'कश्मीर में पेलेट नहीं, शॉट गन हो रही इस्तेमाल'

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मानवधिकारों के लिए काम करने वाली एक संस्था के का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पेलेट गन के इस्तेमाल से सैकड़ों लोग स्थायी रूप से शारीरिक नुक़सान पहुंचा हैं, और इनमें से ज्यादातर के आंखों की रोशनी जा चुकी है.

अमरीकी संस्था का कहना है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर क़ाबू पाने के लिए जिस 12 बोर की जिस शॉट गन का इस्तेमाल किया था वो ग़लत था.

फि़ज़िश्यिन फॉर ह्यूमन राइट्स के डॉक्टरों की संस्था ने सोमवार को अमरीका में इस रिपोर्ट को जारी किया.

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रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कश्मीर घाटी में सुरक्षाबल अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करते हुए घायलों के ईलाज में भी रूकावटें डालती रही हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर में जुलाई में में हिज़बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की सुरक्षाबलों की गोलाबीरी में मौत के बाद घाटी में प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

करीब चार महीने तक चले विरोध प्रदर्शनों के दौरान, सुरक्षाबलों के साथ हुई झड़पों में 90 से ज्यादा कश्मीरी जवानों की मौत हो गई थी, सैकड़ों सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं.

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फिसिश्यिन फोर ह्यूमन राइट्स ने भारत प्रशासित कश्मीर में इन प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए लोगों, डॉक्टरों और स्थानीय लोगों से बातचीत और अस्पतालों के रिकॉर्डों का जायज़ा लेने के बाद रिपोर्ट तैयार की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेलेट गन फ़ायरिंग से कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है और 5200 प्रदर्शकारी जख़्मी हुए हैं. रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि इनमें सैकड़ों हमेशा के लिए अपाहिज हो गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, ''पेलेट गन से जो गोलियां दाग़ी जाती हैं उनमें 600 से ज्यादा छर्रे होते हैं, जो ख़ास निशाने पर नहीं जाते बल्कि फैल जाते हैं और आसपास के लोगों को भी जख़्मी करते हैं. इसका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कभी नहीं किया जाना चाहिए.''

संस्था की चिकित्सक सलाहकार डॉक्टर रोहिणी हार का कहना है कि क़रीब से फायर किए जाने पर पेलेट गन, बुलेट गन की तरह की ख़तरनाक होती हैं और दूर से चलाने पर ये उन लोगों पर लग सकती है जो आस-पास खड़े हो और पत्थरबाज़ी न कर रहे हो.

डॉक्टर रोहिणी हार के मुताबिक़ अगर ये छर्रे गर्दन, आंख और चेहरे पर लगे तो इससे काफ़ी गहरा जख़्म हो सकता है.

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संस्था की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सुरक्षाबल जिसे पेलेट गन बता रही है वो गुमराह करने वाला है क्योंकि वो पेलेट गन नहीं बल्कि शॉट गन है.

रिपोर्ट के अनुसार, ''इस 12 बोर की शॉट गन की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय सुरक्षाबल बारूद का इस्तेमाल करते हैं जो इसे पेलेट गन से ज्यादा असरदार बना देती है और जो जानलेवा हो सकता है.''

रिपोर्ट में बताया गया है कि शॉट गन के जानलेवा डिज़ाइन के अलावा 2013 से 2016 तक इसमें जो कारतूस (नंबर 9 शॉट) इस्तेमाल की जा रही हैं उसमें लोहे के छर्रे होते हैं. दुनिया के दूसरे देशों में इसे 'बरडो शॉट' कहा जाता है और इनका इस्तेमाल पक्षियों और छोटे जानवरों को मारने के लिए किया जाता है.

रिपोर्ट में भारतीय प्रशासन पर आरोप लगाया गया है कि आंदोलन के दौरान सुरक्षाबलों ने एम्बूलेंस पर फ़ायरिंग करके सड़क पर आपातकालीन गाड़ियों के आने जाने पर और अस्पतालों में घायलों के ईलाज में रूकावट डाली और ऐसा करके घायल प्रदर्शनकारियों को इलाज करने से भी रोका गया.

रिपोर्ट में ये भी आरोप लगाए गए हैं कि घायलों को इलाज से रोककर, भारत ने जिंदगी और स्वास्थ्य से संबंधित अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया है.

हालांकि रिपोर्ट पर भारत की प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन संसद में कश्मीर मुद्दे पर हुई बहस के दौरान विपक्षी पार्टियों ने इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की मौतों और पेलेट गन पर चिंता ज़ाहिर की थी.

भारत प्रशासित कश्मीर के दौरे के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पेलेट गन के विकल्प तलाशने के लिए एक कमेटी के गठन करने की घोषणा की थी.

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