ट्रंप को क्यों चुभोई जा रही हैं 'सुइयां'

सेफ़्टी पिन

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अमरीका में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद सेफ़्टी पिन, नस्लवादी और धार्मिक हमलों और हिंसक घटनाओं के पीड़ितों के साथ एकजुटता का प्रतीक बन गई है.

ब्रिटेन में यूरोपीय संघ से अलग होने के फ़ैसले के बाद बढ़ी हिंसक घटनाओं के जवाब में एकजुटता के प्रतीक के रूप में सेफ़्टी पिन पहनना शुरू हुआ था.

लोगों ने इसे एक राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल किया.

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राष्ट्रपति चुने गए डोनल्ड ट्रंप ने अपने विजय भाषण में कहा था कि वो सभी अमरीकियों के राष्ट्रपति होंगे.

लेकिन अपने चुनाव अभियान में उन्होंने मुसलमानों, लातिनी मूल के लोगों, महिलाओं और स्पेनिश भाषा बोलने वालों को निशाने पर रखा था.

उनकी जीत के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही अमरीका के कई शहरों से अल्पसंख्यकों पर हमलों की ख़बरें आईं थीं.

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ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अमरीका में कई जगहों पर ट्रंप के विरोध में रैलियां निकाली गईं

कैलिफ़ोर्निया में पुलिस ने हिजाब पहने एक मुस्लिम छात्रा पर हमले की जाँच की. सैन डिएगो यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रा पर हमला करने वाले युवकों ने ट्रंप की जीत को लेकर टिप्पणियां भी की थीं.

संदिग्धों ने छात्रा की कार की चाबी छीन ली थी, बाद में कार भी ग़ायब मिली थी.

दक्षिण फिलाडेल्फिया में अश्लील संदेश दीवारों पर लिख दिए गए. दीवारों पर नाजी समर्थक ग्रैफ़िटी भी देखी गई है.

ट्रंप समर्थकों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा की भी रिपोर्टें हैं. शिकागो में एक ट्रंप समर्थक के साथ मारपीट का मामला भी सामने आया है.

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सेफ़्टी पिन को उम्मीद और एकजुटता के प्रतीक के रूप में सबसे पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नीदरलैंड्स पर हमले के समय इस्तेमाल किया गया था.

डच नागरिकों ने रानी के प्रति वफ़ादारी के प्रतीक के तौर पर उन्हें अपने कॉलर के नीचे लगाना शुरू कर दिया था.

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