'22 साल कैसे बिताए मैंने जेल में'

  • मारियो कैसियोटोलो
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निक यारिस
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निक यारिस

निक यारिस ने दो दशक से ज्यादा वक़्त जेल के अंदर अपनी मौत की सज़ा का इंतज़ार करते हुए बिता दिया.

वो अमरीका के एक जेल में बलात्कार और खून के इल्जाम में दो दशक से ज्यादा वक़्त तक बंद रहे. आख़िरकार डीएनए टेस्ट से यह साबित हुआ कि उनके ऊपर लगे इल्जाम ग़लत थे और वो निर्दोष थे.

उन्हें निर्दोष साबित किए जाने के बाद उनकी प्रतिक्रिया थी, "मैं वाकई में इस बात पर यकीन करता हूं कि 22 साल तक मौत के इंतज़ार ने ही मेरी ज़िंदगी बचाई है. यह मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा जोखिम था और मैं इससे बच निकला."

निक यारिस ने कभी भी अपने ऊपर लगे आरोपों के लिए माफी नहीं मांगी. क्योंकि उन्हें पता था उन्होंने ग़लत नहीं किया है.

वो जेल में ज्यादातर अपना वक़्त अकेले में ही गुजारते थे. कभी-कभी जेल के गार्ड उन्हें बुरी तरह पीटते थे. एक बार तो पिटाई के दौरान उनके रेटिना को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा था.

जेल में रहते हुए उन्हें हमेशा लगा कि उन्हें फांसी दे दी जाएगी.

उनका कहना है, "जब आपको लोग मार रहे होते हैं तो अच्छा बने रहना सबसे मुश्किल काम होता है."

जेल में रहते हुए निक ने क़ानून की पढ़ाई की. वो कभी-कभी दिन भर में तीन-तीन किताबें पढ़ लिया करते थे.

वो कहते हैं, "मेरे पढ़ने का एकमात्र मकसद यह था कि मैं फांसी पर चढ़ने से पहले अपनी बात बेहतर तरीके से रख सकूं."

निक अब अपनी किताब लिख रहे हैं जिसका नाम है द फियर ऑफ़ 13.

उन्होंने अपनी किताब का यह नाम इसलिए रखा है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी ज़िंदगी में 13 तारीख को ही बुरी चीजें हुई हैं.

वो अपनी जेल की दास्तां सुनाते हुए कहते हैं, "मुझे कभी भी जेल में रहते हुए मनोवैज्ञानिक मदद की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि मैंने जेल में मनोविज्ञान पढ़ा था और उसके नियमों को ख़ुद पर लागू करता था."

निक का बचपन फिलाडेल्फिया में अपने मां-बाप और पांच भाई-बहनों के साथ आराम से गुजर रहा था. लेकिन जब वो सिर्फ़ सात साल के थे तब उनकी ज़िंदगी में कुछ ऐसा हुआ जिसने उनकी ज़िंदगी बदल डाली.

उन्हें कम उम्र के कुछ लड़कों ने बुरी तरह मारा था. उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी और उनके दिमाग़ को गहरा नुकसान पहुंचा था.

उन लड़कों ने उन पर हमला करने के बाद उनके साथ रेप किया था. निक ने इस बारे में अपने मां-बाप को कुछ नहीं बताया.

उनके ऊपर हुए इस हमले ने उनके व्यवहार को बदल डाला और वो शराब पीने लगे और ड्रग्स भी लेने लगे.

जब वो 20 साल के थे तब उन्हें एक पुलिस अफसर को अगवा करने और उसे मारने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

बाद में वो इस मामले में बरी हो गए थे.

लेकिन जब वो हिरासत में थे तब उन्होंने अपने आप को जेल से बाहर लाने के लिए एक कहानी गढ़ी थी. उन्होंने पुलिस से कहा कि वो जानते हैं कि किसने लिंडा मे क्रेग नाम की एक महिला को मारा है.

जबकि इस महिला के बारे में उन्होंने सिर्फ़ अख़बारों में पढ़ा था और कभी मिला भी नहीं था.

निक इसके बारे में कहते हैं, "मैं हताश था. मैं ड्रग्स की चंगुल में फंसा एक बेचैन लड़का था जिसे यह नहीं पता था कि कैसे जेल से बाहर आना है. "

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निक यारिस की तरह मौत की सज़ा पाए कैदी जेल की इन्हीं कोठरियों में बंद रहते हैं.

उन्होंने पुलिस वालों से कहा कि जिसने लिंडा का खून किया है, उस आदमी के साथ मैं थोड़े वक़्त के लिए रहा चुका हूं.

निक को लगता था कि जिस आदमी के बारे में वो पुलिस के बता रहे हैं, वो मर चुका है इसलिए वो बच जाएंगे. इस आदमी ने एक बार निक के पैसे भी चुराए थे.

लेकिन जैसा निक ने सोचा था, वैसा नहीं हुआ. क्योंकि वह शख़्स ज़िंदा था. इसलिए अब पुलिस ने उलटे निक पर ही लिंडा के खून और बलात्कार का आरोप लगा दिया.

1982 में उन्हें बलात्कार और खून के इल्जाम में फांसी की सज़ा सुनाई गई.

1988 में उनके डीएनए टेस्ट करने का आदेश दिया गया.

वो अमरीका में मौत की सज़ा पाए हुए पहले ऐसे शख़्स थे जिनका डीएनए टेस्ट किया जा रहा था.

हालांकि उनके डीएनए टेस्ट के आधार पर उन्हें बरी करने में लंबा अरसा लग गया.

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