'मोदी पाक का नाम शामिल करने में नाकाम'

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वो बयान छाया रहा जो उन्होंने गोवा में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में दिया था.

ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बग़ैर कहा था कि दुनिया को सबसे बड़ा ख़तरा चरमपंथ से है और अफ़सोस की बात ये है कि इसको जन्मदेने वाला हमारा पड़ोसी देश है.

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इस पर नवा-ए-वक़्त ने विदेश मामलों में प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के सलाहकार सरताज अज़ीज़ के बयान का हवाला देते हुए लिखा है कि मोदी ब्रिक्स और बिम्सटेक के साथियों को गुमराह कर रहे हैं. सरताज अज़ीज़ ने कहा कि पाकिस्तान ख़ुद भारतीय हस्तक्षेप और विघटनकारी कार्रवाइयों का शिकार है.

अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान चरमपंथ की भरपूर निंदा करने में ब्रिक्स और बिम्सटेक देशों के साथ है और वो पाकिस्तान की धरती पर भारत से होने वाले प्रायोजित चरमपंथ से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है.

जंग लिखता है, ''ब्रिक्स सम्मेलन में आतंकवाद सबसे बड़ा ख़तरा क़रार, मोदी पाकिस्तान का नाम शामिल करने में नाकाम.''

अख़बार लिखता है कि ब्रिक्स संयुक्त बयान में भारत की कोशिश थी कि उड़ी हमले और पाकिस्तान की निंदा की जाए लेकिन चीन और रूस के विरोध के कारण मोदी पाकिस्तान का नाम शामिल कराने में नाकाम रहे.

इसके अलावा पनामालीक्स से जुड़ी ख़बरें भी पूरे हफ़्ते सुर्खियां बटोरती रहीं.

पनामा की एक मशहूर लॉ फ़र्म की ख़ुफ़िया जानकारी इसी साल अप्रैल में लीक हो गई थी जिनमें दुनिया के कई बड़े नेताओं की जमा की गई दौलत का ज़िक्र था. इन लोगों में नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार के लोगों का भी नाम था. तभी से ये मामला सरकार और विरोधी पार्टियों के बीच तनाव की वजह बना हुआ है. अब पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने एक नवंबर को इस बारे में सुनवाई करने के आदेश दिए हैं और नवाज़ शरीफ़ समेत इससे जुड़े सभी लोगों को नोटिस जारी किया है.

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रोज़नामा ख़बरें लिखता है कि नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुझे नोटिस भेजा है, तलब नहीं किया है.

रोज़नामा एक्सप्रेस ने इसी मामले में नवाज़ शरीफ़ के बयान को सुर्ख़ी बनाते हुए लिखा है, 'भावुक हुए नवाज़ शरीफ़, कहा सत्ता आती-जाती रहने वाली चीज़ है.'

रोज़नामा दुनिया ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो के बयान को सुर्ख़ी बनाते हुए लिखा है कि "मियां साहब आपकी वजह से पाकिस्तान कमज़ोर हो रहा है."

भारत से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो ट्रिपल तलाक़, उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह यादव परिवार की अंदरूनी कलह और गोवा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान सुर्खियों में रहा.

रोज़ाना जदीद ख़बर ने केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू के बयान को सुर्ख़ी लगाते हुए लिखा, ''ट्रिपल तलाक़ को ख़त्म करने का ये सही समय''

केंद्रीय मंत्री ने हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एक साथ तीन तलाक़ की प्रथा संविधान के विरुद्ध है.

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यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर काम पारदर्शी तरीक़े से और संसद को विश्वास में लेकर करेगी. उन्होंने किसी नाम विशेष का ज़िक्र किए बग़ैर कहा कि कुछ लोग झूठा प्रोपगैंडा फैला रहे हैं कि सरकार पिछले दरवाज़े से यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू कराने की कोशिश कर रही है.

हिंदुस्तान एक्सप्रेस ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के उस बयान को सुर्ख़ी बनाई है जिसमें उन्होंने कहा था कि मासूम नागरिकों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार सुरक्षाकर्मियों को बख़्शा नहीं जाएगा.

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रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा ने सुर्ख़ी लगाई है, ''गोरक्षकों पर लगाम लगाने का मामला, सुप्रीम कोर्ट का छह राज्यों से जवाब तलब''

अख़बार लिखता है कि गौरक्षकों पर लगाम लगाने के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और छह राज्यों को नोटिस जारी कर सात नवंबर तक जवाब देने को कहा है.

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