रक्षा सौदा: रोल्स रॉयस का 'भारतीय को गुप्त भुगतान'

बीबीसी और द गार्डियन को एक जांच में रोल्स रॉयस के भ्रष्टाचार में शामिल होने के सबूत मिले हैं.

बीबीसी के पैनोरमा प्रोग्राम को जानकारी मिली है कि कंपनी ने एक अनरजिस्टर्ड भारतीय एजेंट को एक करोड़ पाउंड का गुप्त भुगतान किया है.

'पैनोरमा' को संदिग्ध नकदी पेमेंट के सबूत भी मिले हैं और हो सकता है कि इससे रोल्स रॉयस को हॉक विमानों के इंजन का बड़ा अनुबंध पाने में मदद मिली हो.

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Image caption सुधीर चौधरी भारत सरकार की ब्लैक लिस्ट में हैं

रोल्स रॉयस हमेशा कहता आया है कि वो अपने कामकाज में रिश्वत और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करता है.

भारत में रक्षा सौदे हासिल करने के लिए किसी बिचौलिए को कोई भी भुगतान करना गैर-कानूनी है. लेकिन पैनोरमा की जांच से संकेत मिलते हैं कि रोल्स रॉयस ने हथियारों के डीलर सुधीर चौधरी से जुड़ी कंपनियों को पैसा दिया.

चौधरी, भारत सरकार की उस ब्लैक लिस्ट में हैं, जिसमें 'भ्रष्ट गतिविधियों' में शामिल लोगों के नाम हैं.

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Image caption भारत ने रॉल्स रॉयस इंजन वाले 123 हॉक जेट ख़रीदे हैं

सुधीर चौधरी के वक़ीलों ने बीबीसी को बताया, ''चौधरी ने कभी सरकारी अधिकारियों को रिश्वत नहीं दी और ना ही कभी रक्षा सौदों में अवैध बिचौलिए की भूमिका अदा की है.''

उनके वक़ीलों ने कहा कि चौधरी को लिस्ट (ब्लैक लिस्ट) के तथ्यों की कोई जानकारी नहीं है.

अरबपति चौधरी लंदन में रहते हैं और मई में प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे से बिजनेस अवॉर्ड लेते उनकी तस्वीर भी छपी है.

वे भारत पर लिबरल डेमोक्रेट नेता टिम फेरन के भारत संबंधी मामलों के सलाहकार हैं और उनके परिवार ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को 16 लाख पाउंड (क़रीब 16 करोड़ रुपए) से अधिक डोनेशन दी है.

इस संयुक्त जांच में ये भी पता चला है कि संदिग्ध भुगतान नकदी में किया गया.

इस मामले में चौधरी के बेटे भानू भी शामिल हैं, जो हथियारों के क्षेत्र में काम करने वाले एक शख़्स पीटर जिंजर के साथ साल 2007 में स्विटज़रलैंड गए थे.

इस दौरे पर जिंजर ने एक गोपनीय बैंक खाते में हज़ारों पाउंड का भुगतान किया.

ये खाता 'पोर्ट्स्मथ' के नाम से खोला गया था और पैनोरमा ने बैंक खाते के जो दस्तावेज़ बाद में देखे, उनसे पता चला कि इसमें 10 लाख स्विस फ़्रैंक हैं.

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Image caption बीबीसी और द गार्डियन को जांच में नए सबूत मिले

जिंजर भारत सरकार को हॉक विमान बेचने से जुड़े सौदे में अहम भूमिका निभा रहे थे. इन सभी विमानों में रोल्स रॉयस इंजन लगे थे और ये सौदा कंपनी के लिए करीब 40 करोड़ पाउंड का था.

भानू चौधरी के वक़ीलों ने स्पष्ट तौर पर इन आरोपों से इंकार किया. उनके वकीलों ने बीबीसी को बताया कि उन्हें भारत में रोल्स रॉयस को सौदा दिलाने के लिए कोई भुगतान नहीं हुआ था. इसमें हॉक विमानों की बिक्री भी शामिल है.

उनके वक़ील ने कहा, "चौधरी ने कभी जिंजर या किसी और को कोई रिश्वत नहीं दी है. उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि जिंजर ने कौन सा खाते खुलवाए या चलाए या फ़िर उनमें कितना पैसा डाला."

जिंजर ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने कभी रोल्स रॉयस की नुमांदगी नहीं की और न ही कभी उनके साथ कोई वित्तीय लेन-देन किया है. जिंजर ने कहा कि उन्होंने "ना कभी रिश्वत ली है और ना दी है."

साल 2014 में सुधीर और भानू चौधरी को रोल्स रॉयस मामले से जुड़ी ब्रितानी सीरियस फ़्रॉड आफ़िस की जांच के तहत गिरफ़्तार किया गया था. दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया.

रोल्स रॉयस का कहना है कि वो "जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है" और वो "जांच पर कोई और टिप्पणी नहीं कर सकते."

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