राष्ट्रपति कार्यालय और वायग्रा की 400 गोलियां

  • 23 नवंबर 2016
Image caption पार्क गियून-हाय

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पार्क गियून-हाय की निजी ज़िंदगी को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं. लेकिन ताज़ा मामला सबसे रोचक है.

ये मामला कामोत्तेजक दवाई वायग्रा की गोलियां ख़रीदने से जुड़ा है. वायग्रा ऐसी दवा है जिससे पुरुषों में कामोत्तेजना बढ़ती है.

ये बात सामने आई है कि राष्ट्रपति के दफ़्तर ने भारी मात्रा में वायग्रा की गोलियां ख़रीदी हैं.

फिर क्या था, ये बात सार्वजनिक होते ही राष्ट्रपति दफ़्तर को बचाव में उतरना पड़ा.

आख़िरकार राष्ट्रपति कार्यालय से आधिकारिक बयान जारी किया गया.

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Image caption वायग्रा

राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, ''वायग्रा की लगभग 400 गोलियां ख़रीदी गईं थीं. पू्र्वी अफ़्रीका के दौरे पर ऊंचाई के कारण होने वाली बीमारी से निपटने के लिए इन गोलियां का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि उन गोलियों का कभी भी इस्तेमाल नहीं किया गया था.''

राष्ट्रपति पार्क गियून-हाय पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि उनके एक बहुत ही पुराने पुरुष दोस्त उनके फ़ैसलों को प्रभावित करते हैं.

मीडिया में इस तरह की बातें होती रहती हैं कि राष्ट्रपति क्या पहनती हैं इससे लेकर सरकारी काम काज से जुड़े फ़ैसले पर भी राष्ट्रपति के ये मित्र अपना प्रभाव डालते हैं.

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Image caption वायग्रा

राष्ट्रपति पार्क गियून-हाय के कार्यालय ने किस लिए ख़रीदी थीं वायग्रा की गोलियां वो भले ही चर्चा का विषय हो लेकिन इसी बहाने जानते हैं कि वायग्रा की खोज कैसे हुई थी.

हृदय से जुड़ी एक बीमारी एंजाइना की दवा के रूप में यूके92480 का टेस्ट किया जा रहा था. लेकिन इसका नतीजा निराशाजनक था जिसके कारण इसको बनाने वाली कंपनी फ़ाइज़र ने इसके टेस्ट को बंद करने का लगभग फ़ैसला कर लिया था.

तभी इस दवा की टेस्ट से जुड़े लोगों ने एक ऐसी बात शेयर की जिससे सभी चौंक गए. उन लोगों ने बताया कि इस दवा के इस्तेमाल से उनमें कामोत्तेजना बढ़ रही है और एक नई तरह की उर्जा का अनुभव कर रहे हैं.

कंपनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक क्रिस वेमैन को इसकी जांच करने के लिए कहा गया और उनकी जांच ने दुनिया को ये ख़ास दवा दे दी.

1998 में जब वायग्रा की खोज की गई उससे पहले तक इरेक्टाइल डिसफ़क्शन से निपटने के लिए खाने वाली कोई दवा नहीं थी. इंजेक्शन और दूसरे उपाय ज़रूर थे लेकिन ये बहुत ज़्यादा कारगर नहीं थे.

लेकिन एंजाइना की नाकाम दवा ने दुनिया को ऐसी दवा दी जो सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से एक बन गई है.

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