भारतीय मूल के कारोबारी फ़िर सुर्खियों में

  • 1 नवंबर 2016
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Image caption पिछले 14 साल से ब्रिटेन में बसे हैं चौधरी

ब्रिटिश कंपनी रोल्स रॉयस के भ्रष्टाचार में शामिल होने के सबूत सामने आए हैं. बीबीसी पैनोरमा और गार्डियन की संयुक्त जांच में ख़ुलासा हुआ, तो इस मामले में उछले एक नाम ने सभी का ध्यान खींचा.

ये नाम है सुधीर चौधरी. सबूतों के मुताबिक़, रोल्स रॉयस ने हथियारों के डीलर चौधरी से जुड़ी कंपनियों को पैसा दिया.

चौधरी, भारत सरकार की उस काली सूची में हैं, जिसमें 'भ्रष्ट गतिविधियों' में शामिल लोगों के नाम हैं.

जांच में संदिग्ध नक़दी पेमेंट किए जाने के सबूत भी मिले हैं और हो सकता है कि इससे रोल्स रॉयस को भारत में हॉक विमानों के इंजन का बड़ा अनुबंध पाने में मदद मिली हो.

सुधीर चौधरी या उनके परिवार का नाम पहली बार नहीं उछला है.

फ़रवरी 2014 में सुधीर चौधरी और उनके बेटे भानु को इंडोनेशिया और चीन में घूस देने के आरोपों की जांच के तहत गिरफ़्तार किया गया था. हालांकि, उन्हें बिना किसी शर्त रिहा भी कर दिया गया.

67 साल के सुधीर मूल रूप से भारत के रहने वाले हैं. वे फ़िलहाल लंदन में रहते हैं और क़रीब 12 साल पहले ब्रिटेन पहुंचे थे. मार्च, 2013 में मौजूदा ब्रितानी प्रधानमंत्री और तत्कालीन गृह मंत्री टेरीज़ा मे ने उन्हें एशियन बिज़नेस अवॉर्ड में लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाज़ा था.

इस समारोह के बाद उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय 'कड़ी मेहनत और सिर्फ़ कड़ी मेहनत' को दिया था.

चौधरी परिवार के कारोबार में सीएंडसी अल्फा ग्रुप, सीएंडसी बिज़नेस सॉल्यूशंस और अल्फा हेल्थकेयर शामिल है. इन कंपनियों ने 2004 से 2014 के बीच राजनीतिक दल को 13 करोड़ पाउंड से ज़्यादा दान दिया.

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Image caption फ़िर गर्माया हॉक जेट की ख़रीद से जुड़ा मामला

इसमें साल 2010 में 4 लाख पाउंड से ज़्यादा दी गई डोनेशन भी शामिल है, जो उस साल लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को मिले कुल पैसे में 8.5 फ़ीसदी था. उस साल ब्रिटेन में चुनाव हुए थे.

ख़ुद सुधीर चौधरी और भानु चौधरी ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को इन 10 साल में क़रीब 1.85 लाख पाउंड दिए. इस परिवार के कारोबार में वो कंपनियां शामिल हैं, जो बुज़ुर्गों और मानसिक रोगियों को सेवाएं मुहैया कराती हैं.

सुधीर भारत पर लिबरल डेमोक्रेट नेता टिम फ़ेरन के भारत संबंधी मामलों के सलाहकार हैं.

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