बच्चे की सेक्स चेंज सर्जरी को अदालती मंज़ूरी

  • 7 दिसंबर 2016
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ऑस्ट्रेलिया की अदालत ने पांच साल के एक बच्चे की इंटरसेक्स सर्जरी को मंज़ूरी दे दी है.

जिन लोगों में पुरूष और महिला दोनों के जननांग होते हैं उन्हें इंटरसेक्स कहा जाता है.

ऑस्ट्रेलिया का ये इंटरसेक्स बच्चा जब पैदा हुआ था तो आनुवांशिक तौर पर लड़का माना गया लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होने लगा उसमें लड़कियों के गुण ज़्यादा नज़र आने लगे.

फ़ैमिली कोर्ट के दस्तावेज़ों के मुताबिक़ इस बच्चे को कार्ला के नाम से जाना जाता है, जिन्हें एक लड़की के तौर पर पहचाना जाता है, लेकिन इनमें महिलाओं के प्रजनन अंग नहीं थे.

कार्ला के माता-पिता ने कोर्ट से उसके पुरूष जननांग को हटाने की सर्जरी की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

दरअसल कार्ला जब पांच साल की हुईं तब उनके माता-पिता ये स्पष्ट करना चाहते थे कि इस जटिल और स्थाई सर्जरी के लिए उन्हें कोर्ट की अनुमति की ज़रूरत है या नहीं.

फ़ैमिली कोर्ट की सुनवाई में बताया गया कि कार्ला महिला जननांग के साथ पैदा हुईं और उनके व्यवहार में लड़कियों के गुण साफ़ तौर पर नज़र आते हैं. उन्हें लड़का बुलाया जाना पसंद नहीं है और वो लड़कियों के कपड़े, खिलौने और काम पसंद करती हैं.

बीबीसी संवाददाता ने जो अदालती दस्तावेज़ देखे उनके मुताबिक़ डॉक्टरों की जांच से ये साबित होता है कि इस सर्जरी से कार्ला को भविष्य में ट्यूमर का ख़तरा कम हो जाएगा और इसके बाद भविष्य में प्रजनन क्षमता होना निश्चित नहीं है.

इसमें ये भी कहा गया है कि ये सर्जरी प्यूबर्टी यानी यौवन काल से पहले होना चाहिए.

एक ऑस्ट्रेलियन अख़बार के मुताबिक़ कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि माता-पिता को सर्जरी के लिए अनुमति की ज़रूरत नहीं थी. ये फ़ैसला जनवरी में सुनाया गया था लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था.

फ़ैमिली कोर्ट के जज कोलिन फॉरेस्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा था, ''मैं मानता हूं कि चिकित्सा संबंधी प्रस्तावित इलाज, जो आवश्यक तौर पर आनुवांशिक शारीरिक ख़ामी ठीक करने के लिए ज़रूरी है, का ना होना और यथावस्था में बने रहना बच्चे की शारीरिक और भावनात्मक सेहत के लिए नुक़सानदेह है.''

कुछ इंटरसेक्स अभियान चलाने वालों ने इस स्थाई सर्जरी को नैतिकता के आधार पर चुनौती दी है, उनका तर्क है कि इस तरह के मामलों में लिंग पहचान कठिन है.

एक वकील मॉर्गेन कार्पेनटर ने बीबीसी को बताया कि ऐसे बच्चों को बड़े होने पर अपनी लिंग पहचान ख़ुद तय करना चाहिए.

मॉर्गेन का कहना है, ''हमें ग़ैर सर्जिकल विकल्प के लिए समुदाय में परामर्श करने की ज़रूरत है.''

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