फ़ेसबुक पर फ़र्ज़ी ख़बरों को ऐसे रोकेंगे ज़करबर्ग

मार्क ज़करबर्ग
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फ़ेसबुक फाउंडर मार्क ज़करबर्ग

फ़ेसबुक फाउंडर मार्क ज़करबर्ग ने फ़र्जी ख़बरों से निपटने के लिए योजना तैयार कर ली है. ज़करबर्ग को उम्मीद है कि इससे वो फ़ेसबुक पर ग़लत ख़बरों और अफ़वाहों को रोकने में कामयाब होंगे.

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में फ़ेसबुक पर फ़र्जी ख़बरों के कारण काफी विवाद पैदा हुआ था. कई यूज़र्स की शिकायत थी कि फ़ेसबुक पर इन 'ग़लत ख़बरों' की वजह से अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव प्रभावित हुआ.

ज़करबर्ग ने ग़लत सूचनाओं के ख़िलाफ़ उठाए जाने वाले क़दम के बारे में विस्तृत जानकारी पोस्ट की थी. इसमें लोगों की पहचान और वेरिफिकेशन पर भी कड़ी नज़र रहेगी. अपनी पोस्ट में अरबपति ज़करबर्ग ने लिखा है, ''हम लोग इस समस्या पर लंबे समय से काम कर रहे हैं और हम इसकी जिम्मेदारी गंभीरता से लेते हैं.''

हलांकि उन्होंने कहा कि समस्या काफी जटिल है. ज़करबर्ग ने कहा कि इस मामले में तकनीकी रूप से भी दिक्क़त है. उन्होंने कहा कि फ़ेसबुक उन्हें निराश नहीं करेगा जो विचारों और सच्चाई को साझा करते हैं. उत्तरी अमरीका के टेक्नॉलज़ी रिपोर्टर डेव ली का मानना है कि फ़ेसबुक के लिए फ़र्जी ख़बरों को रोकना बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि हम लोग उन अज्ञात क्षेत्रों से बिल्कुल अपरिचित हैं. किसी प्राइवेट कंपनी के लिए तत्काल इन चीज़ों को रोकना आसान नहीं है.

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आलोचकों के मुताबिक़ फ़ेसबुक पर कई फ़र्ज़ी ख़बरों से डोनल्ड ट्रंप को मदद मिली

उन्होंने कहा कि तकनीकी कंपनियों को क्या करना चाहिए और पब्लिक को क्या जानने की अनुमति मिलनी चाहिए, दोनों के बीच काफी अंतर है.

डेनी ने कहा, ''इस मामले में ज़करबर्ग लंबे समय तक इन जटिलताओं से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं. ज़करबर्ग का वैश्विक लक्ष्य उनकी बुद्धिमता पर निर्भर है. उनके लिए फ़र्जी ख़बर एक बड़ी परीक्षा है और उन्होंने इसे ठीक से हैंडल नहीं किया है.''

ज़करबर्ग ने कहा कि फ़ेसबुक में इसे लेकर सात प्रस्तावों पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि ग़लत सूचनाओं को लेकर फ़ेसबुक बेहद गंभीर है. पिछले हफ्ते चुनावी नतीजे आने के बाद ज़करबर्ग को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. कई आलोचकों ने कहा कि फ़र्जी ख़बरों के कारण ट्रंप को और बढ़त मिली.

हालांकि ज़करबर्ग ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया. हालांकि फ़र्जी न्यूज साइट्स का उभार हो रहा है क्योंकि इनका टारगेट वेब विज्ञापन हासिल करना होता है.

फ़र्जी खबरों को मज़ाकिया अंदाज़ के नाम पर पेश किया जाता है लेकिन इस पर लोग भरोसा भी कर बैठते हैं. इन खब़रों को काफी साझा किया जाता है. इन्हें लाइक्स भी काफी मिलते हैं.

सोमवार को गूगल ने घोषणा की थी कि वह फ़र्जी न्यूज़ साइट्स को विज्ञापन के ज़रिए कमाने से रोकेगा. इसके बाद फ़ेसबुक ने भी इसी तरह की घोषणा की थी.

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