को वोट देते रहे हैं और तीस प्रतिशत रिपब्लिकन्स को. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ट्रंप को सुनने के बाद अब 70 प्रतिशति रिपबलिकन पार्टी की तरफ़ झुक गए हैं."

ट्रंप के चुनाव अभियान में सबसे ज़्यादा चंदा देनेवालों में गिने जानेवाले शलभ कुमार का कहना है, "अमरीकी हिंदूओं ने इस देश की नीतियां तय करने वाले टेबल पर अपनी जगह बनाने की तरफ़ पहला कदम उठा लिया है."

वो कहते हैं कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति चुन लिए जाते हैं तो व्हाइट हाउस में हिंदुओं और भारत का एक बहुत बड़ा दोस्त प्रवेश करेगा.

वो कहते हैं कि हिंदू वोटरों की बदौलत कुछ कांटे की टक्कर वाले राज्यों में ट्रंप की जीत सुनिश्चित की जा सकती है.

आम तौर पर 70 प्रतिशत हिंदू-अमरीकी डेमोक्रैट्स को वोट देते रहे हैं. पहली पीढ़ी के कुछ लोगों में रिपब्लिकंस की तरफ़ झुकाव ज़रूर है. लेकिन जो यहां पैदा हुए या पले-बढ़े उनमें से ज़्यादातर डेमोक्रैट्स के साथ नज़र आते हैं.

मुसलमानों और इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ अपने बयानों की वजह से ट्रंप अमरीका और भारत में भी कई हिंदू गुटों में लोकप्रिय हुए हैं. कई लोगों की ये भी धारणा है कि वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सख़्त कदम उठाएंगे.

ट्रंप के लिए हिंदुओं का समर्थन जुटाने में लगे भारतीय मूल के टेलीकॉम इंजीनियर सत्या दोसापति का कहना है, "इस्लाम के ख़िलाफ़ किसी को तो खड़ा होने की ज़रूरत थी और ट्रंप ने वो किया है."

वो कहते हैं, " मैं मुसलमान विरोधी नहीं हूं. लेकिन एक बड़ी समस्या है कि इस्लामी चरमपंथ की वजह से जो साधन अच्छे कामों में लगाए जा सकते थे वो आतंकवाद से लड़ने में इस्तेमाल किए जा रहे हैं."

उनकी नज़रों में हिलेरी क्लिंटन इस्लाम और पाकिस्तान की हिमायती हैं और जब हिंदू-अमरीकियों को इस बात का एहसास हो जाएगा तो वो ट्रंप के लिए वोट करेंगे.

लेकिन ज़मीनी स्थिति देखकर फ़िलहाल ऐसा लगता नहीं है कि ट्रंप के हक़ में हिंदू वोटरों का ध्रुवीकरण हो रहा हो.

प्रदीप कोठारी न्यू जर्सी में ही हिंदू समुदाय के साथ काम करते हैं और उनकी समस्याओं पर आवाज़ उठाते रहते हैं. उनका कहना है कि ट्रंप की नीतियों का सबसे बड़ा नुक़सान अगर किसी को होगा तो वो भारत से आनेवाले लोगों का.

ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा, जिसके तहत हज़ारों भारतीय अमरीका में नौकरी करने आते हैं, उसका विरोध किया है और साथ ही उन लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की बात की है जो वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद भी यहां रह गए हैं.

पिछले साल प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीका में क़रीब चार लाख भारतीय ग़ैर-क़ानूनी तरीके से रह रहे हैं. उनमें से ज़्यादातर ऐसे हैं जो वीज़ा की अवधि खत्म होने के बावजूद यहीं रह गए हैं.

ट्रंप के मुसलमान विरोधी बयानों की वजह से हिंदुओं का समर्थन मिलने के मुद्दे पर कोठारी का कहना है, "जो इंसान यहां के एक अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बना रहा है, वो कल दूसरे की तरफ़ आएगा. हम इस बात को अच्छी तरह समझते हैं."

कई मंदिरों में जुटे हिंदुओं और दूसरे ऐसे इलाकों में जहां हिंदुओं की खासी तादाद है, वहां भी बीबीसी को इसी तरह के बयान सुनने को मिले.

शिकागो के डेवोन ऐवन्यू के लिटल इंडिया कहलाने वाले इलाके में हिंदू धार्मिक किताबों और देवी-देवताओं की मूर्तियों की दुकान चलाने वाले महेश शर्मा कहते हैं कि उन्हें तो इस बार का चुनाव बिल्कुल एकतरफ़ा लग रहा है.

वो कहते हैं, " मुझे तो यहां सभी हिलेरी के ही समर्थक दिखे हैं. आपको कोई ट्रंप को वोट देने वाला हिंदू मिले तो मुझे भी बताइएगा."

लेकिन शलभ कुमार की मानें तो ये हवा अगले दो हफ़्तों में बदलने वाली है.

वो कहते हैं, "आप शायद सही लोगों से बात नहीं कर रहे हैं. और ये भी साफ़ कर दूं कि हज़ारों ऐसे हैं जो खुलकर कह नहीं रहे लेकिन वोट ट्रंप को देने जा रहे हैं."