दुनिया का सबसे गर्म साल 2016!

  • मैट मैक्ग्रा
  • पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी
जलवायु परिवर्तन

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साल 2016 वैश्विक आधार पर सबसे गर्म साल साबित होगा. आंकड़े इसी ओर इशारा कर रहे हैं.

शुरुआती नौ महीनों के आंकड़ों पर ग़ौर करने के बाद वैज्ञानिक 90 फ़ीसद निश्चित हैं कि साल 2016, तापमान के मामले में 2015 को पीछे छोड़ देगा.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के मुताबिक़ जनवरी से सितंबर के बीच तापमान, औद्योगिकीकरण से पहले के दौर की तुलना में 1.2 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा दर्ज किया गया.

इस संस्था का मानना है कि साल के बाक़ी दिन भी तापमान ज़्यादा रहेगा, जिसकी वजह से पिछला रिकॉर्ड टूट सकता है.

अल-नीनो का असर पड़ा है, लेकिन तापमान बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण कार्बन उत्सर्जन है.

डब्ल्यूएमओ महासचिव पेटरी तलास ने कहा, "एक और साल, एक और रिकॉर्ड. साल 2015 में जो हमने सबसे ऊंचा तापमान दर्ज किया था, वो साल 2016 में टूटने वाला है."

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साल दर साल तापमान बढ़ता जा रहा है

उन्होंने कहा, "पर्यावरण बदलाव की वजह से मौसम संबंधी भीषण हालात बन रहे हैं. लू चलना और बाढ़ आना सामान्य होता जा रहा है. समंदर का स्तर बढ़ने की वजह से चक्रवात से जुड़े हालात बनने लगे हैं."

इस बीच डोनल्ड ट्रंप के अमरीकी राष्ट्रपति चुने जाने के बाद इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं कि वो पर्यावरण में बदलाव के मुद्दे पर क्या रुख़ अपनाते हैं.

वैज्ञानिक इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन की सच्चाई से जुड़े सबूत पहले से कहीं ज़्यादा स्पष्ट दिखने लगे हैं.

डब्ल्यूएमओ के आकलन के मुताबिक 17 में से 16 सबसे गर्म साल इसी सदी में दर्ज किए गए हैं. इस मामले में साल 1998 अपवाद है.

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