तेज़ी से बढ़ रहे अमरीका में भारतीय छात्र

  • 15 नवंबर 2016

अमरीका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की तादाद में पिछले साल 25 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है और ये संख्या अबतक की सबसे अधिक है.

2016 के ओपन डोर्स डाटा के मुताबिक़ भारतीय छात्र-छात्राएं अमरीकी अर्थव्यवस्था में 5.5 अरब डॉलर का सहयोग देते हैं.

जबकि अमरीका में भारतीय छात्रों की तादाद बढ़ रही है वहीं ब्रिटेन में पिछले चार सालों में ये 50 फ़ीसद कम हो गई है.

विश्लेषकों का कहना है कि ब्रिटेन के कड़े वीज़ा नियम और डॉलर के सामने रुपए में स्थिरता इसकी वजह है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका में फ़िलहाल 1,65,918 भारतीय पढ़ रहे हैं, जबकि 2014-15 में ये तादाद 1,32,888 पर थी.

ये आंकड़े इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल एजुकेशन और अमरीका के स्टेट डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ़ एजुकेशनल एंड कल्चरल अफ़ेयर्स ने जारी किए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार दूसरे साल अमरीका में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में भारतीयों की तादाद सबसे ज़्यादा बढ़ी है. ग्रेजुएशन और ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग में जुड़ने वाले छात्र सबसे अधिक हैं.

अमरीका में पढ़ने वाले 5 लाख से ज़्यादा विदेशी छात्रों में आधे से ज़्यादा संख्या चीन, भारत और सऊदी अरब से आने वाले नौजवानों की है.

चीन के सबसे ज़्यादा नौजवान अमरीका में पढ़ते हैं और उनकी संख्या भारतीयों से दोगुनी है.

रिपोर्ट में कहा गया है, "लेकिन भारत का ग्रोथ रेट और कुल इज़ाफ़ा चीन से ज़्यादा है."

आईआईई में डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट रजिका भंडारी ने मिंट अख़बार से कहा, "पिछले कुछ साल के दौरान डॉलर की तुलना में रुपए के संभलने से जिन भारतीयों ने अमरीका आने की योजना बना रखी थी, वो अब यहां आने लगे हैं."

भंडारी ने कहा, "और आख़िरकार ब्रिटेन में कड़ी नीतियों की वजह से भारतीय छात्र अब अमरीका का रुख़ करने लगे हैं."

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