'अफ़ग़ान गर्ल' को नहीं मिली ज़मानत

शरबत गुला

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शरबत गुला की पेशावर कोर्ट में सुनवाई के दौरान की गई तस्वीर

नेशनल जियोग्राफिक मैगज़ीन के मुख्य पृष्ठ से अमर हुई अफ़ग़ानी महिला शरबत गुला को पाकिस्तान में धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है.

शरबत गुला जिनकी कभी ना भूली जाने वाली हरी आंखों ने उन्हें मशहूर कर दिया था, 1984 में सोवियत के क़ब्ज़े वाले अफ़ग़ानिस्तान से भाग कर पाकिस्तान आईं थी.

उनकी तस्वीर भी पाकिस्तान के शरणार्थी शिविर में ही ली गई थी. उस वक़्त वो 17 साल की थीं.

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1984 में ली गई शरबत गुला की तस्वीर

शरबत गुला पर पाकिस्तान में फ़र्ज़ी पहचान पत्र के साथ रहने का आरोप है, जिसके तहत उन्हें 14 साल तक की सज़ा हो सकती है.

पाकिस्तान ने हाल ही में फ़र्ज़ी पहचान पत्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की है.

पाकिस्तानी पहचान पत्र पाने के लिए सख़्त प्रतिबंध हैं, इसके बिना पाकिस्तान में ना तो बैंक अकाउंट खोले जा सकते हैं और ना ही कोई संपत्ति ख़रीदी जा सकती है.

तकनीकी तौर पर शरबत गुला ये नहीं कह सकतीं कि उन्होने धोखाधड़ी नहीं की. लेकिन मानवता के आधार पर कई लोगों का मानना है कि वो उन हज़ारों अफ़ग़ान शरणार्थियों में से ही एक है जिन्होनें ऐसा ही अपराध किया है.

दुर्भाग्य से शरबत पाकिस्तान की शरणार्थियों के लिए अचानक बनाई गई नीति का शिकार हो गईं.

इसके तहत उन्हें जल्दी से जल्दी देश छोड़ना होगा.

पाकिस्तान का ये फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान से उसके तेज़ी से बिगड़ते संबंधों के बीच आया है.

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1984 में शरबत गुला की तस्वीर लेने वाले फोटोग्राफर स्टीव मैककरी

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पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि चरमपंथी पाकिस्तान पर हमला करने के मक़सद से शरणार्थी शिविरों में पनाह ले रहे हैं.

कुछ लोगों के मुताबिक़ एक और वजह ये हो सकती है कि भारत के अफ़ग़ानिस्तान को सहयोग करने के चलते इस्लामाबाद काबुल को आर्थिक नुक़सान पहुंचाना चाहता हो.

शरबत गुला को दो साल की छानबीन के बाद अफ़ग़ान सरहद के पास पेशावर से गिरफ्तार किया गया है.

उन्होंने कथित तौर पर अप्रैल 2014 में शरबत बीबी के नाम से पहचान पत्र के लिए आवेदन दिया था.

रविवार को पाकिस्तान के गृहमंत्री चौधरी निसार अली ख़ान ने कहा था कि उन्हें ज़मानत मिल जाएगी. लेकिन जज ने ये कहते हुए उनका आवेदन नामंज़ूर कर दिया कि वो अपने पक्ष रखने में असफल रहीं.

अगर धोखाधड़ी के दावे सच निकले तो वो उन हज़ारों अफ़ग़ान शरणार्थियों में एक होंगी जो अपने युद्धग्रस्त देश में वापस ना लौटने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहे हैं.

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