फ़र्ज़ी कॉल सेंटर से जुड़े 20 लोग गिरफ़्तार

अस्टिेंट अटार्नी जनरल लैसेली कॉडवेल

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भारत में फ़र्ज़ी कॉल सेंटर चलाने वाले इंटरनेशनल रैकेट से जुड़े 61 लोगों पर अमरीका की एक अदालत में आरोप पत्र दाख़िल किए गए हैं.

अंतरराष्ट्रीय ठगी के इस मामले में अभियुक्त बनाए गए 61 लोगों में अमरीका और अन्य देशों के नागरिकों को शामिल किया गया है.

इसमें पांच कॉल सेंटर समूहों को भी अभियुक्त बनाया गया है. अमरीकी सरकार के अनुसार इस घोटाले में कम से कम 15000 लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया है.

अमरीका में असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल लैसेली कॉडवेल के अनुसार अधिकारियों ने आठ राज्यों में नौ वारंट जारी किए हैं और 20 लोगों को गिरफ़्तार भी किया है.

भारत में मुंबई के पास ठाणे में पुलिस ने चार अक्तूबर को बहुत बड़े पैमाने पर नौ कॉल सेंटरों पर छापे मारे गए और 70 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

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पुलिस ने बताया कि सैकड़ों करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है और इस ठगी के शिकार अमरीकी नागरिक हुए हैं.

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मीरा रोड और अहमदाबाद में चल रहे इन कॉल सेंटरों से अमरीका फ़ोन किया जाता था और वहां के नागरिकों से कहा जाता कि यह कॉल अमरीकी टैक्स विभाग आईआरएस यानी इंटरनल रेवेन्यू सर्विस की ओर से है.

भारत में कॉल सेंटर्स के पास अमरीकी नंबर लेने की सुविधा है या फिर ऐसे सॉफ़्टवेयर हैं जो कॉलर आईडी पर अमरीकी नंबर दिखाते हैं.

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अमरीकी नागरिकों को उनकी टैक्स गड़बड़ियों का हवाला देकर डराया जाता था, कॉल सेंटर को ऐसे लोगों के बारे में जानकारी कुछ अमरीकी एजेंट दिया करते थे.

कॉल सेंटर से फ़ोन करने वाले ये नकली आईआरएस अधिकारी, अमरीकी नागरिकों को उनके टैक्स फ़र्म की गलतियां, पुरानी छिपाई हुई आय के बारे में बताते और फिर जेल और भारी जुर्माने की धमकी देते थे.

घबराकर फ़ोन पर बात करने वाला व्यक्ति अपनी ग़लती मान लेता और फिर कार्रवाई रोकने के बदले में मोटी रक़म देने को तैयार हो जाता था.

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हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले का सरगना एक 23 साल के लड़के को माना जा रहा है जिसका नाम सागर ठक्कर है और कॉल सेंटर में काम करने वाले उसके दोस्त, उसे सैगी कहकर बुलाते थे.

सागर ठक्कर इस समय अपनी बहन के साथ देश से फ़रार बताए जा रहे हैं लेकिन सागर के गुरु माने जाने वाले जगदीश कनानी को मुंबई के बोरीवली इलाके से गिरफ़्तार कर लिया गया है.

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बीपीओ की आड़ में चल रहे इस गोरखधंधे में सिर्फ़ भरोसे के आदमी को ही शामिल किया जाता था. कई लोगों को यह भी कहा गया कि वो हिंदुस्तानियों को नहीं लूट रहे बल्कि अमरीका में मौजूद काला धन यहाँ ला रहे हैं और इसके लिए पुलिस भी उन्हें परेशान नहीं करेगी.

हर चांगली (सफल 'डील' का कोडवर्ड) कॉल करने वाले को दो डॉलर प्रति कॉल, टैक्स अधिकारी बनकर डराने वाले को तीन से चार डॉलर प्रति कॉल और फिर डील करने वाले को सात डॉलर प्रति कॉल के हिसाब से पैसा मिलता.

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इसके बाद आने वाली रक़म दुबई या सिंगापुर और कभी-कभी अमरीका के किसी विदेशी अकाउंट से होते हुए सागर तक पहुंचती और गिरफ़्तार हुए सागर के नज़दीकी सहयोगी हैदर ने पुलिस को बताया कि इसका 30 फ़ीसदी अमरीकी एजेंट को देने के बाद बाकी की रकम का 40 फ़ीसदी पार्टनर्स को दिए जाते और 60 फ़ीसदी सागर रखता.

एफ़बीआई की सूचना के अनुसार, अमरीका में इस तरह की शिकायत साल 2013 में पहली बार आई थी.

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