पाकिस्तान भी प्रदूषण से परेशान

  • 7 नवंबर 2016
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स्मॉग यानी धूल और प्रदूषण से छाई धुंध से सिर्फ भारत की राजधानी दिल्ली ही नहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान भी जूझ रहा है. पाकिस्तान पंजाब में विशेषज्ञ इसे 'वातावरण और जनता के स्वास्थ्य के लिए आपात स्थिति' कह रहे हैं.

पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि स्मॉग का कारण निर्माण के दौरान उठने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण और भारत के पंजाब के इलाक़े में बड़ी मात्रा में फसलों को जलाना है.

कई लोगों का मानना है कि सरकार को भारत पर दोषारोपण करने के बजाय दोनों देशों को मिलकर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क़दम उठाने चाहिए.

द एक्प्रेस ट्रिब्यून का कहना है, ''हालांकि पंजाब सरकार स्मॉग के लिए कुछ हद तक भारत के औद्योगिक ढांचे को दोषी मानता है, लेकिन वायु प्रदूषण के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय गठबंधन की आवश्यकता है. भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में औद्योगिक क्षेत्र हैं. यदि ऐसा नहीं होता तो पाकिस्तानी शहरों में मास्क के साथ-साथ स्वच्छ हवा के वैसे ही कनस्तरों की ज़रूरत होगी जैसे बीजिंग में बेचे जा रहे हैं.''

पर्यावरण वकील अहमद राफ़े आलम का कहना है कि स्मॉग पर बिना सोचे समझे कारण दिए जा रहे हैं लेकिन मामले की गंभीरता को उपयुक्त वायु गुणवत्ता नापने के उपकरण से ही निर्धारित किया जा सकता है.

उन्होंने द नेशन में लिखा, ''उपकरणों की मॉनिटरिंग के बिना हम स्मॉग से निपटने की योजना ही नहीं बना सकते.''

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आलम ने लिखा कि अगर पाकिस्तान में स्मॉग का कारण भारतीय फसलों का जलना है तो इस बात को कूटनीतिक स्तर पर उठाना होगा.

उनके अनुसार, अगर स्मॉग सरहद पार का मुद्दा है तो ये दक्षिण एशियाई कूटनीति के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.

वरिष्ठ पत्रकार ज़ीशान हैदर कहते है कि पाकिस्तान और भारत दोनों देशों को वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सहयोग की ज़रूरत है. ऐसा इसलिए ज़रूरी है कि सरहद की दोनों ओर रहने वाले लाखों लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं.

उन्होनें द न्यूज़ में लिखा, ''हालांकि कुछ साज़िशों की थ्योरियां गढ़ने वालों का आरोप है कि भारत ने जानबूझकर सरहद पर कोयला संयंत्र लगाए हैं जिससे पाकिस्तान में वायु प्रदूषण फैले. इस ज़हरीले उत्सर्जन से भारत को ही ज़्यादा नुक़सान हो रहा है.''

सेना समर्थक अख़बार पाकिस्तान ऑब्ज़र्वर का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों, लगातार हो रहे औद्योगिकरण और वाहनों की गतिविधियों को संतुलित कर जलवायु में हो रहे बदलावों के असर को कम किया जा सकता है.

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