#100Women: अपने तरीक़े से जीना चाहती हैं नर्ईमा

पाकिस्तान के सामान्य रूढिवादी मुस्लिम परिवार की युवती नईमा अपनी ज़िंदगी अपने ढंग से जीना चाहती हैं, घूमना फिरना चाहती हैं, नौकरी करना चाहती हैं, विदेश में बसना चाहती हैं.

उन्हें अपनी गाड़ी से बच्चे की तरह प्रेम है. वे गाड़ी चलाते हुए आज़ादी महसूस करती हैं, उन्हें लगता है कि उन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है.

नईमा ने बीबीसी से बात की. सुनें उन्हीं की ज़ुबानी.

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नईमा अपनी ज़िंदगी अपने ढंग से जीना चाहती हैं

मैं किसी और के साथ उसके मुताबिक़ जीवन जीना या उसके जीवन में एडजस्ट करना नहीं चाहती हूं. मैं अपनी ज़िंदगी अपने ढंग से जीना चाहती हूं और उसके लिए ख़ुद काम भी करना चाहती हूं.

पहली बार लिपस्टिक तब लगाया जब मैं कॉलेज में थी. मैं लाल लिपस्टिक लगा कर सीधे दादी के कमरे में गई. मैने उनके चेहरे पर नफ़रत और असहमति के भाव देखे. वे इसे स्वीकार नहीं कर पा रही थीं.

यह महज़ लिपस्टिक ही तो था, पर यह मुझ पर फ़बता था और मेरे लिए यही अहम था.

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फरीदाबाद के एक गांव में औरतों ने घूंघट करने से कर दिया है इन्कार

मेरे घर में सभी लड़के-लड़कियों की शादी 24 साल की उम्र तक पंहुचते पंहुचते हो गई थी. लोगों ने मेरे माता पिता से पूछा, इसकी शादी अब तक क्यों नहीं हुई, इसकी तो शादी की उम्र बीत गई.

उनके पास कोई जवाब नहीं था. पर मेरे पास जवाब था, मैंने कहा नहीं.

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नईमा का लिपस्टिक लगाना उनकी दादी को नागवार गुजरा, पर ख़ुद उन्हें अच्छा लगा

मेरा भाई मुझसे सात साल छोटा है. मैं चाहती हूं कि उसे खाना बनाना भी आना चाहिए. मैं उसकी परवरिश इस तरह कर रही हूं कि वह यह माने के लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए.

अपनी ज़िंदगी अपने अनुरूप जीने की इच्छा रखने की वजह से नईमा की गाड़ी पर हमला हुआ. गाड़ी में जगह जगह खरोंचें आ गईं.

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वे कहती है, यह मेरी पहली गाड़ी है, मुझसे इससे बेहद लगाव है. मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है. मैं जब इन खरोचों को देखती हूं, मुझे बहुत ही ग़ुस्सा आता है.

यह गाड़ी मेरे बच्चे की तरह है. मेरे चचेरे भाई-बहनों के बच्चे हैं, मेरा बच्चा यह गाड़ी है.

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गाड़ी चलाते वक़्त नईमा को लगता है कि उन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं, वे पूरी तरह आज़ाद हैं

मेरे परिवार के एक आदमी को मेरी गाड़ी पर ज़बरदस्त विरोध है, क्योंकि मैं लड़की हूं, मैं भला गाड़ी कैसे रख सकती हूं?

विरोध जताने के लिए मैंने यह गाड़ी अपने पास ही रखी और इसका इस्तेमाल सालों करती रही.

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मेरे परिवार में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था कि किसी लड़की को गाड़ी मिले. यह एक तरह से काफ़ी बुरी बात थी. इतनी छूट किसी लड़की को आज तक नहीं मिली .

उन्हें लगता है कि यदि मेरे पास गाड़ी है तो मैं कुछ भी कर सकती हूं, लड़कों के साथ घूमने जा सकती हूं, पार्टी कर सकती हूं, मनमर्जी कर सकती हूं.

मैं एक ई-कॉमर्स स्टार्ट अप में काम करने लगी. मेरे परिवार में किसी लड़की ने आज तक नौकरी नहीं की थी.

कोई लड़की अपने पैरों पर खड़ी नहीं थी. बात यही होती तो भी ठीक थी, पर मैं अपने लिए अलग जिंदगी चाहती थी. मैं अपने ढंग से ख़ुद उसे हासिल करना चाहती थी.

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नईमा दोस्तों के साथ सैर सपाटा चाहती हैं, विदेश में बस जाना चाहती हैं

ड्राइविंग से मुझे आज़ादी का एहसास होता है, मुझे लगता है कि मैं ख़ुद के नियंत्रण में हूं, मेरे ऊपर किसी का नियंत्रण नहीं है.

मैं चाहती हूं कि अकेले दोस्तों के साथ सफ़र करूं. मैं एक दिन लंबी यात्रा की योजना बनाऊंगी.

मेरा सपना है कि मैं नौकरी करूं और विदेश में जाकर कहीं बस जाऊं, जहां मुझे कोई न जानता हो.

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