दो साल में आईएस के '50000 लड़ाकों की मौत'

आईएस (इस्लामिक स्टेट) चरमपंथी

पिछले दो सालों में इराक़ और सीरिया में ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले समूह के 50,000 लड़ाकों की जानें जा चुकी हैं.

अमरीका के एक सैन्य अधिकारी का कहना था कि 'यह आंकड़ा असल तादाद से कहीं कम है.' ये आकड़े अमरीकी गठबंधन सेना के इन दोनों जगहों पर हमले शुरु होने के बाद के हैं.

अधिकारी का कहना था कि एक छोटी अमरीकी सैनिक टुकड़ी और उसकी हवाई ताक़त को अगर स्थानीय समर्थन मिल जाये तो वो प्रभावी काम कर सकती है.

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बंदी बने आईएस लड़ाकों के कैंप

हालांकि अमरीका बार-बार चेतावनी देता रहा है कि आईएस लड़ाकों की भर्ती तेज़ी से कर सकता है.

अधिकारी का कहना था कि मूसल जैसे इलाक़ो में हवाई हमले तेज़ किए जा सकते थे लेकिन नागरिकों के हताहत होने की भी पूरी संभावना से इसे रोक दिया गया है.

अधिकारी के अनुसार, "मैं मारे गए लोगों की गिनती करने के चक्कर में नहीं फंसना चाहता लेकिन इसने दुश्मन पर जिस तरह का असर डाला है उस लिहाज़ से ये अहम है."

अमरीका इस तरह के आकड़े देने से कतराता रहा है.

आईएस साल 2014 में बहुत मज़बूत दिखाई दे रहा था लेकिन फ़िलहाल उसपर रूसी, तुर्की, इराक़ी, सीरियाई, कुर्द, अमरीकी और ब्रितानी - दप तरफ़ से हमले हो रहे हैं.

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